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आईआईटी कानपुर जल्द सेना को सौंपेगा पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान

स्टेल्थ विमान के शुरुआती मॉडल की टेस्टिंग की ओर बढ़ रहे हैं संस्थान के वैज्ञानिक, अक्टूबर में हो सकता है आखरी ट्रायल, अभी चुनिंदा देशों के पास है ये तकनीकि।

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national invisible fighter aircraft made by iit kanpur

आईआईटी कानपुर जल्द सेना को सौंपेगा पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान

कानपुर। पिछले कुछ सालों से आईआईटी कानपुर रक्षा के क्षेत्र में मेक-इन-इंडिया के तहत आधुनिक हथियारों का आविष्कार कर सेना की ताकत में इजाफा किया है। संस्थान के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग ने रूस और अमेरिका की तरह स्टेल्थ तकनीकी युक्त विशेष विमान का डिजाइन और प्रोटोटाइप विकसित कर ली है। लड़ाकू विमान में इसे लगाने के बाद ये रडार में नहीं आएगा और अदृष्य होकर दुष्मन के ठिकानों को चंद सेकेंड में तबाह कर देगा। वैज्ञानिक अक्टूबर 2019 में आखरी परीक्षण करेंगे और परीक्षा में पास होते ही इसका निर्माण कार्य शुरू कर देंगे।

इन देशों के पास है तकनीकि
रूस, अमेरिका और फ्रांस के पास उन्नत लड़ाकू विमान (फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्रॉफ्ट, एफजीएफए) हैं। रूस ने भारत को इस तकनीकि देने की रजामंदी दी थी। पर ऐन वक्त में रूस ने समझौते से हाथ पीछे खींच लिए। इसी के बाद आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने इस पर कार्य करना शुरू कर दिया। संस्थान के वैज्ञानिकों ने स्टेल्थ तकनीकी युक्त मानव रहित विशेष लड़ाकू विमान का डिजाइन और प्रोटोटाइप लगभग तैयार कर लिया है। इसका आखरी परीक्षण इसी वर्ष अक्टूबर में किया जाएगा।

इसके चलते रडार में नहीं आएगा विमान
एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग, के प्रोफेसर एके घोष के मुताबिक स्टेल्थ विमान के मॉडल की पूरी फ्लाइट टेस्टिंग होगी। यहां विस्तारपूर्वक रिसर्च कर इसकी गति, आवाज, हवा में स्थिरता आदि का आकलन किया जाएगा। अक्टूबर में परीक्षण सफल होने पर इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा सकेंगे। मानव रहित इस विशेष विमान में एडवांस बैटल फील्ड रडार, आरएफ सेंसर, ग्राउंड रडार, सेंसर युक्त सिस्टम होगा, जो इसे दुश्मन की नजर से बचाएगा। ये लड़ाकू विमार दुश्मन के घर के अंदर सफलता पूर्वक ऑपरेशन को अंजाम देकर सकुशल वापस आने में सक्षम होगा।

ये रहा प्रोजेक्ट का नाम
संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट का नाम स्विफ्ट रखा था। इसके निर्माण के लिए पहले रूस ने रजामंदी दी थी। लेकिन 2018 में रूस के भारत के एफजीएफए प्रोजेक्ट से हट जाने के बाद इंजन को लेकर कुछ बाधा उत्पन्न हो गई। पर यहां के वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च करना जारी रखा और लगभग-लगभग रूस की तरह ही ये तकनीकि का आविष्कार कर लिया है। प्रोफेसर एके घोष के मुताबिक करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट को एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) सहयोग कर रही है। प्रोफेसर ने बताया कि आईआईटी के दूसरे प्रोफेसर सुब्रह्मणयम सडरेला इस प्रोजेक्ट में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।

आईआईटी परिसर में होगा परीक्षण
प्रोफेसर सडरेला के मुताबिक इसी साल अक्टूबर में विमान के प्रारूप का परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए आइआइटी कानपुर के एयरस्ट्रिप के आसपास आंशिक रूप से पूरी बैटल फील्ड तैयार की जाएगी। यह बिल्कुल सरहद की तरह होगी। अत्याधुनिक मशीनों की सहायता से रडार सिस्टम को लैस किया जाएगा। इसी बैटल फील्ड यानी युद्ध क्षेत्र में विमान के शुरुआती मॉडल का परीक्षण किया जाएगा। अपेक्षित गति और रडार की पकड़ से बच निकलना इस विमान की सफलता की गारंटी होगी। बताया, यह विमान बेहद हल्का और आवाज रहित होगा। मैटेरियल साइंस इंजीनियरिंग और फिजिक्स विभाग से इसमें सहयोग लिया गया है।