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750 का टिकट लेकर 1200 श्रृमिक सूरत से पहुंचे कानपुर

लाॅकडाउन के बीच गुजरात से दूसरी ट्रेन श्रमिकों को लेकर पहुंची रेलवे स्टेशन, मेडिकल चेकअप के बाद सभी को रोडवेज के बसों के जरिए उनके घरों के लिए कर दिया गया रवाना।

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750 का टिकट लेकर 1200 श्रृमिक सूरत से पहुंचे कानपुर

750 का टिकट लेकर 1200 श्रृमिक सूरत से पहुंचे कानपुर

कानपुर। लाॅकडाउन के बीच प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की पहल पर हरदिन दूसरे राज्यों से स्पेशल ट्रेन प्रवासी श्रमिकों को लेकर कानपुर सेंट्रल आ रही हैं। सोमवार को बदोदरा के बाद शुक्रवार को गुजरात के सूरत से 1200 श्रमिकों को लेकर ट्रेन शनिवार को सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर पहुंची। अपने घर आने पर उनके चेहरों में खुशी तो रेलवे के अधिकारियों द्धारा वसूले गए टिकट को लेकर दर्द भी था। श्रृमिकों ने बताया कि एक टिकट के बदले हमसे 750 रूपए लिए गए हैं। जबकि केद्र सरकार ने ये सेवा निशुल्क में शुरू की है।

सीएम का उपकार
लाॅकडाउन के बीच शुक्रवार को सूरत शहर से 1200 श्रमिकों को लेकर स्पेशल ट्रेन कानपुर पहुंची। स्टेशन पर यात्रियों को लंच पैकेट और पानी दिया गया। सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन कराते हुए श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई। मेडिकल रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के बाद सभी श्रमिकों को स्टेशन के बाहर खड़ी बसों में बैठाकर उनके जनपदों को भेजा गया। जाते वक्त श्रमिकों ने प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की। फतेहपुर निवासी संगीता ने कहा कि सीएम योगी के चलते हम अपने घर आ सके और ये उपकार पूरी जिंदगी नहीं भूलेंगे।

सूरत में हालात बहुत खराब
संगीता के साथ ही श्रमिक राजा सिंह ने बताया कि वह बस के जरिए सूरत रेलवे स्टेशन पहुंचे। सूरत से ट्रेन 10ः30 में चली। राज सिंह ने बताया कि रेलवे की तरफ से भोजन और एक बोतल पानी हर यात्री को दिया गया। राजा ने बताया कि लाॅकडाउन के चलते सूरत में फंसे श्रृमिकों के हालात बहुत खराब हैं। सबसे ज्यादा कानपुर, फतेहपुर, उन्नाव, बांदा, हमीरपुर, कन्नौज सहित अन्य जनपदों के श्रमिक वहां से अपने-अपने घर आने के लिए हरदिन वहां के प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। सौ से ज्यादा श्रमिक एक सप्ताह पहले पैदल ही निकल लिए थे।

100 रूपए ज्यादा लिए
राजा ने बताया कि रेलवे ने 750 रूपए एक टिकट के तौर पर लिया। टिकट पर 650 रूपए लिखे थे, लेकिन रेलवे ने हमसभी से 100 रूपया अधिक लिया। राजा ने बताया कि रेलवे ने 100 रूपए रास्ते में दिए गए भोजन और पानी के लिए हैं। क्योंक सूरत में हमने जब इस पर रेलवे के अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि समय से और आराम से आपसभी को भेजा जा रहा है। अब ये पैसा प्रदेश व केंद्र की सरकार आपको देगी।

रोडवेज बसों के जरिए रवाना
स्टेशन डॉयरेक्टर हिमांशु शेखर ने बताया कि, रेलवे ने यात्रियों के लिए पानी की व्यवस्था की है और उनके लंच पैकट की व्यवस्था जिला प्रशासन ने की है। इसके साथ ही यहां गुजरने वाली ट्रेनों को हम खाना उपलब्ध करा रहे हैं। जिलाप्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगाई हैं। प्रवासी श्रमिकों का मेडिकल चेकअप कराया गया। थर्मल स्क्रीनिंग कर उनका रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया। इसके साथ ही सभी यात्रियों की डिटेल नोट की जाएगी। इसके बाद रोडवेज की बसों के जरिए उन्हें रवाना कर दिया गया।

लाॅकडाउन के बीच 6 ट्रेनें आई
21 मार्च से अब तक केवल छह ही यात्री ट्रेनें कानपुर के सेन्ट्रल स्टेशन पहुंची हैं। इनमें मंगलवार को गोधरा से चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन पहुंची जो कोरोना महामारी के दौरान कानपुर स्टेशन पहुंचने वाली पांचवी ट्रेन है। इससे तीन दिन पहले चैथी ट्रेन रविवार को आयी थी। यह गुजरात से आई स्पेशल प्रवासी ट्रेन ऐसी गाड़ी थी जो कानपुर के प्रवासियों को लेकर पहली बार आई थी। इससे पूर्व 24 मार्च को दूरंतो गाड़ी उड़ीसा के रेलवे कर्मचारियों को लेकर निकली थी। इसके बाद 26 मार्च को राप्तीसागर दूसरी ऐसे ट्रेन है जो कर्मियों को लेकर गुजरी, लेकिन उसमें भी कोई यात्री नहीं था। इसके बाद दो मई को सेन्ट्रल स्टेशन से तीसरी ट्रेन प्रवासी स्पेशल जयपुर पटना गुजरी। यह पहली गाड़ी थी जो प्रवासियों को लेकर कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन पहुंची, लेकिन इसमें कोई भी कानपुर का यात्री सवार नहीं था। सोमवार को पांचवी और शुक्रवार को 6वीं ट्रेन रेलवे स्टेशन पर आई।