
Sushma Swaraj ‘सुषमा दीदी’ की सीख सास की बनो बहू को याद कर रो पड़ी नीलिमा
कानपुर। पूर्व विदेशमंत्री व बीजपी की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज Sushma Swaraj dies का 67 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। इसकी जानकारी जैसे ही कानपुर पहुंची तो पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। जम्मू-कश्मीर Jammu and Kashmir से धारा 370 हटाने Section 370 removal को लेकर चल रहा जश्न दुख में बदल गया। भाजपा के बड़े नेता यहां से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। कल्याणपुर से भाजपा विधायक नीलिमा कटियार BJP MLA Neelima Katiyar अपनी सुषमा दीदी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष धमेंद्र प्रधान Dhamendra Pradhan के बुलावे पर 2004 को हम दिल्ली गई थीं। जहां पर सुषमा दीदी ने कहा था कि राजनीति के साथ-साथ परिवार को लेकर चलो और सास की अच्छी बहू बनो।
6 माह तक राजनीति से रहीं दूर
विधायक नीलिमा कटियार बताती हैं कि सुषमा दीदी की 15 साल पुरानी बात आज भी हमारे दिल में हैं। नीलिमा ने बताया कि बैठक के दौरान जहां दीदी ने पार्टी की जीत के लिए मंत्र दिया तो वहीं उन्होंने ये भी कहा था कि परिवार के साथ नाता मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने उस वक्त बताया था कि वह खुद अपनी बेटी के लिए टिफिन बनाना नहीं भूलती थीं। सुषमा स्वराज ने बताया था कि उनकी सास की तबियत खराब होने पर 6 माह तक वह राजनीति से दूर रहीं। दवा के साथ उनका सेवा की।
भेजा था चीन
भाजपा प्रदेश महामंत्री सलिल विश्नाई बताते हैं कि, 2014 को एक दल चीन के लिए रवाना हुआ। इसमें वह भी थे। तत्कालीन विदेश मंत्री होने के नाते उन्होंने हमें अपने निवास पर बुलाया और एक संदेश देकर रवाना किया था। कहते हैं बिल्लारी लोकसभा चुनाव के दौरान कानपुर से एक टोली उनके बुलावे पर गई थी। वो एक-एक सदस्य के नाम मरते दम तक नहीं भूलीं। सलित विश्नोई बनाते हैं सुषमा स्वराज 2009 लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए कानपुर आई थीं। वह हरजेंदनगर स्थित मैदान में यूपी सरकार के मंत्री सतीश महाना के लिए वोट मांगा था।
अधूरी रह गई चाहत
विश्नोई बताते हैं 15 जून को वह दिल्ली पार्टी के काम के चलते गए थे। जब सुषमा दीदी से मिलने के लिए उनके घर गए। उस क्षण को याद करते विश्नोई दुखी मन से बोले दीदी ने कहा था कि वह जल्द ही कानपुर आएंगी। मां गंगा में स्नान कर आन्देश्वर बाबा के दर्शन करेंगी। लेकिन वादा पूरा किए बिना ही हमेशा के लिए छोड़कर चली गई। मंत्री महाना ने बताया कि जब भी सुषमा स्वराज कानपुर आई, तो वह समय निकाल कर हमारे घर आती और साथ में बैठकर भोजन करती थीं। उन्होंने शहर आने की इच्छा जताई थी। लेकिन वादा पूरा किए बिना ही हमेशा के लिए छोड़कर चली गई।
वकालत के बाद राजनीति में इंट्री
सुषमा स्वराज का जन्म हरियाणा के अंबाला कैंट में 14 फरवरी 1952 को हुआ था। उनके पिता हरदेव शर्मा, आरएसएस के प्रमुख सदस्यों में से थे। सुषमा स्वराज ने अंबाला छावनी के एसएसडी कॉलेज से बीए की पढ़ाई करने के बाद, चडीगढ़ से कानून की डिग्री हासिल की। सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल भी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ और बेहद प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं में शामिल हैं। सुषमा स्वराज ने वकालत के दौरान राजनीति में प्रवेश किया और कई पदों पर रहीं। दिल्ली की पहली सीएम बनीं तो अटल विहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहीं। इनकी केवल एक बेटी है, जिनका नाम बांसुरी कौशल है। वह भी अपने पिता की तरह दिल्ली हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक मामलों की जानी-मानी वकील हैं।
27 साल की उम्र में बनी मंत्री
सुषमा स्वराज के राजनीतिक जीवन की शुरूआत भाजपा की ही छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई थी। 1977 में उन्हें मात्र 25 वर्ष की आयु में हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। महज 27 वर्ष की उम्र में वह हरियाणा में भाजपा की प्रमुख बन गईं थीं। सुषमा स्वराज 1990 में पहली बार राज्यसभा के लिए चुनीं गईं थीं। 1996 में वह पहली बार 11वीं लोकसभा के लिए चुनीं गईं थीं। अटल बिहारी की 13 दिन की सरकार में उन्हें केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गईं थीं। 12वीं लोकसभा के लिए दक्षिणी दिल्ली चुने जाने पर वह एकबार फिर केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री बनीं। 1998 में उन्होंने केंद्रीय मंत्रीमंडल से इस्तीफा दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
सोनिया गांघी के खिलाफ लड़ा था चुनाव
सुषमा स्वराज तीन बार विधायक और छह बार सांसद रह चुकी हैं। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। इसके अलावा वह कई बार केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। सुषमा स्वराज ने वर्ष 1999 में उन्होंने आम चुनावों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2000 में वह एक बार फिर राज्यसभा पहुंचीं। उन्हें एक बार फिर सूचना प्रसारण मंत्री बनाया गया। मई 2004 तक वह सरकार में रहीं। वर्ष 2009 में भी वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुनी गईं और राज्यसभा में प्रतिपक्ष की उपनेता बनीं।
Published on:
07 Aug 2019 12:32 pm
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