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मुलायम के राम-लखन ने भरी हुंकार, पीएम मोदी के विजयी पर लगाएंगे ब्रेक

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले यूपी के यादव परिवार में चली आ रही रार थम गई है...

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Mulayam Singh Yadav Family dispute resolved before Lok Sabha Election

मुलायम के राम-लखन ने भरी हुंकार, पीएम मोदी के विजयी पर लगाएंगे ब्रेक

कानपुर. लोकसभा चुनाव 2019 से पहले यूपी के यादव परिवार में चली आ रही रार थम गई है, जिसके चलते बीजेपी के जमीन खिसकती हुई दिख रही है। इटावा स्थित एक होटल में अपने बड़े भाई प्रोफेसर रामगोपाल के जन्मदिन पर शिवपाल खुद आकर केक काटा और पैर छूकर उन्हें गले लगाया। इसी के बाद शिवपाल और प्रोफेसर ने मोदी सरकार पर जमकर जुबानी हमला बोला। शिवपाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी पीएम मोदी के विजयी रथ को कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है तो वहीं रामगोपाल ने भी कहा कुछ माह के बाद दिल्ली की सत्ता बदल जाएगी और चार साल से लगा आ रहा आपातकाल से जनता का मुक्ति मिलेगी। वहीं पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के दिग्गज नेताओं की नजर है और यादवलैंड व बुंदेलखंड किलों को बचाने के लिए रणनीति बनने लगी है। इटावा की जिम्मेदारी परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह संभाल रहे हैं तो कन्नौज की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को सौंपी गई है।

मुलायम के छोटे भाई हैं शिवपाल

शिवपाल सिंह यादव जन्मः 6 अप्रैल 1955, बसंत पंचमी के दिन हुआ था। इनके पिता सुधर सिंह निवासी सैफई, इटावा किसान था जबकि मां मूर्ति देवी गृहणी। शिवपाल समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई हैं। मार्च 2017 में सम्पन्न हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में वे इटावा जिले के जसवन्तनगर विधान सभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गये। शिवपाल सिंह यादव ने गांव की प्राथमिक पाठशाला से पूर्व माध्यमिक शिक्षा उत्तम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके पश्चात् हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट की शिक्षा के लिए जैन इण्टर कॉलेज, करहल, मैनपुरी में प्रवेश लिया। शिवपाल सिंह यादव ने स्नातक की पढ़ाई सन् 1976 में केकेडिग्री कालेज इटावा (कानपुर विश्वविद्यालय) और सन 1977 में लखनऊ विश्वविद्यालय से बीपीएड शिक्षा प्राप्त की। परिवारः शिवपाल सिंह यादव का विवाह 23 मई-1981 को हुआ। इनकी पत्नी का नाम सरला यादव है। शिवपाल सिंह यादव की एक पुत्री डॉक्टर अनुभा यादव व पुत्र आदित्य यादव है। शिवपाल मई 2009 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे फिर उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल की भूमिका दी गई।

मुलायम के चचेरे भाई हैं रामगोपाल

समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक रामगोपाल यादव का जन्म 29 जून 1946 को सैफई में हुआ था। प्रोफेसर रामगापाल यादव मुलायम सिंह के चचेरे भाई हैं और उनकी भूमिका पार्टी में चाणक्य के तौर पर गिनी जाती है। प्रोफेसर रामगोपाल ने भौतिकी और रानजीतिक विज्ञान दोनों ही विषयों में स्तानकोत्तर की डिग्री हासिल की और इसके बाद उन्होंने आगरा से पीएचडी की। 1969 से 1974 तक यादव ईटावाह के स्नातकोत्तर महाविद्यालय में व्याख्याता रहे, इसके बाद 1974 से 1994 तक ईटावाह के ही चौधरी चरण डिग्री कॉलेज के प्रधानाध्यापक रहे। 1992 में पहली बार वह राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित हुए तथा विज्ञान और तकनीकी एवं पर्यावरण एवं वन समिति के सदस्य रहे। इसके बाद 1998 के राज्यसभा चुनाव में वे दोबारा निर्वाचित हुए। 2004 के लोकसभा चुनाव में भी वे संबल क्षेत्र से निर्वाचित हुए। इसके बाद 2008 की राज्यसभा के चुनाव में जीतने के पश्चात् वे मानव संसाधन विकास समिति, राजभाषा समिति, विज्ञान और तकनीकी समिति, ग्रामीण विकास समिति, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस समिति के सदस्य रहे।

यादव परिवार में रार की वजह

मुलायम सिंह ने पिछले चार दशक तक अपने दो भाईयों के बल पर यूपी के साथ दिल्ली की सत्ता में राज किया। यूपी की राजनीति मुलायम के इर्द-गिर्द घूमती थी। लेकिन 2016 के वक्त यादव परिवार दो धड़ो में बंट गया। प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने सटीक चाल से टीपू को अपनी तरफ कर सुल्तान को चित कर साइकिल पर कब्जा कर लिया। सपा से जुड़े लोगों का मानना है कि शिवपाल और रामगोपाल के बीच पार्टी में कद को लेकर अक्सर मतभेद रहे। पर मुलायम सिंह के चलते दोनों भाईयों की नहीं चली। प्रोफेसर रामगोपाल ने 2012 विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद भतीजे अखिलेश यादव को यूपी की कुर्सी देने के लिए आवाज लगा दी और शिवपाल के हाथ में आते-आते सत्ता फिसल गई। मुलायम के कहने पर अखिलेश को सीएम बनाया गया और यहीं से शिवपाल और प्रोफेसर कर डगर अगल-अलग हो गई। 2017 विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश ने शिवपाल के बजाए खुद उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने का फैसला कर शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से हटा नरेश उत्तम को बैठा दिया।

शिवपाल और रामगोपाल हुए एक

समाजवादी पार्टी में कभी एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चाबंदी करने वाले पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव और उनके भाई शिवपाल सिंह यादव के बीच अब दूरियां खत्म हो गई है। इटावा में मनाए गए जन्मदिन के मौके पर रामगोपाल ने अपने पास खड़े शिवपाल का हाथ थामकर केक काटा और दोनों ने एक-दूसरे को केक भी खिलाया। खास बात यह थी कि रामगोपाल के पहुंचने पर शिवपाल ने उनके पैर छुए और माल्यार्पण कर गले मिलकर उनका भव्य स्वागत किया। दोनों नेता एक साथ मंच पर पहुंचे और साथ बैठे। जन्मदिन का केक काटने का वक्त आया तो रामगोपाल ने शिवपाल का हाथ थामकर एक साथ केक काटा और एक-दूसरे को खिलाया। हालांकि इस दौरान दोनों ने मीडिया से बराबर दूरी बनाए रखी। रामगोपाल शिकोहाबाद कस्बे में पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के कार्यक्रम में शिरकत के लिए रवाना हुए तो शिवपाल उन्हें बाहर तक छोड़ने आए।

2019 में रोकेंगे पीएम का विजयी रथ

शिवपाल ने इस मौके पर कहा कि पार्टी और यादव परिवार में कोई झगड़ा नहीं है और न ही कभी था। इस मौके पर शिवपाल सिंह यादव ने केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज हालात इतने खराब हो चुके हैं कि जिलों में सत्ताधारी दल के विधायकों की भी नहीं सुनी जा रही है। विधायक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। योगी पर निशाना साधते हुए बोले कि सत्ता में आते ही कुछ लोगों में अहंकार पैदा हो जाता है। शिवपाल सिंह यादव ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ संघर्ष करने की भी बात कही। शिवपाल ने कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो या फिर उत्तर प्रदेश की सरकार दोनों सरकारें विकास करने का दावा लगातार करने में जुटी हुई है, लेकिन हकीकत में कहीं पर भी विकास की एक भी किरण नजर आती हुई नहीं दिखाई दे रही है। 2019 में समाजवादी लोग मोदी सरकार को सत्ता से दूर कर के दम लेंगे।