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दिवाली में बिक रही बीमारी, 65 लाख की मिठाई पकड़ी

किदवई नगर और अशांक नगर स्थित दो मिठाई कारोबारियों के प्रतिष्ठानों में वाणिज्य कर विभाग ने मारा छापा, 65 लाख रुपये की मिठाई व कच्चा माल पकड़ा और किया सीज।  

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दिवाली में बिक रही बीमारी, 65 लाख की मिठाई पकड़ी

कानपुर। देशभर में दिवाली पर्व को लेकर बाजार गुलजार हैं। महंगाई होने के बावजूद बड़े पैमाने पर ग्राहक खरीदारी कर रहे हैं। कोई कार तो कोई हीरे-जेवरात से बुक रहा है। वहीं मिटाई के कारोबारी भी सक्रिय हो गए हैं और पर्व से पहले 56 प्रकार की मिटाईयां बनाकर उनका स्टॉक करना शुरू कर दिया है। कानपुर में बडे कारोबारी मुनाफा कमाने के चलते कई तरह के प्रतिबंधित सामाग्री का इस्तेमाल मिठाई बनाने में कर रहे हैं, जिससे वो आमलोगों को बीमारी तो सरकार को चूना लगा कर अपनी तिजारी भर रहे हैं। इन्हीं से निपटने के लिए वाणिज्य कर विभाग की टीम ने शहर के दो नामी प्रतिष्ठानों के गोदाम में छापा मार कर करीब 65 लाख कीमत की मिठाई सीज कर दी। विभाग की कार्रवाई से मिटाई कारोबारी दहशत में आ गए तो वहीं खाद्य विभाग भी जाग गया और उसने भी दूकानों में जाकर सैम्पेल लिए।

दो प्रतिष्ठानों में मारा छापा
होली और दिवाली पर्व पर कारोबारियों को चांदी रहती है। पूरे साल मायूषी लगने के बाद उनके चेहरे इन त्योहरों में खिले रहते हैं और इसी का फाएदा कारोबारी उठाते हैं। लोगों को मिठाई के नाम पर जहर बेंचकर अपनी जेब भरते हैं। इन्हीं से निपटने के लिए वाणिज्य कर विभाग और खाद्य़ विभाग की टीम हरकत में आ गई हैं। मुखबिर की सटीक सूचना पर वाणिज्य कर विभाग ने अशोक नगर व किदवई नगर स्थित मिठाई की दो प्रतिष्ठित दुकानों पर छापा मारा था। इस दौरान दोनों दुकानों में अधिकारियों को कोई भी वैध कागजात नहीं मिले। इसपर 65 लाख रुपये की मिठाई, कच्चा माल सीज कर दिया गया। वाणिज्य कर अधिकारियों ने कारोबारियों को चेतावनी दी कि 24 घंटे में टैक्स अदा न करने पर मिठाई नीलाम कर दी जाएगी।

6 लाख देकर छुड़ाई मिठाई
अधिकारियों के मुताबिक दोनों जगह किसी तरह की कोई स्टाक रजिस्टर आदि नहीं मिला। वैट के दौरान प्रतिवर्ष 10 से 12 लाख रुपये का टैक्स जमा किया जाता था लेकिन जीएसटी के दौरान सिर्फ उतनी ही बिक्री दिखाई जाती थी जितनी पर आइटीसी बन जाए। इससे कोई टैक्स जमा नहीं करना पड़ता था। टर्न ओवर छिपाने के भी साक्ष्य मिले हैं। दोनों ही स्थान पर कच्चे पर्चे मिले। दो दुकानों से 65 लाख रुपये की मिठाई सीज करने के बाद वाणिज्य कर अधिकारी भी नीलामी करने को लेकर पशोपेश में थे। उन्हें गुरुवार की रात या शुक्रवार की सुबह तक सीज किया मिठाई का स्टॉक दुकान पर ही बैठकर नीलाम (बिक्री) करना पड़ता। गुरुवार दोपहर बाद कारोबारियों द्वारा साढ़े छह लाख रुपये टैक्स अदा करके मिठाई का स्टॉक रिलीज कराए जाने पर अफसरों ने भी राहत की सांस ली।

एक माह पहले मिटाई का स्टॉक
दिवाली पर्व से माह पहले मिटाई कारोबारी एक्शन में आ जाते हैं और दुध के साथ खोवे का स्टॉक करना शुरू कर देते हैं। मिटाई कारोबारी हरदिन कई क्वींटल मिटाई बनाते हैं और कोल्डस्टोर के अंदर रख देते हैं। दिवाली के दो दिन पहले यही मिठाई ग्राहकों के सामने रख दी जाती है और वो मुंहमांगी कीमत पर बिक जाती है। कारोबारी शहर के मिठाई बनाने वाले कारीगरों को छह सौ के बदले एक से डेढ़ हजार रूपए प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी पर रखते हैं और 24 घंटे 56 प्रकार की मिठाईयां तैयार करवाते हैं। ये मिठाई जहां लोगों को कई रोग देती है तो वहीं सरकारी खजाने को भी चोंट पहुंचाती है। नाबवगंज के मिठाई कारगीर अमित गुप्ता बताते हैं कि दिवाली से पहले हमलोग मिठाई कारोबारियों के बुलावे पर जाते हैं और पंदह से एक माह तक वहीं रूककर कई प्रकार की मिठाई तैयार करते हैं।

खाद्य विभाग अनजान
कारोबारी मिलावट के जरिए मिठाईयां तैयार कर रहे हैं, लेकिन खाद्य विभाग अनजान बना हुआ है। एक सप्ताह के दौरान विभाग की टीम ने छोटे स्तर के दुकानदारों की दुकानों में छापा मारकर कुछ सैम्पेल लिए। लेकिन बड़े कारोबारियों पर हाथ रखने से कतराते हैं। सौरभ श्रीवास्तव बताते हैं कि मिठाई कारोबारी खोए में मावे का इस्तेमाल करते हैं। मिठाई देखने में अच्छी लगे, इसके लिए केमिकल का भी प्रयोग करते हैं। ये खेल बड़े स्तर पर चल रहा है और कारोबारी खाद्य विभाग के अफसरों को इसके बदले कीमत भी देते हैं। वहीं इस मामले पर जब डॉक्टर विकास गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 1 माह पुरानी मिठाई खाने से कई रोग हो सकते हैं। ऐसे में हमारी लोगों से सलाह है कि मिठाई लेते वक्त उसकी गुणवत्ता को परखें।