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अब यहां के लोग खुले जंगल में देख सकेंगे चिंकारा, चीतल व दुर्लभ हिरन, युद्ध स्तर पर शुरू हुआ काम

बडे बडे चिडियाघरों में जिन दुर्लभ प्रजाति के हिरनों को लोग देख पाते हैं, उन्हे अब यहाँ इस खुले जंगल में लोग आसानी से देख सकेंगे।

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अब यहां के लोग खुले जंगल में देख सकेंगे चिंकारा, चीतल व दुर्लभ हिरन, युद्ध स्तर पर शुरू हुआ काम

अरविंद वर्मा

कानपुर देहात-बीते माह रसूलाबाद के असालतगंज के समीप 6 किमी लंबे जंगल में दुर्लभ हिरणों की प्रजाति का बड़ा झुंड देखा गया था। जिसको लेकर चर्चा का विषय बना हुआ था। जब इसकी जानकारी वन विभाग को हुई तो इसको लेकर विभागीय अधिकारी काफी उत्साहित थे। हालांकि वहां के किसानों ने भी दुर्लभ, काले व अन्य हिरण देखने की पुष्टि की थी। इसके बाद वन विभाग के अफसरों ने जंगल को पर्यटन स्थल का रूप देने की योजना बनाई थी। वन विभाग की ओर से हरियाली बढ़ाने की रणनीति बनाई गई थी। जिसको लेकर अब तैयारी शुरू हो गयी है। हिरणों के विचरण व उनके खान पान को ध्यान में रखते हुए श्रमिकों ने यहां पौधे लगाना शुरू कर दिया है।

लगेंगे सूचना बोर्ड व बनेगा तालाब

असालतगंज वन में दुर्लभ काले हिरण व अन्य चीतल व चिंकारा हिरण समूह देखा गया है। संरक्षित हिरण कुनबा जंगल में पले और बढ़े इसके लिए और अनुकूल माहौल बनाने की रणनीति वन विभाग ने बनाई है। यहां तालाब, हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण, सूचना बोर्ड आदि लगाने की प्रक्रिया चल रही है। 173 हेक्टेयर वन में आंशिक भूमि रिक्त है। इस पर पिछले दिनों हरियाली बढ़ाने के लिए गड्ढे तैयार कराए गए थे। वन रक्षक सुघर सिंह की अगुवाई में खोदे गए गड्ढों में पौधे लगाने का काम शुरू कर दिया गया। 40 हेक्टेयर क्षेत्र के अन्य हिस्से में भी पौधे लगाए जा रहे हैं। 10 हेक्टेयर भूमि पर बीस हजार गड्ढे तैयार कराए गए थे। इसमें पौधे लगाए जा रहे हैं।

बिल्हौर रसूलाबाद मुख्य मार्ग से सटा है ये जंगल

दरअसल असालतगंज से गुजरे बिल्हौर रसूलाबाद मुख्य मार्ग से सटा यह जंगल इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। सड़क मार्ग के समानांतर जंगल छह किमी लंबाई में है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वन का विस्तार 173 हेक्टेयर क्षेत्रफल में है। इसमें 80 हेक्टेयर भूमि में विलायती बबूल खड़ा है। कुछ दिन पूर्व ही असालतगंज जंगल में दुर्लभ काले हिरण व अन्य हिरण की अन्य प्रजाति देखी गई है। जिसको लेकर प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में वन कर्मियों की बैठक में तय हुआ था कि हिरणों की सुरक्षा के साथ पलने बढ़ने को जरूरी इंतजाम जुटाए जाएं। चारे का इंतजाम जल्द करने को कहा गया था। रसूलाबाद कस्बे के करीब होने को लेकर पर्यटकों की आसान पहुंच व इस जंगल को जिले का गौरव बनाने के प्रयास पर भी विचार हुआ। इसका काम तेजी से चल रहा है।

डीएफओ डा. ललित कुमार गिरि ने बताया कि पौधरोपण के बाद कुछ पौधे सूख गए है। इन गड्ढों मे दूसरे पौधे लगाए जाएंगे।