
potato rate
आलोक पाण्डेय
कानपुर. भ्रम खत्म कीजिए, डायबिटीज के लिए आलू कतई जिम्मेदार नहीं है। हकीकत यह है कि आलू में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन, खनिज और फाइबर-विटामिन होते हैं, जिससे सेहत को फायदा होता है। अलबत्ता आलू में मौजूद कार्बोहाइड्रेड के कारण मोटापा बढऩे की आशंका रहती है। मोटापे के कारण डायबिटीज रोग (diabities) संभव है। अब आलू से मोटापे का खतरा भी नहीं रहेगा। चंद्रशेखर आजाद कृषि विवि (CSA) (chandra shekhar agriculture university) के वैज्ञानिकों ने चुकंदर और आलू के जीन को मिलाकर नई किस्म को तैयार किया है। इस हाइब्रिड आलू (hybrid potato) को खाने से कोई नुकसान नहीं होगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (NSI) (national sugar institute) में तैयार चुकंदर की चीनी (beet root sugar) को मिलाकर हाइब्रिड आलू से तमाम मिठाइयां और व्यंजन बनाने का प्रयोग जारी है। उम्मीद है कि बाजार में कुछ ही महीनों में नए स्वाद उपलब्ध होंगे।
आलू से मिलेगी लंबी उम्र, शरीर होगा तंदुरुस्त
चंद्रशेखर आजाद कृषि विवि के शोधकर्ता वैज्ञानिक डॉ. राजीव बताते हैं कि 100 ग्राम आलू में 0.1 प्रतिशत से कम बसा, 18.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेड, 1.5 ग्राम फाइबर, 2.1 ग्राम प्रोटीन और 80 कैलोरी ऊर्जा होती है। ऐसे में दिन में 200 ग्राम आलू खाने से मिलने वाली कैलोरी सिर्फ दस मिनट पैदल चलने पर खत्म हो जाती है। आलू में कैल्शियम, आयरन, जिंक, पोटेशियम और फास्फोरस के साथ-साथ विटामिन बी तथा विटामिन-सी का भंडार होता है। (minerals and vitamins in potato) ऐसे में आलू खाने से लंबी उम्र के साथ-साथ शरीर को जरूरी मिनरल्स और विटामिन मिलते हैं। इसके अतिरिक्त आलू में मौजूद प्रोटीन अनाजों में मिलने वाले प्रोटीन से उच्च गुणवत्ता वाला होता है, साथ ही मांस-मछली और अंडे के प्रोटीन के बराबर होता है। कृषि विवि के नए शोध के मुताबिक, आलू के अधिक सेवन से मोटापा बढऩे की संभावना रहती है, लेकिन नए किस्म के आलू में कार्बोहाइड्रेड की मात्रा को प्रति 100 ग्राम में 18.5 ग्राम से घटाकर 6-7 ग्राम करने में सफलता मिली है।
नई किस्म में आलू का स्वाद और चुकंदर के गुण
कृषि विवि के नए शोध के मुताबिक, आलू और चुकंदर के जीन को मिलाकर नई हाइब्रिड किस्म को तैयार करने की दिशा में प्रयोग के परिणाम उत्साहजनक हैं। उम्मीद है कि छह महीने में नई किस्म के पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया जाएगा। आलू की हाइब्रिड किस्म में आलू और चुकंदर के जीनों का मिश्रण किया गया है। ऐसे में नई किस्म में फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, जिंक, पोटेशियम और फास्फोरस के साथ-साथ विटामिन बी तथा विटामिन-सी पर्याप्त मात्रा में होगा, लेकिन कार्बोहाइड्रेड और बसा की मात्रा न्यूनमत होगी। हाइब्रिड आलू के सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी भी नहीं होगी।
उधर, राष्ट्रीय शर्करा संस्थान ने चुकंदर से चीनी बनाकर नई कहानी रची है। एनएसआई के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि बेल्जियम और भारत में होने वाले चुकंदर से चीनी बनाना मुमकिन है। प्रोफेसर ने अपनी रिसर्च में बेल्जियम की दो प्रजातियों तथा भारत की एक प्रजाति को फार्म हाउस में उगाया तो प्रति हेक्टेयर 80 टन उत्पादन मिला, जबकि गन्ने का उत्पादन 74 से 75 टन प्रति हेक्टेयर होता है। यह ऐसी प्रजातियां हैं जो अधिक तापमान में भी विकसित हो सकती हैं, जबकि चुकंदर ठंडे क्षेत्रों की प्रजाति है जिसकी खेती 20 से 22 डिग्री सेल्सियस तापमान में होती है। उन्होंने बताया कि चुकंदर से गन्ने की अपेक्षा 15 से 20 फीसद अधिक शक्कर बनाना मुमकिन है। इसके अतिरिक्त चुकंदर की शक्कर को डायबिटीज के रोगी भी बेधडक़ इस्तेमाल कर सकते हैं।
अब नए व्यंजनों पर शोध की तैयारी
कृषि विवि के हाइब्रिड आलू और चुकंदर की शक्कर के जरिए नए किस्म के व्यंजनों पर प्रयोग शुरू हो गए हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, स्वस्थ शरीर के लिए नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात के भोजन में कार्बोहाइड्रेड होना चाहिए, लेकिन आलू के प्रति गलत धारणा के कारण भारत में खपत कम हुई है। भारत में प्रति व्यक्ति आलू की खपत 18.30 किलोग्राम प्रतिवर्ष है, जबकि यूक्रेन में 140 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है। विकसित देशों में 100 किलोग्राम प्रति व्यक्ति खपत है। चूंकि भारत में डायबिटीज तेजी से फैल रहा है, इसलिए आलू की खपत को दुरुस्त करने के लिए हाइब्रिड आलू और चुकंदर की शक्कर से नए व्यंजन बनाने की दिशा में प्रयोग शुरू हुए हैं। उम्मीद है कि नए साल में नए पकवानों की रेसिपी उपलब्ध होगी।
Published on:
12 Jul 2019 10:05 am
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