
कभी ये नेता हुआ करता था मायावती का सबसे करीबी, अब बढ़ाई बसपा की मुसीबत, सपा में भी मची खलबली
कानपुर. लोकसभा चुनाव को लेकर यूपी के सभी राजनीतिक दल अपने कलपुर्जे दुरूस्त करने के लिए जुटे है। वहीं अपने ढहे किलों को दोबारा वापस पाने के लिए कांग्रेस क्षत्रपों के बिना अकेले सड़क पर उतर चुकी है। हाथी से उतारे गए नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पंजे ने सहारा दिया और अब वो उसे संवारने के लिए बूंदेलखंड की तपती दोपहरिया में पसीना बहा रहे हैं। बिखरे संगठन को एक कर कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं। सुबह से लेकर देररात तक गांव-गांव जाकर चौपाल लगा कर पीएम मोदी और सीएम योगी सरकार की पोल खोलने के साथ ही सपा व बसपा पर भी वार कर रहे हैं। नसीमुद्दीन पिछले तीन दिन से अपने पैतृक शहर बांदा की गली, मोहल्लों और बसपा के पुराने साथियों को कांग्रेस में लाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। पूर्व मंत्री के इस कदम से भाजपा के बजाए सपा व बसपा के अंदर खलबली मची हुई है। अब दोनों दलों के नेता भी मान रहे हैं कि अगर कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं हुआ तो सिद्दीकी कानपुर-बुंदेलखंड 17 जिलों में प्रभाव डाल सकते हैं। क्योंकि यहां करीब 18 लाख दलित तो आठ लाख के आसपास मुस्लिम वोटर्स हैं। जिन पर सिद्दीकी की अच्छी पकड़ बताई जाती है।
बुंदेलखंड के पहले मुस्लिम विधायक
भारत से अंग्रेज चले गए, कई सरकारें आईं और सैकड़ों विधायक और सांसद चुने गए। इनमें सभी धर्मो के लोग रहे, लेकिन बुंदेलखंड की धरती में 1991 तक सिर्फ हिन्दू समाज के नेता ही जनप्रतिनिधि चुने गए। पर यहीं एक गांव के गरीब परिवार से ताल्लुख रखने वाले मुस्लिम समुदय के नसीमुद्दीन सिद्दीकी राजनीति में एकाएक कदम रखते हैं और पहले ही चुनाव में वह भाजपा की लहर होने के बावजूद विधायक चुने जाते हैं। नसीमुद्दीन वालीबाल के बेताब बादशाह थे। चुनाव के वक्त दावेदार टिकट के लिए इसके दर पर चौखट रगड़ते थे। जिसको चाहा उसे हाथी पर बैठाया, जिससे नहीं बनी उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। 29 साल तक नसीमुद्दीन सिद्दीकी मायावती के सेकेंड हैंड के रूप में दल में रहे। बिना चुनाव लड़े मंत्री के साथ ही अनेक ओहदों पर विराजमान रहे। इस दौरान एक मामूली चमड़ा कारोबारी ने बुंदेलखंड के साथ ही सूबे में सबसे रईस राजनेता के रूप में अपनी पहचान बना ली। लेकिन 2017 विधानसभा इलेक्शन हार के बाद इन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया।
अब पंजे के लिए तैयार कर जमीन
कांग्रेस में शामिल होने के बाद पहली बार गृह जनपद बांदा पहुंचे सिद्दीकी ने सोमवार से लेकर बुंधवार तक तक कई बैठकें की। 30 से अधिक चुनिंदा पुराने कांग्रेसी नेताओं के घर-घर जाकर दस्तक दी। शहर के पुराने और घर बैठ गए कांग्रेसी नेताओं और रूठे कार्यकर्ताओं की लिस्ट उनके पास थी। एक-एक कर प्रत्येक के घर जाकर मुलाकात की। एकजुट होकर कांग्रेस को मजबूत करने के लिए मान-मनौव्वल किया। कई रूठे नेताओं की जुबां पर गिले-शिकवे आ ही गए। सिद्दीकी ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी का वास्ता देकर कहा कि लोकसभा चुनाव तक सारे गिले-शिकवे भुला दें। कांग्रेस को मजबूत करें। सिद्दकी ने पत्रिका संवाददाता से खास बातचीत के दौरान बताया कि वा ेअब कानपुर-बुंदलेखं डमें अपने ढेरा डाल लिया है। मोदी और योगी सरकार की पोल खोलने के लिए वो खुद घर-घर जाएंगे और सुस्त पड़े कांग्रेसियों के अंदर गर्मी लाएंगे। अब यह अभियान 2019 लोकसभा मतदान तक जारी रहेगा।
बूथ तक पहुंचेंगे सिद्दीकी
सिद्दीकी ने बताया कि वह अगले चरण में गांवों में भी बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। सिद्दीकी ने बताया कि जुलाई की दो तारीख के बाद उनका काफिला कानपुर जोन में दस्तक देगा। इस दौरान यहां की 23 विधानसभा क्षेत्रों के अधिकतर बूथों तक जाएंगे और जहां बूथ प्रभारी नहीं होगा वहां युवाओं को बूथ प्रभारी बनाया जाएगा। सिद्दकी ने कहा कि बुंदेलखंड और कानपुर जोन के अधिकतर पुराने बसपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता हाथी का साथ छोड़ पंजे में शामिल हो गए हैं। कानपुर में सलीम अहमद पार्टी को मजबूती प्रदान कर रहे हैं तो बुंदेलखंड डमें दद्दू प्रसाद जल्द ही हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। चुनाव के वक्त दूसरे दलों के कई पदाधिकारी व बड़े नेता कांग्रेस में शामिल होंगे। कांग्रेस पार्टी को यूपी में फिर से खड़ा करना है और संप्रदायिक ताकतों को देश व प्रदेशों से हटाना है।
सरकार ने कुछ नहीं किया
पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि मोदी सरकार ने लोगों को लव जिहाद, तीन तलाक और गोरक्षा में उलझाकर जनता को असली मुद्दे भूला दिए। नसीमुद्दीन ने कहा कि मोदी सरकार अपनी पीठ खुद थपथपा रही है। किसानों की आय दोगुनी करने का प्रचार किया जा रहा है। एक क्विंटल गेहूं पैदा करने में किसान का 2400 रुपये खर्च आ रहा है और सरकारी केंद्रों में खरीद 1600 रुपये में की जा रही है। नसीमुद्दीन ने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत 4.36 करोड़ लोगों को देश में गैस कनेक्शन बांटे गए। इसमें 41 फीसदी लोगों को दोबारा सिलेंडर नहीं मिला, ये गरीब परिवार अपनी जेब से 700 का सिलेंडर नहीं खरीद सकते। उनके चूल्हे ठंडे पड़े हैं। नोटबंदी में भी बड़ा घोटाला हुआ। जीएसटी से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कहा कि बुंदेलखंड में भाजपा के पांच सांसद और 19 विधायक हैं, लेकिन चार साल में केंद्र की भाजपा सरकार ने बुंदेलखंड को कुछ नहीं दिया।
गठबंधन का फैसला हाईकमान करेगा
सिद्दकी ने बताया कि अगर पार्टी हाईकमान यूपी के अन्य दलों के साथ गठबंधन करता है तो हमलोग जी जान से चुनाव जीतने के लिए लगेंगे। बसपा और सपा से नहीं, बल्कि भाजपा से हमें परहेज है। बसपा में थे तब भी हम भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए लड़े। पर मायावती कुर्सी के चलते भगवा बिग्रेड से दोस्ती की। हमने रोका पर वह नहीं मानी। बावजूद यूपी की जनता ने सारी बातें भुलाकर उन्हें 2007 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता सौंपी । पर वह कुछ लोगों के जाल में फंस गई और इसका फाएदा समाजवादी पार्टी ने उठाया। 2012 से लेकर 2017 के चुनाव बसपा सुप्रीमो अपनी कमियों के चलते हारीं। कार्यकर्ताओं से दूरी इनमें से मुख्य वजह रही, लेकिन कमजोरी को दूर करने के बजाए हमें ही पार्टी से बाहर कर दिया।
Updated on:
28 Jun 2018 05:21 pm
Published on:
28 Jun 2018 09:21 am
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