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कानपुर ट्रेन हादसा: दर्द से गुजरी रात, खोजी कुत्ते तलाशते रहे लाश!

चंद मिनट में ट्रेन के अंदर चीख-पुकार मच गई, जब हम सब गांव के बाहर आए तो नजारा देखकर रुह कांप गई...

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Nitin Srivastva

Nov 22, 2016

train accident edited

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विनोद निगम
कानपुर. काश झांसी में मुसाफिरों के साथ ट्रेन चालक की बात रेलवे प्रशासन मान जाता तो 147 से ज्यादा लोगों को जान नहीं गवानी पड़ती। यात्री ट्रेन में खा-पीकर सो रहे थे, तभी एकाएक बोगियों ने हिचकोले लेना शुरु कर दिया और चंद मिनट में ट्रेन के अंदर चीख-पुकार मच गई। दलिल गांव निवासी रमजानी ने बताया कि पहले हमें लगा कि गांव में डकैतों ने धावा बोला है, लेकिन जब हम सब गांव के बाहर आए तो नजारा देखकर रुह कांप गई। ट्रेन से चीख, सिसकियों और दर्द से कराह रहे मुसाफिरों की आवाज आ रही थी। हमने कई यात्रियों को बाहर निकालने के बाद बैलगाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद इतना समय बीत जाने के बाद भी घटनास्थल पर सिसकियों का सिलसिला जारी था। पुलिस के खोजी कुत्ते बोगियों में फंसी लाशें तलाश रहे थे। जिला प्रशासन ने अब तक 147 से ज्यादा यात्रियों के मरने की बात कही है। वहीं घायलों की संख्या 310 से भी ज्यादा हो चुकी है। घायलों के बेहतर उपचार के लिए दिल्ली और मध्य प्रदेश से आई स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम ने भी अपना काम तेज कर दिया है।



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हादसे के बाद जारी रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
रविवार तड़के 3:10 बजे इंदौर से पटना जा रही 19321 इंदौर-राजेंद्र नगर एक्सप्रेस के 14 डिब्बों के पटरी से उतरने से ये हादसा हुआ। इसे हाल के समय की सबसे भीषण रेल दुर्घटना बताया जा रहा है। हादसे की वजह से ट्रेन के एस-1 और एस-2 डिब्बे एक-दूसरे में घुस गए जिस कारण इन्हीं डिब्बों के सबसे ज्यादा मुसाफिरों की मौत हुई। इसके अलावा बी-3 और एस-4 डिब्बों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा। एस-2 में फंसे कई यात्रियाें काे जिंदा निकाला गया, लेकिन एसी के बी-3 बाेगी में यात्रा कर रहे सीट नंबर-27 से 62 तक अभी तक केवल एक युवक काे ही बचाया जा सका है, जबकि उसकी हालत भी गंभीर बनी हुई है। हादसा इतना जबर्दस्त था कि गहरी नींद में सो रहे ज्यादातर मुसाफिरों ने भी डिब्बों को पटरी से उछलता हुआ महसूस किया। डिब्बों के बीच फंसे यात्रियों को निकालने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया गया। सेना, एनडीआरएफ और राज्य पुलिस की मदद से बचाव एवं राहत कार्य में लगे रेलवे कर्मचारियों ने बताया कि मरने वालों की तादाद हर घंटे बढ़ती जा रही थी। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद के मुताबिक, अब तक 147 लोगों के शवों का पता चल पाया है।

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रेल संरक्षा आयुक्त ने शुरू कर दी हादसे की जांच
इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे की जांच कोलकाता पूर्वी सर्किल के मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त पीके आचार्या ने शुरू कर
दी है। वह कानपुर सेंट्रल स्टेशन के उप मुख्य यातायात प्रबंधक (डिप्टी सीटीएम) के कक्ष में बैठकर जांच करेंगे। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ विजय कुमार ने बताया कि जिन यात्रियों या आम लोगों को इस घटना के बारे में कोई जानकारी हो या साक्ष्य हों, वह तुरंत आकर संपर्क कर सकते हैं। लोगों की मदद से हादसे की सही जानकारी का पता लगाने में रेलवे को आसानी होगी।

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