
बकरे के भौंकते ही बाजार में मच गई खलबली, देशी कुत्ता थमा बहरूपिया ले गया बाहुबली
कानपुर. कहावत है--- कौआ कान लेकर उड़ गया..... इस कहावत ने बकरीद के एक रोज पहले तमाम कनपुरियों के दिमाग की बत्ती का फ्यूज उड़ा दिया। चकेरी थाने में बकरों के एक व्यापारी ने शिकायत दर्ज कराई कि शाम के अंधेरे में एक टप्पेबाज ने बकरे के बाजार में देसी नस्ल का कुत्ते को उम्दा नस्ल का बकरा बताकर थमा दिया और गिनती के फेर में उलझते ही टप्पेबाज ने उसके बकरे को गायब कर दिया। शिकायत पर चकेरी थानेदार को यकीन नहीं हुआ, फिर भी एक थाने की टीम मौके पर भेजा। इसी दौरान कुत्ते को बकरा बनाकर बकरा ठगने की कहानी वायरल हो गई। सोशल मीडिया के खबरची धुरंधरों को नया मसाला मिल गया था। धड़ाधड़ शेयरिंग हुई। हद तो तब हुई, जब अगले दिन नामचीन मीडिया में भी खबर को शिकायत के आधार पर बगैर पड़ताल जस का तस छाप दिया गया। चकेरी पुलिस की तफ्तीश में मामला साफ हुआ है। दरअसल, जाजमऊ इलाके के दो व्यापारियों की पुरानी रंजिश और एक-दूसरे से टप्पेबाजी की फितरत ने इस झूठी कहानी को जन्म दिया था। आइए, बकरा और कुत्ता कथा को विस्तार से समझते हैं।
शाम छह बजे बकरा और कुत्ता में फर्क क्यों नहीं
शिकायत मिलने पर चकेरी थानेदार अजय सेठ ने पहले तो मौका-मुआयना कराया। इसके बाद शिकायतकर्ता से सवाल पूछने शुरू किये तो वह अपनी रची-बुनी कहानी में उलझता चला गया। पहला सवाल था कि शाम छह बजे रोशनी रहती है। बावजूद, कुत्ते और बकरे में फर्क क्यों नहीं देख पाया। थानेदार ने पूछा कि बकरे के कान लंबे होते हैं, जबकि कुत्ते के कान छोटे। इसके अलावा कुत्ते की दुम और बकरे की दुम में अंतर भी क्या नहीं दिखा। गौरतलब है कि पहले पुलिस को अंदेशा था कि किसी ऊंची नस्ल के कुत्ते की दुम को काटकर बकरा बताकर थमा दिया होगा। इस सवाल पर थानेदार ने तर्क दिया कि ऊंची नस्ल का कुत्ता भी बीस हजार से कम में नहीं मिलता है। ऐसे में भला कोई टप्पेबाज बीस हजार का कुत्ता देकर दस हजार का बकरा क्यों गायब करेगा। इसी दौरान जांच करने गई टीम ने लौटकर बताया कि मौके पर टप्पेबाजी के शिकार व्यापारी ने देसी नस्ल का कुत्ता दिखाया है, जोकि मरियल जैसा है। इस जानकारी के बाद थानेदार ने अपने अंदाज में सवाल दागने शुरू किये तो शिकायतकर्ता का मुंह बंद हो गया।
रंजिश में झूठी शिकायत दर्ज करने का आरोप
पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि कुत्ते को बकरा बताकर टप्पेबाजी करने की शिकायत दर्ज कराने वाले अशरफ अली की इलाके के दूसरे बकरा आढ़ती के साथ व्यापारिक रंजिश है। कथित घटना वाले दिन अशरफ और उनका प्रतिद्वंद्वी एक किसान पर रियाज करने में जुटे थे। सौदा प्रतिद्वंद्वी के हाथ चला गया तो उसे फंसाने के लिए अशरफ ने बकरा-कुत्ता की कहानी को रच दिया। सीधे तौर पर मोर्चा खोलने से बचने के लिए अशरफ ने शिकायत में नाम नहीं लिखाया था। उसकी मंशा थी कि बाद में पड़ताल के दौरान शिनाख्त कराकर त्योहार बाद प्रतिद्वंद्वी व्यापारी को फंसा देगा।
Published on:
22 Aug 2018 07:04 am
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