
मुगल शासक अकबर के दीवान ने बनवाई थी ये बारादरी, जो आज बन गया मयखाना
कानपुर देहात- सन 1578 में जब मुगलों का शासन था। बारादरी के शौकीन कहे जाने वाले मुगल शासक अकबर आगरा की गद्दी पर बैठे थे। उस दौरान अकाल की स्थिति पैदा हो गयी। हालात को देखते हुए अकबर के दीवान शीतल प्रसाद शुक्ल ने जनपद के अकबरपुर में एक बारादारी व शुक्ल तालाब का निर्माण कराया था। जहां लोग विहार करने आया करते थे लेकिन आज जिम्मेदारों की अनदेखी में यह स्थान मयखाना बन गया है। बताया गया कि शाम ढलते ही लोग यहां शराब पीकर जुआं के फड़ सजाते हैं। देखा जाए तो मुगलकाल की ये धरोहर अब शराबियों और जुआरियों का अड्डा बन चुका है। कभी यह मुगलकाल का अनूठा नमूना माना जाता था और आज ये ऐतिहासिक स्थल अराजक तत्वों का अड्डा बन गया है। पूरे परिसर में शराब की खाली बोतलें, पन्नियां और गंदगी ने अपना कब्जा जमा लिया है।
अकाल के दौरान बनाई गई थी बारादरी
क्षेत्र के बुजुर्गों द्वारा बताया गया कि जब 1556 में सम्राट अकबर आगरा की गद्दी पर बैठे, तब उन्होंने उसी वर्ष नत्थे खां को अकबरपुर का आलिम नियुक्त किया था। परंतु बाद में बीरबल ने 1563 मे शीतल प्रसाद शुक्ल को भी यहां का दीवान नियुक्त करा दिया था। बताया जाता है कि सन 1578 में जब अकबरपुर क्षेत्र मे भयावह अकाल पड़ा तो नत्थे खां व शीतल प्रसाद शुक्ल ने राजस्व का एकत्र धन राजकोष में न जमा करवा कर लोगों के लिए यहां पक्का तालाब व बारादरी आदि का निर्माण कराया था। उस दौरान अकबर को यहाँ स्वयं आना पडा था तथा उन्होने इस अचल राजस्व की खुलकर प्रशंसा की थी। तभी से इस नगर का नाम अकबरपुर और शीतल शुक्ल के नाम से तालाब का नाम शुक्ल तालाब पड़ गया।
बारादरी में आज मिलती शराब की बोतलें व पालीथीन
कुछ वर्ष पूर्व इस स्थान के सुन्दरीकरण का भी काम शुरू किया गया था लेकिन किन्ही कारणों से काम बीच में ही रुक गया। अब स्थिति यह है कि बारादरी को लोगों ने मयखाना बना दिया है। यहाँ शराब की बोतलें, पन्नियां और गंदगी बिखरी नजर आती है। जिससे अब सामान्य इंसान वहां जाने से हिचकते हैं। बारादरी की इमारत जर्जर होने लगी है, हालांकि पूर्व में तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष ने गंदगी से पटे शुक्ल तालाब की सफाई कराई थी लेकिन आज बारादरी की कोई इसकी सुध लेने वाला नहीं है। स्थानीय निवासी वीरेंद्र तिवारी कहते हैं कि इस स्थान पर दिन में ही लोग शराब पीते नजर आते हैं। इन ऐतिहासिक धरोहर पर प्रशासन को विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही देखरेख के लिए कर्मचारियों की तैनाती की जानी चाहिए।
Updated on:
01 Sept 2018 03:50 pm
Published on:
31 Aug 2018 04:28 pm
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