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मुंह में 25 फिट मोटी सांग डालकर निकल पड़े भक्त मां के द्वारे

शहरभर के मंदिर और घरों में रामनववी का त्यौहार बड़ी धूम - धाम से मनाया गया

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Ruchi Sharma

Apr 15, 2016

kanpur

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कानपुर.शहरभर के मंदिर और घरों में रामनववी का त्यौहार बड़ी धूम - धाम से मनाया गया। नौबस्ता के बलंस बिहार मोहल्ले स्थित सभी भक्त एकत्र हुए और अपनी मन्नत पूरी होने के लिए मुंह में लोहे का नुकीला सांग (भाला) डाला, साथ ही वे अपने पूरे शरीर में सूइयां भी चुभुए हुए एक टोली के रूप में निकले और बारा देवी मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं। देवी भक्त रमेश ने बताया कि, चैत के नवरात्र में जवार निकालने का महत्व है।

इसे वही लोग निकालते हैं, जिनकी मनोकामना देवी दुर्गा पूरी करती हैं या जिन्हें कोई मन्नत मांगना होता है। भक्त लोहे से सांग की पूजा करते हैं और अपने शरीर में सूइयां चुभाते हैं। इसमें नींबू, फूल या मखाना पिरोए रहता है। कई भक्त अपने जीभ में भी सुई चुभाते हैं। वे अपने पसंद के हिसाब से लोहे की सांग लेते हैं। इन सांगों की साइज एक फीट से लेकर 25 फीट तक होती है।

पुजारी मुंह के अंदर डालते हैं सांग

मोहल्ले का पुजारी एक-एक करके सांग का नुकीला हिस्सा भक्तों के मुंह के अंदर डालते हुए एक गाल में खोस देता है। गाल को छेद कर निकले हिस्से में पुजारी नींबू या फूल खोस देता है। कई तो अपने गले के चमड़े में इस सांग को खोस कर चलते हैं। एक भक्त प्रमोद ने बताया कि वह पिछले 8 साल से इस जवारे में शामिल होकर मुंह में सांग लेकर चल रहा है। उसकी एक मन्नत देवी ने पूरी की है। इसके बाद इसने 10 साल तक इस तरह से सांग मुंह में खोंसकर मंदिर तक जाने का प्रण लिया है। इसका ये 8वां साल है। कई भक्त कहते हैं कि जो अपने शरीर पर जीतनी ज्यादा सूइयां चुभोता है, उसकी मन्नतें उतनी ही जल्दी पूरी होती है।

नहीं दी जाती है कोई दवा

शहर भर में निकलने वाले इस जवारे में शामिल भक्त शहर के प्रमुख मंदिर बारादेवी, ज्वालादेवी और चंद्रिका देवी के मंदिर में अपनी यात्रा समाप्त करते हैं। लोहे के बने इस सांग और सुइयों को शरीर से निकालने के बाद भक्तों को कोई दवा नहीं दी जाती है। मंदिर में होने वाले हवन की राख भक्तों के शरीर पर मल दी जाती है। इस अंधविश्वास के आस्था में कानपुर जिला प्रशासन का भी पूरा सहयोग होता है। पूरे शहर में सुरक्षा को कड़ा कर दिया जाता है।

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