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लोकसभा चुनाव की कर रहा था तैयारी, पर सीबीआई के हत्थे चढ़ा बाहुबली

टिकट के लिए भाजपा नेताओं से कर चुका था दावेदारी, सियासत का यह महारथी

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टिकट के लिए भाजपा नेताओं से कर चुका था दावेदारी, सियासत का यह महारथी

कानपुर। कांग्रेस से राजनीति की शुरूआत करने वाले दुष्कर्म आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की यूपी की राजनीति में अव्छी पकड़ थी। बसपा के टिकट पर विधायक चुने जाने के बाद उन्नाव से लेकर कानपुर में इनकी सल्तन चलने लगी। बसपा की सरकार जाने का अंदेशा होते ही शातिर कुलदीप ने तत्काल हाथी का साथ छोड़ साइकिल में सवार हो गया। 2017 के विधानसभा में मोदी लहर को भाप कुलदीप ने भाजपा में शामिल हो गया और कमल के सिंबल पर वह बांगरमऊ से विधायक चुना गया। लेकिन वह अब विधानसभा के बजाए लोकसभा में जाने के लिए अपनी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी। इसके लिए कुलदीप ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अपने करीबियों से संपर्क साधा और उसे टिकट देने का आश्वास भी मिल गया। पर गैंगरेप के एक मामले में बाहुबली विधायक सीबीआई के हत्थे लग गया और संसद बनने का उसका सपना चकानाचूर हो गया।
सियासत की हवा देख बदल लेता है पार्टी
यूपी की सियासत में दो राजनेताओं को मानसून वैज्ञानिक के नाम से पुकारा जाता है। पहला नरेश अग्रवाल तो दूसरा कुलदीप सिंह सेंगर। सियासत की हवा देख दोनों नेता तत्काल दल बदल कर सत्ताधारी पार्टी के साथ खड़े नजर आते हैं। कुलदीप सेंगर भी 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की साइकिल से उतर कर कमल का दामन थाम लिया। मोदी लहर के चलते वह चौथी बार विधायक बन गया। लेकिन गैंगरेप के एक मामले पर उसकी 23 साल की हुकूमत को हिलाकर रख दिया। छोटा भाई सलाखों के पीछे पहुंचा तो विधायक भी कानून के पंजे में जकड़ लिया गया। वहीं तीसरे नंबर का भाई मनोज के बारे में मांखी के लोगों को कुछ पता नहीं। एक बुजुर्ग बताते हैं कि उसका कारोबार दिल्ली से लेकर नेपाल तक फैला है। नेपाल की राजधानी में मनोज के होटल भी हैं। गैंगरेप के मामले में अतुल सिंह के जेल जाने के वक्त तो मनोज सिंह को लोगों ने मांखी गांव में देखा गया था। इसके बाद वह कहां चला गया, किसी को कुछ पता नहीं।
महाराज से चल रही थी टकरार
लोकसभा में टिकट की दावेदारी कर विधायक कुलदीप सेंगर सांसद साक्षी महाराज से टकराव मोल ले लिया। कुछ दिन पहले एक जनसभा में सांसद महाराज और कुलदीप सेंगर एक जगह बैठे थे। तभी कुलदीप ने बाबा की चुटकी ली। बाबा ने भी विधायक को जवाब देते हुए कहा था कि मैं तुम्हारा बा-बा-बा हूं। कहकर वहां से चले गए थे। उन्नाव के लोगों की मानें तो कुलदीप सेंगर को भाजपा के एक बड़े नेता से टिकट का पूरा आश्वासन दे दिया था और इसी के चलते वह चुनावी जमीन तैयार करने में जुट गया था। इतना ही नहीं, लोगों का यहां तक कहना है कि भाजपा के एक संगठन में बैठे नेता ने कुलदीप को मंत्री पद दिलवाने का भी वादा किया था। बतादें यूपी सरकार संभवता 15 अप्रेल के बाद किसी भी मंत्रीमंडल का विस्तार कर सकती है। विधायक को उम्मीद थी कि मंत्री बनने के बाद सांसद से पद बड़ा हो जाएगा और उसे लोकसभा का टिकट मिल जाएगा।
यह रहा सियासी सफर
गांव की राजनीति (ग्राम पंचायत) से राजनीति के गुर सीखने वाले कुलदीप सिंह सेंगर ग्राम प्रधान भी रहे हैं। इसके बाद युवक कांग्रेस से राजनीति में कदम रखा और वर्ष 2002 में उन्होंने बसपा से उन्नाव सदर सीट से पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और विधायक चुने गए। 2007 में उन्होने सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक चने गए। इसके बाद 2012 में भगवंतनगर से विधायक निर्वाचित हुई। 2016 में सपा में रहते हुए पार्टी से बगावत कर जिला पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी संगीता सेंगर को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ाया और वह विजयी हुईं। इसके कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव से पहले कुलदीप सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बांगरमऊ से प्रत्याशी बनाया और वह लगातार चौथीबार विधायक बने।
सरकारी जमीनों पर किए जब्जे
विधायक का भाई अतुल सिंह प्रार्पटी का काम करता है। सपा सरकार के दौरान अतुल सिंह ने उन्नाव के साथ ही कानपुर के गंगाघाट के आसपास की जमीनों पर जबरन कब्जा किया। मांखी निवासी रजत सिंह बताते हैं कि युवक की हत्या के आरोप में जेल गए विधायक के भाई अतुल उर्फ जयदीप सिंह का खेती और गांव में बनाया गया इंटर कालेज ही आय का मुख्य श्रोत है। वह कालेज का प्रबंधक हैं। पत्नी अर्चना सेंगर गांव की प्रधान हैं। रजत के मुताबिक जिस जमीन पर इंटर कालेज बनाया है वह भी ग्राम समाज की है। 1990 में यहां राजकीय निर्माण निगम ने 16 दुकानों का निर्माण कराया था। यहां कुछ लोगों के आवास भी थे लेकिन बाद में उन्हें तोड़कर यहां स्कूल की बिल्डिंग बनाई गई है। उस वक्त लोगों ने इसका विरोध किया था तो अतुल सिंह ने बाहुबल के दम पर उनका मंह बंद करा दिया था। कॉलेज की पूरी जमीन ग्राम समाज के लिए है, जिसे गरीबों को पट्टे के तौर पर मिलनी चाहिए थी, लेकिन विधायक के रसूख के आगे जमीन पर एक बड़ी इमारत खड़ी हो गई है।
पुलिस पर सीबीआई की कसा शिकंजा
माखी कांड में सीबीआई का घेरा पुलिस के बड़े अधिकारियों पर भी कसता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक घटना के वक्त जिले में तैनात रहीं एसपी नेहा पांडेय के साथ वर्तमान एसपी पुष्पांजलि से सीबीआई पूछताछ करेगी। निलंबित सफीपुर सीओ कुंवर बहादुर सिंह के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हो सकती है। दुष्कर्म पीड़िता के मरणासन्न पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और जेल भेजने वाले हल्का इंचार्ज केपी सिंह को गिरफ्तार किए जाने की सूचना है। सीबीआई टीम द्वारा निलंबित माखी एसओ अशोक भदौरिया के साथ चार सिपाहियों को हिरासत में लिये जाने की जानकारी मिल रही है। थाने में ही पांचों से चल रही है पूछताछ। एसओ, हल्का दारोगा और चारों सिपाहियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
पीड़िता के चाचा ने कहा खत्म हुआ डर
विधायक की गिरफ्तारी के बाद दुष्कर्म पीड़िता के चाचा ने सीबीआई पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि वह पिछले छह महीने से सीबीआई जांच की ही मांग कर रहे थे। पुलिस और प्रदेश की सरकार विधायक को बचाने में लगी थी। सीबीआई को जांच मिलते ही विधायक की गिरफ्तारी हो गई इससे यकीन बढ़ा है कि परिवार को न्याय मिलेगा। उन्होंने मीडिया और विपक्षी दलों का धन्यवाद दिया कि उन्होंने एक आम आदमी को इंसाफ दिलाने में सहयोग किया। विधायक की गिरफ्तारी होने के बाद पीड़िता के चाचा को यकीन है कि अब बाहुबली का माफिया राज खत्म होगा। उनके मुताबिक उनका साम्राज्य डर पर चल रहा था। सीबीआई की कार्रवाई के बाद लोगों में से उनका डर खत्म होगा तो उनका माफिया राज भी खत्म हो जाएगा। अब जेल ही विधायक का घर होगा।