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यहां कूड़े व गोबर के ढेर के समीप प्राथमिक स्कूल के बच्चे एमडीएम खाने को मजबूर

परिषदीय स्कूलों के हालात ये हैं कि परिसर में कूडे व गोबर के ढेर लगे हैं। वहीं रसोई में मध्यान्ह भोजन पकता है, जो बच्चे खाते हैं, जो कि बीमारी को दावत दे रहे हैं।

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यहां कूड़े व गोबर के ढेर के समीप प्राथमिक स्कूल के बच्चे एमडीएम खाने को मजबूर

कानपुर देहात-स्कूल का परिसर और समीप बनी रसोई में बच्चों का भोजन पकता है। सामने पड़ा कूड़े का ढेर और गोबर का भंडार दे रहा बीमारी को दावत। ये हाल है अमरौधा ब्लाक के गौरी रज्जन के परिषदीय विद्यालय का, जहां गंदगी के बीच विद्यालय की रसोई में बच्चों के लिए मिडडे मील पक रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता हैं कि मक्खियों और कीटाणु से दूषित होता पौष्टिकता का यह निवाला बच्चों की सेहत पर क्या असर डालेगा। यहां के बच्चे रोज इसी माहौल में बना भोजन खाते हैं। अभिभावक भी यह दुर्दशा देखकर चिंतित हैं। विद्यालय में अपने बच्चे को पढ़ा रहे अभिभावकों की पीड़ा उनकी इस बात से झलकती है कि केवल एक बार अधिकारी इस रसोई के पास खाना खाकर दिखा दें तो हम मानें। यहां अधिकारी कई बार आए, लेकिन हालात को अनदेखा करके चल दिए।

स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन और स्वच्छता की अलग के बीच प्राथमिक विद्यालय गौरी रज्जन की रसोई का हाल तमाम दावों पर सवालिया निशान लगा रही है। रसोई घर के पास ही जमा गोबर स्वच्छता की पोल खोल रहे हैं। विद्यालय के चारों ओर बाउंड्रीवाल न होने के कारण गांव वालों ने भवन के सामने ही गोबर और कूड़े को एकत्र कर दिया है। रसोई घर के आसपास गोबर के उपले पाथे जाते हैं। मिडडे मील बनाते समय गोबर व गंदगी पर बैठीं मक्खियां रसोई घर में जाकर भोजन को विषाक्त कर रही हैं।

प्रधानाध्यापक कालका प्रसाद ने बताया कि विद्यालय में कुल 40 बच्चे नामांकित हैं। गांव वाले रसोई घर के पास परिसर में गोबर व कूड़ा डालते हैं जिससे मिडडे मील दूषित हो रहा है। गंदगी और गोबर पर बैठने वाली मक्खियां रसोई में खाने और खाते समय बच्चों के बर्तन पर भी बैठती हैं। इसके चलते बच्चों के बीमार होने का खतरा बना हुआ है। प्राथमिक विद्यालय गौरी रज्जन के परिसर व रसोई घर के पास गोबर व कूड़े के जमा होने की जानकारी मिली है। जो भी ऐसा कर रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके लिए पंचायतराज विभाग को पत्र लिखा जाएगा।