गांववालों के मुताबिक सुधा 2014 में पति को छोड़कर अपने मायके आ गई थी।
पिता ने उसे गांव के आंगनबाड़ी में काम पर रखवा दिया था। इसी दौरान उसकी
मुलाकात कुरियां के एक युवक से हो गई। युवक की बहन भी आंगनबाड़ी में नौकरी
करती थी। युवक ने सुधा को आंगनबाड़ी में सहायिका के पद पर नौकरी लगवाने
की बात कही। जिसके चलते दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। युवक हररोज सुधा
के घर आने लगा और उसे नौकरी के नाम पर कानपुर ले जाने लगा। दोनों की
दोस्ती प्यार में बदल गई। गांववालों की माने तो सुधा के परिजन भी युवक के
साथ बेटी की शादी के लिए रजामंद थे, लेकिन युवक के परिजन तैयार नहीं हुए।