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मेथाडिस्ट चर्च के अंदर है एक प्वाइंट, यहां से मापी जाती है समुद्र की ऊंचाई

चर्च का निर्माण 103 साल पहले अमेरिका की रहने वाली दिव्यांग महिला लॉरा जॉनसन ने करवाया था।

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कानपुर. क्रिसमस का पर्व नजदीक आते ही शहर के तमाम चर्चों में साज-सज्जा का काम जोरों पर चल रहा है। कानपुर में अंग्रेज शासन के दौरान दर्जनों चर्च बनवाए गए, लेकिन यहां एक ऐसा चर्च भी है, जिसका निर्माण 103 साल पहले अमेरिका की रहने वाली दिव्यांग महिला लॉरा जॉनसन ने करवाया था। दिव्यांग खुद यहां नहीं आई, लेकिन अपने क्रोशिया के हुनर से रजाई, टेबल कवर और ऐसी ही तमाम वस्तुएं बना कर इस चर्च के लिए पैसे जोड़े और फिर इसी धनराशि से एलएलजेएम मेथाडिस्ट बनवाकर ब्रिटिश सैनिकों और नागरिकों को सौंपा था। पादरी जेजे ओलीवर ने बताया शहर के जिस सेंटर प्वॉइंट से समुद्र की ऊंचाई नापी जाती है उसका सेंटर मेथाडिस्ट के अंदर ही है। चर्च को बनाते समय इसमें एक मास्टर की (चाभी) की तरह मास्टर ईंट का इस्तेमाल किया गया है अगर वो इस ईमारत से निकाल दी जाये तो पूरी इमारत भरभरा कर गिर जायेगी। पादरी कहते हैं कि इसे देखने के लिए देश-विदेश से सैकड़ों लोग आते हैं।


दिव्यांग ने रखी थी अधारशिला
सिविल लाइंस में स्थित एलएलजेएम मेथाडिस्ट चर्च का निर्माझा 1814 को अमेरिका की रहने वाली ब्रिटिस महिला लॉरा जॉनसन ने कराया था। लॉरा दिव्यांग थीं और वो चल-फिर नहीं सकती थीं। लेकिन वो एशिया व यूरोप सहित अन्य देश जहां चर्च नहीं थे, वहां उनकी नींव रखवाती थीं। लॉरा ने ब्रिटिश फौजियों और वहां के नागरिकों के लिए अपने दम पर एतिहासिक मेथडिस्ट चर्च का निर्माण कराया। पादरी जेजे ओलीवर कहते हैं कि मेथाडिस्ट चर्च शिल्प की दृष्टि से भी अनोखा है। इस शिल्प को देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते रहते हैं। साथ ही शहर की जिस सेंटर प्वांइट से समुद्र की ऊंचाई मापी जाती है उसका सेंटर चर्च के अंदर आज भी मौजूद है। पादरी ने बताया कि यह यूपी का इकलौता चर्च है, जिसकी नींव एक ईंट के सहारे चल रही है। ब्रिटिश और इंडियन कारीगर ने मिलकर इसे गढ़ा और 103 साल बीत जाने के बाद भी इमारत जस के तस मौजूद है।


ब्रिटिश सैनिकों की थी छावनी
पादरी ने बताया कि लेडी लॉरा कभी कानपुर नहीं आईं। वह धार्मिक महिला थीं और उनमें सेवा भाव था। वह दिव्यांग होने के कारण चलफिर नहीं सकती थीं। तब भारत समेत दक्षिणी एशिया में चर्चों के निर्माण किए जा रहे थे। कानपुर में ब्रिटिश सेना की छावनी के कारण क्रिश्चियनों की संख्या अधिक थी। यह शहर औद्योगिक रूप में विकसित हो रहा था। ऐसे में कानपुर में चर्च के निर्माण कराए जाने की लॉरा ने ठान ली। लेडी लॉरा की दी गई धनराशि को उनके कहने पर इसी चर्च में लगाया गया। इस चर्च की सदस्यता सर्वाधिक है। एलएलजेएम मेथाडिस्ट चर्च के पादरी जेजे ओलीवर ने बताया कि क्रिसमस की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। रंग रोगन हो चुका है और अब सजावट का काम चल रहा है। चर्च में क्रिसमय पर होने वाली इबादत भी शुरू हो चुकी है।


विदेश से आते हैं लोग
पादरी ने बताया कि यहां क्रिसमस डे पर आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड के साथ ही अन्य देशों से बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं पर्व को मनाते हैं। पादरी कहते हैं कि अन्य देशों में क्रिसमस डे को लोग आपस में ही मना लेते हैं। मगर यहरं इसे सब साथ मिलकर मनाते हैं। यहां सभी उम्र के लोगों के अंदर क्रिसमस डे को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिलता है। पादरी ने बताया कि कानपुर में सबसे पुराना क्राइचर्च चर्च है, जो करीब 177 साल पुराना है। कानपुर का यह पहला चर्च था, जिसे ब्रिटिश सरकार ने बनवाया था। लेकिन क्रिसमस के मौके पर भक्त सबसे ज्यादा संख्या में यहीं पर आते हैं। 2014 में चर्च ने अपना सवां जन्मदिन मनाया था, तब लॉरा जानसन के परिवार को लोग यहां आए थे और चर्च के रख-रखाव के लिए धनराशि दी थी।