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सीएम योगी के इस अस्पताल में चलता मेन्यू कार्ड, मर्ज के हिसाब से मरीज से वसूली जाती है रकम

कानपुर के दूसरे सबसे बड़े उर्सला अस्पताल में मरीजों से जारी है उगाही, विरोध करने पर आईसीयू से करवा देते हैं डॉम्टर्स बाहर

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money taken for treatment in Ursala government hospital in Kanpur

सीएम योगी के इस अस्पताल में चलता मेन्यू कार्ड, मर्ज के हिसाब से मरीज से वसूली जाती है रकम

कानपुर। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी की सत्ता संभालने के बाद, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अपराध पर लगाम कसने का वादा जनता से किया था। लेकिन योगी सरकार ने अपना एक साल का कार्यकाल पूरा कर लिया, पर इनत माम बीमारियों का खात्मा नहीं कर सके। स्कूल संचालक मनमानी फीस की वूसली कर रहे हैं तो सरकारी अस्पताल के डॉक्टर मरीजों के इलाज के नाम पर मनामाने पैसे की डिमांड करते हैं। नहीं देने पर उन्हें जबरन अस्पताल से बाहर करवा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कानपुर के जिला अस्पताल उर्सला में सामने आया। यहां आईसीयू के इंचार्ज डॉक्टर शैलेन्द्र तिवारी पर मरीज के परिजनों से घूस मांगने का संगीन आरोप लगा। बर्रा के रहने वाला संजय पांडे अपनी बूढ़ी 62 वर्षीय मां का इलाज करवाने के लिए अस्पताल लेकर आया। पीड़ित के मुताबिक डॉक्टर ने उसके सामने इलाज के नाम पर खर्चे के नाम पर पूरा मेन्यू कार्ड रख दिया गया, जिसमे जिस तरह का इलाज उसका वैसा की कीमत दर्ज थी। पीड़ित ने इसका विरोध किया तो उसे अस्पताल से बाहर फिंकवा दिया गया। मजबूरी में उसे सरकारी अस्पताल में प्राईवेट की तरह पैसा देना पड़ा।
इलाज के नाम पर मांगा गया पैसा
बर्रा निवासी संजय पांडेय अपनी मां का इलाज करवाने के लिए उर्सला अस्पताल लेकर आए। मां की हालत गंभीर होने पर उन्हें आईसीयू में भेज दिया गया। यहां तैनात डॉक्टर शैलेंद्र तिवारी ने मरीज के बेटे को बुलाया और आईसीयू के खर्चे का मेन्यू कार्ड पकड़ा दिया। जितना जटित रोग उतने ही ज्यादा पैसे के रेट उसमें दर्ज थे। मरीज के बेटे ने बताया कि डॉक्टर शैलेंद्र तिवारी ने कहा कि पहले पैसे ही व्यवस्था कर लो, फिर हम तुम्हारी का इलाज करेंगे। पीड़ित के मुताबिक तब मैंने विरोध किया तो डॉक्टर शैलेंद्र और उनके स्टॉफ के कर्मचारी मारपीट कर उतारू हो गए और जबरन मां को बाहर करने लगे। मां ही हालत देख मैंने डॉक्टर तिवारी के पैर पकड़ लिए और घर से पैसे मंगवा कर दिए। तब उन्होंने मां का इलाज शुरू किया।
हमें भी ऊपर तक देना होता है पैसा
संजय पांडेय ने बताया कि डॉक्टर तिवारी ने हमसे कहा कि मरीजों से पैसे लेकर हमें ऊपर तक पहुंचाने पड़ते हैं। सिस्टम का खेल है और शिकायत भी करोगे तो कोई सुनवाई नहीं होगी। संजस पांडेय ने बताया कि एक कर्मचारी ने कहा कि अखिलेश सरकार में एक रूपए में काम होता था पर अब रकम बड़कर दस रूपए हो गई है। वहीं एक अन्य मरीज के परिजन ने बताया कि डॉक्टर्स सारी दवाईयां मेडिकल स्टोर से मंगवाते हैं। साथ ही मरीजों को अपने-अपने प्राईवेट क्लीनिक में इलाज के लिए बुलवाते हैं। मरीज के परिजन ने कहा कि पिछली सरकार के बजाए योगी के राज में ज्यादा करप्शन बढ़ गया है। मरीज ने बताया कि अस्पताल की डायलेसिस मशीन खराब पड़ी है, लेकिन उसे ठीक नहीं कराया गया।
अफसरों के चलते फल-फूल रहा करप्शन
वहीं इस मामले पर सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने बताया कि एक सप्ताह पहले हम उर्सला अस्पताल जाकर मरीजों से उगाही की शिकायत निदेशक से दर्ज कराई थी। उन्होंने कार्रवाई की आश्वासन देकर टरका दिया। विधायक ने कहा कि कानपुर की प्रभार डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौया के पास है। सीएम योगी आदित्यनाथ खुद माह में दो य तीन बार कानपुर आते हैं। विकास को लेकर बैंठक करते हैं। बावजूद शहर बेहाल है। भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने भी माना की अधिकारियों के चलते सरकार छवि धूमिल हो रही है। नगर निगम में करोड़ों का घोटाला हुआ। सरकारी अस्पताल बेलगाम है। भाजपा ने पूरे मामले की शिकायत सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंचर दी है। हमारी मांग है कि सरकारी बाबुओं के बजाए जिम्मेदार अधिकारियों पर अब कार्रवाई का वक्त आ गया है।
निदेशक ने गैर जिम्मेदारा बयान दिया
जब इस पूरे मामले पर हमने अस्पताल के निदेशक उमाकान्त से बात की तो उनको इस बात की कोई जानकारी ही नहीं थी । वह कुछ भी बोलने को तैयार ही नहीं थे और गोल-मोल बातें कर अपना पल्ला झाड़ लिया। निदेशक उमाकान्त ने इतना जरूर कहा कि ऐसे मामलों की शिकायत मिलने पर जांच कराई जाती है जो झूठ निकलती है। निदेशक के बयान पर सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा। पर पीएम और सीएम योगी के राज में तो इसके उल्टा ही हो रहा है। अफसर तो जमकर पैसे खा रहे हैं पर वह ऊपर तक किसे दे रहे हैं इसका जवाब तो सीएम योगी को देना चाहिए।