
kanpur dehat
कानपुर देहात. कहा जाता था कि एक समय कोई भी मुख्यमंत्री नोएडा नहीं जाते थे क्योंकि अगर कोई भी मुख्यमंत्री नोएडा गए तो वो दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बने। यही हाल कानपुर देहात के एक डाक बंगले का है, यहां पर भी एक ऐसा डाक बंगला है, जिसमें अगर कोई भी विधायक या मंत्री ने एक रात गुजारी तो अगली बार वह न विधायक बना और न ही मंत्री बना। इसी कारण क्षेत्र में कोई भी नेता या मंत्री आता है तो वह इस डाक बंगले में नहीं रुकता है। इस डाक बंगले का खौफ आज भी नेताओं के जेहन में बना हुआ है। पूर्व की कई सरकारों के मंत्री और विधायक इस क्षेत्र में भ्रमण को आये और इसी डाक बंगले में रुके लेकिन अगली बार वह विधायक मंत्री नहीं बन पाए।
बाद में कई सरकारें रही और उनके नेता मंत्री भी क्षेत्र में भ्रमण को आते रहे, लेेेकिन इस डाक बंगले में रुकने की हिम्मत किसी ने नहीं जुटाई। ग्रामीण भी इस बात को मान रहे है कि आखिर क्या है इस डाक बंगले का रहस्य। कोई न कोई रहस्य तो है इस डाक बंगले में जिसे लेकर अब कोई भी नेता मंत्री यहां रुकता नहीं है। वही बीजेपी नेता ने इस डाक बंगले के रहस्य को झूठा बताते हुए सपा और बसपा की सरकारों पर काम की जगह भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
कानपुर देहात के भोगनीपुर में एक सिंचाई विभाग का डाक बंगला बना है, जो 1883 में बना था। जिसमें सिंचाई विभाग के आला अधिकारियों के रुकने के लिये व्यवस्था बनाई गई थी, लेकिन कभी मंत्री या नेता भी इस क्षेत्र में भ्रमण को आते थे तो उनको इसी डाक बंगले में ठहरा दिया जाता था।
पूर्व की कांग्रेस सरकार में राजपुर से 4 बार विधायक और मंत्री रहे चौधरी नरेंद्र सिंह ने इस क्षेत्र का दौरा किया था और रात में उनको इसी डाक बंगले में ठहराया गया था, लेकिन फिर अगले चुनाव वह विधायक नहीं बन पाये थे।
इसी प्रकार रामआसरे वर्मा निर्दलीय विधायक बने थे वह भी इसी क्षेत्र में आये और उनको भी इसी डाक बंगले में ठहराया गया था। दोबारा कभी विधायक नहीं बन पाये। इसके बाद वह जनता दल में शामिल हुए थे, लेकिन इसके बाद भी विधायक नहीं बन पाये थे।
इसी प्रकार बसपा सरकार में प्यारेलाल संखवार घाटमपुर से विधायक बने थे और फिर बाद में घाटमपुर से सांसद बने थे। उन्होंने क्षेत्र में काफी विकास भी कराया था। भोगनीपुर के इस डाक बंगले में रुकना उनको भी भारी पड़ा था वह भी कभी सांसद नहीं बन सके।
इसी प्रकार पूर्व की बसपा सरकार में ही बसपा के प्रदेश अध्यक्ष केके सचान ने भी भोगनीपुर भ्रमण के दौरान एक रात डाक बंगले में गुजारी और उनको प्रदेश अध्यक्ष पद से हाथ गवाना पड़ा था।
राजपुर से ही शोषित समाज दल के संस्थापक और विधायक बने रामस्वरूप वर्मा जो यूपी सरकार में वित्त मंत्री भी रहे थे। उनका भी क्षेत्र में भ्रमण करना और इस बंगले में रुकना महंगा पड़ा। वह भी कभी विधायक नहीं बन पाये। इस तरह इस डाक बंगले में वास्तुशास्त्र दोष की मान्यता बढ़ गयी।
आखिर क्या है इस डाक बंगले का रहस्य इसे आज तक कोई नहीं समझ पाया। ग्रामीण भी इसे कोई आस्था होने की बात कर रहे है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले कई नेता मंत्री आते रहते थे और यही रुकते भी थे लेकिन रुकने के बाद उसकी कुर्सी चली जाती थी इसलिए बहुत सालो से अब यहां कोई भी नेता नहीं रुकता है। शायद उनके जेहन में यही डर आज भी है।
वहीं बीजेपी नेता अजय सचान की माने तो ये सारा अन्धविश्वास सपा, बसपा की सरकारों का फैलाया हुआ है। विकास तो इस क्षेत्र में इन लोगों के द्वारा किया नहीं गया है। सिर्फ अन्धविश्वास फैलाकर लोगों को भ्रमित करने का काम हमारी सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने नोएडा जाकर इस रहस्य को खत्म किया है। इसी प्रकार इस डाक बंगले में बहुत जल्द बीजेपी के नेता और मंत्री रुकने का काम करेंगे और इस भ्रामक रहस्य को खत्म करने का काम किया जायेगा।
Published on:
06 Jan 2018 04:29 pm
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