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नदिया के पार की ‘गुंजा’ का गांव होगा गुलजार, अमेरिका के सहयोग से बदलेगी तस्वीर

साधना सिंह यानि 'गुंजा' कानपुर के एक छोटे से गांव नोनहा नरसिंघ की रहने वाली हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बदहाल गांव की तस्वीर बदलने का मन बनाया है।

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Nitin Srivastva

Jul 10, 2017

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कानपुर. 38 साल पहले सिनेमा के रुपहले पर्दे पर आयी फिल्म नदिया के पार तो आपको याद होगी। नदिया के पार फिल्म का हर किरदार वैसे तो शानदार था लेकिन इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाली साधना सिंह यानि 'गुंजा' कानपुर के एक छोटे से गांव नोनहा नरसिंघ की रहने वाली हैं। इस फिल्म ने रूपहले पर्दे पर कई रिकार्ड बनाए। अभिनेत्री साधना को सुपरस्टार का तमगा मिला। लेकिन आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सड़क, स्कूल, अस्पताल और स्वास्थ्य के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। नदिया के पार की स्टार ने भी गांव की सुधि नहीं ली। पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बदहाल गांव की तस्वीर बदलने का मन बनाया है और यहां पर अमेरिका के सहयोग और आईआईटी कानपुर की मदद से सोलर एनर्जी की महत्वकांक्षी माइक्रो स्मार्ट ग्रिड योजना का प्लांट लगाया जाएगा।

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पीएम और ओबामा के बीच हुआ था समझौता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानपुर में एक माइक्रो स्मार्ट ग्रिड लगाए जाने की बात कही थी। इसी के बाद पीएम और अमेरिका के उस समय के राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच सौर्य ऊर्जा की माइक्रो स्मार्ट ग्रिड योजना के तहत एक समझौता हुआ था। जिसकी शुरूआत कानपुर के चौबेपुर कस्बे के दो गांवों में होने जा रही है। सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए भारत और अमेरिका के 30 शिक्षण संसथान मिलकर इस प्रोजेक्ट को तैयार करेंगे। इस प्रोजेक्ट को लीड करने की जिम्मेदारी कानपुर आईआईटी को दी गई है। 2017 अक्टूबर माह से इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हो जाएगी। इसके शुरू होने से इन दो गांवों के अलावा आसपास के अन्य गांवों में लोगों को बिजली की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।



विकास की जगी उम्मीद

नदिया के पार फिल्म की हीरोइन गुंजा के गांव वाले फिल्म के सुपर डुपर हिट होने के बाद आस लगाए थे कि फिल्म की तरह ही उनके गांव का भी नाम हो लेकिन उस समय ये संभव न हो पाने से निराशा की चादर ओढ़ रखे ग्रामीणों के चेहरों पर केन्द्र की मोदी सरकार ने इस प्रोजेक्ट के माध्यम से मुस्कराहट भर दी। सालों के इंतजार के बाद गुंजा के गांव वालों को अब इस प्रोजेक्ट के माध्यम से विकसित जीवन जीने की उम्मीद दिखने लगी है। गांव के परशुराम कहते हैं कि गुंजा तो मुम्बई चली गईं और वहीं बस गईं। हम लोगों ने उसे पत्र के जरिए बीमार गांव के इलाज कराने की गुहार लगाई, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। परशुराम कहते हैं कि सूबे में कई सरकार बदली, निजाम बदले। लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो सूबे के गांवों की तस्वीरें। प्रधानमंत्री मोदी की सोलर एनर्जी की महत्वकांक्षी माइक्रो स्मार्ट ग्रिड योजना इनके गांव में आने से ग्रामीणों में इलाके का विकास होने की उम्मीद जगी है।



आईआईटी कानपुर कर रहा लीड

इस पूरे प्रोजेक्ट को आईआईटी कानपुर लीड कर रहा है और इसके प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर सतीश चन्द्र श्रीवास्तव और सेकेण्ड लीड प्रोफेसर शान्तनु मिश्रा कर रहे हैं। सतीश श्रीवास्तव ने बताया कि माइक्रो स्मार्ट ग्रिड में विद्युत विभाग के सब स्टेशनों की तरह सोलर एनर्जी और बायोमास के सब स्टेशन या पॉवर ग्रिड बनाने की सरकार की योजना है। इससे सभी लोग नॉन रिन्युवल एनर्जी के बजाए सोलर एनर्जी का ज्यादा उपयोग कर पाएंगे। प्रोफेसर के मुताबिक, रिसर्च के दौरान सोलर एनर्जी तैयार कर उसे घर-घर आसानी से पहुंचाया जाएगा और इसमें ये देखा जाएगा कि एक ग्रिड से सोलर एनर्जी सप्लाई करने में कैसी दिक्कतें आती है। क्योंकि वर्तमान में जो बिजली सप्लाई हो रही है वो एसी करेन्ट है और इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हम डीसी करेन्ट की सप्लाई करेंगे। वो बहुत समय पहले व्यवस्था थी, जो भी दिक्कतें सामने आएंगी उनको दूर किया जाएगा। इसके अलावा अन्य रिन्युवल एनर्जी का प्रयोग करके भी बिजली बनाई जाएगी। सोलर एनर्जी को स्टोरेज करने के लिए भी विशेष तकनीकि अपनाई जाएगी।


अमेरिका की वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी कर रही लीड

प्रोफेसर सतीश चन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में भारत और अमेरिका के 15-15 शिक्षण संस्थानों को शामिल किया गया है। भारत की तरफ से इस प्रोजेक्ट को आईआईटी कानपुर और अमेरिका की तरफ से वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी इसे लीड कर रही है। भारत में इस प्रोजेक्ट पर आईआईटी कानपुर, दिल्ली, मद्रास, रुड़की और भुवनेश्वर के अलावा ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान, बीएसईएस राजधानी पॉवर लिमिटेड, उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड, एनटीपीसी एनर्जी टेक्नोलॉजी रिसर्च एलाइंस, पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशन, जीई ग्लोबल रिसर्च बंगलूरू, सिनर्जी सिस्टम एंड सॉल्यूशन, माइंडटेक बंगलूरू और पैनासोनिक इण्डिया गुड़गांव मिलकर रिसर्च करेंगे।


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