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नई कार्बाइन ने मचाई धूम, अब बारी है एके 103 की

खबर मिली है कि स्‍मॉल आर्म्‍स फैक्‍ट्री और डीआरडीओ की ओर से संयुक्‍त रूप से तैयार ज्‍वाइंट वेंचर प्रोटेक्‍टिव कार्बाइन (जेवीपीसी) को अर्द्ध सैनिक बलों और कई राज्‍यों की पुलिस फोर्स ने हाथों हाथ लिया है.

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Kanpur

नई कार्बाइन ने मचाई धूम, अब बारी है एके 103 की

कानपुर। खबर मिली है कि स्‍मॉल आर्म्‍स फैक्‍ट्री और डीआरडीओ की ओर से संयुक्‍त रूप से तैयार ज्‍वाइंट वेंचर प्रोटेक्‍टिव कार्बाइन (जेवीपीसी) को अर्द्ध सैनिक बलों और कई राज्‍यों की पुलिस फोर्स ने हाथों हाथ लिया है. अभी तक सीआरपीएफ परीक्षण के बाद अब इसे बीएसएफ के जवानों को दिया है. इसके अलावा छत्‍तीसगढ़ सहित एक दर्जन प्रदेशों की पुलिस भी इसे परख रही है. निशानेबाजी और एक्‍यूरेसी में अचूक जेवीपीसी को अर्धसैनिक बलों ने काफी सराहा है. देश में ही करीब एक लाख जेवीपीसी की सप्‍लाई के लिए एसएएफ की टीम तैयार है.

ऐसी मिली है जानकारी
बुधवार को वेंडर मोबाइल ऐप संपर्क की लॉन्‍चिंग के मौके पर एसएएफ के महाप्रबंधक संजय पटनायक ने बताया कि एसएएफ के सबसे बड़े ग्राहक गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले सुरक्षाबल हैं. फैक्‍ट्री में बन रही मैग गन, लाइट मशीन गन (एलएमजी) और कार्बाइन की मांग बरकरार है. इसी की अगली कड़ी है जेवीपीसी. तीस एमएम की ये गन अभी देश ही नहीं, बल्‍कि विदेश में भी कहीं नहीं है. इस वजह से इसकी मांग अर्द्ध सैनिक बलों ने की है. सीआरपीएफ में ही 20 हजार जेवीपीसी की मांग है. आरपीएफ में 32000 और सीआईएसएफ में 50 हजार गन की मांग है. एसएएफ के उप महाप्रबंधक अजय सिंह, बासू राय आदि अधिकारी मौजूद रहे.

ये है जेवीपीसी की खासियत
वर्तमान गन की तुलना में जेवीपीसी का वजन आधा यानी कितीन किलो से भी कम है. वहीं इस समय जो एलएमजी या अन्‍य गन हैं, उनका वजन छह किलो से कम नहीं है. एक्‍यूरेसी में ये 100 फीसदी अचूक है. इसे सिर्फ 30 सेकेंड में असेंबल और डिसेंबल किया जा सकता है. इसके पीछे कारण है कि ये पूरी गन चार पिनों पर निर्भर है. चार पिनों को खोलकर इसे चार हिस्‍से में खोला जा सकता है. वहीं अभी तक जो गन प्रचलन में है वो रिबिट आधारित है.