विनोद निगम
कानपुर. कभी कानपुर को पूरब का मैनचेस्टर कहा जाता था। लाल इमली, एल्गिन मिल, बीआईसी, स्वदेशी कॉटन जैसी कंपनियों से यहां की वैश्विक औद्योगिक क्षितिज पर अलहदा पहचान थी। आज ये चारों कंपनियां बंद हो चुकी हैं। वित्तमंत्री के बजट संबोधन के दौरान इन्हें चलाने के बारे में जिक्र तक न होने से यहां के लेगों को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है। कानपुर के लोगों का कहना है कि बतौर गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी शंखदान रैली के दौरान शहर आए थे और केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद बंद मिलों को शुरू कराए जाने का वादा किया था। पौने चार चाल बीत गए, तीन बजट भी निकल गए, लेकिन मिलों की चिनमियों से धूंआ नहीं निकला।
पर ऐसा उन्होंने नहीं किया
कर्मचारी नेता राजू ठाकुर के मुताबिक, 25 अप्रैल को कपड़ा मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी अनिल कुमार ने ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन (बीआईसी) के सीएमडी को चि_ी भेज कर्मचारियों के बकाए, लोन, चल-अचल संपत्ति और मिल बंद करने के लिए बजट की जरूरतों पर जानकारी मांगी गई थी, जिसकी सूचना उन्हें भेज दी गई थी। हमें उम्मीद थी कि वित्तमंत्री इन्हें शुरू कराए जाने का ऐलान करेंगे, पर ऐसा उन्होंने नहीं किया।
संजीवनी शक्ति वित्तमंत्री की तरफ से नहीं मिली
अरुण जेटली के बजट से कानपुर का औद्योगिक समूह निराश है। मृतप्राय: हो रहे होजरी उद्योग को फिर से उठ खड़ा होने की संजीवनी शक्ति वित्तमंत्री की तरफ से नहीं मिली। इसके साथ ही लेदर इंडस्ट्री भी छली ही गई है। हकीकत तो यह है कि उन्हें जो रियायतें देने की बात बजट में कही गई है वह कोई नई नहीं है। लाल इमली, एल्गिन मिल, बीआईसी, स्वदेशी कॉटन जैसी कंपनियों का बजट में इन्हें चलाने के बारे में जिक्र तक न होने से यहां के लेगों को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है। कर्मचारी नेता राजू ठाकुर कहते हैं कि लाल इमली में आज भी 600 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन उन्हें पिछले डेढ़ साल से वेतन नहीं दिया गया। कर्मचारियों ने लाल इमली को चलाए जाने के लिए सांसद मुरली मनोहर जोशी, कपड़ा मंत्री स्मृति इरानी को पत्र लिखकर मांग की, लेकिन उन्होंने सुनवाई नहीं की। राजू ठाकुर कहते हैं कि हमने खुद पीएम और वित्तमंत्री को पत्र लिखा और कानपुर के पुराने रूवरूप को लाए जाने के लिए इन मिलों को शुरू कराए जाने को कहा पर किसी ने सुधि नहीं ली।
रेडीमेड गारमेंट्स पर नहीं दिखाई नरमी
यूपी रेडीमेड गारमेंट्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष धीरज शाह वित्तमंत्री के बजट से खासे निराश दिखे। उन्होंने कहा कि अरुण जेटली को जरूरी और लग्जरी आइटम में अंतर समझना चाहिए। आज तो स्कूली कोट भी एक हजार से ऊपर मिलता है। इसमें पांच फीसदी टैक्स लगाकर उन्होंने हमारे साथ ही ग्राहकों के साथ भेदभाव किया है। अध्यक्ष धीरज शाह ने कहा कि 1200 का कपड़ा लग्जरी की श्रेणी में नहीं आता, बावजूद इसमें भी हमें टैक्स देना पड़ रहा है।
मंत्री जी स्कूली कोट से भी टैक्स ले रहे हैं
बताया, एक हजार रुपए तक के रेडीमेड पर 5 प्रतिशत टैक्स है, इससे ऊपर 12 प्रतिशत है। हमें उम्मीद थी के वित्तमंत्री इसे बढ़ाकर 2500 रुपए कर देंगे। मंत्री जी स्कूली कोट से भी टैक्स ले रहे हैं। हमें लगता था के जेटली कपड़े की प्रत्येक श्रेणी पर टैक्स की दरें एक समान करेंगे। पर ऐसा उन्होंने अपने आमबजट में नहीं किया। अध्यक्ष धीरज शाह ने बताया कि रेडीमेड बाजार यूपी सहित पांच राज्यों में सबसे बड़ा बाजार है। कानपुर में कर साल करीब 12 हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता है। 20 हजार से ज्यादा व्यापारी सीधे जुड़े हैं और दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार इसी के जरिए मिलता है।
टैक्सधारक को भी नहीं मिली राहत
आम आदमी की बजट से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन वह चकनाचूर हो गई। आमशहरियों का कहना है कि वित्तमंत्री चाहते तो टैक्स स्लैब में छूट दे देते, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। फिलहाल साल में 2.5 लाख रुपये तक कमाने वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है। लेकिन जीवनयापन का खर्च इतना बढ़ गया है कि वर्तमान टैक्स स्तर के ढांचे में बदलाव किए जाने की उम्मीद काफी बढ़ गई है। नवीन भार्गव (चार्टेड एकाउंटेड एक्सपर्ट) कहते हैं कि डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स कंपनियों को डिविडेंड देने में हतोत्साहित करता है। इससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है। इन्वेस्टर सेंटीमेंट मजबूत करने के लिए डीडीटी खत्म किया जाना चाहिए था। आयकर छूट सीमा कम से कम 4 लाख की जानी चाहिए थी, साथ ही इंश्योरेंस उत्पादो पर जीएसटी खत्म कर देते तो लोगों को कुछ राहत मिल जाती।