
Malnutrition
कानपुर देहात. जिले में कुपोषित बच्चों के लिए पोषण की योजना मजाक बन गई है। दावे किए जा रहे हैं कि 4,818 बच्चे योजना के तहत पोषित किए गए जबकि ये बच्चे पुनर्वास केंद्र लाए ही नहीं गए। केवल ब्लाकों की सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने इन बच्चों को तंदुरुस्त करार दे दिया है।
हद तो यह कि 2016-17 में चिह्नित हुए 7265 कुपोषित बच्चों में महज 37 ही केंद्र में भर्ती हुए जो एक-दो दिन अथवा सप्ताह भर से कम रुके। अपर सीएमओ डा. डीपी सिंह कुपोषित बच्चों के स्वस्थ होने के भले दावे करें, लेकिन खुद जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश यादव सच्चाई बयां करते हैं कि पोषण पुनर्वास केंद्र में दवाइयां, पोषण सामग्री की व्यवस्था नहीं होने तथा अव्यवस्था के चलते बच्चों के परिजन रुकने को तैयार नहीं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जिन बच्चों को कुपोषित चिह्नित करती हैं, केंद्र पर उन्हें भर्ती योग्य न होने की बात कह कर टरका दिया जाता है।
इन हालात में कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ने में कमजोर इरादों का नतीजा है कि 2017-18 में कराए गए सर्वेक्षण में 9,293 कुपोषित बच्चे चिह्नित हुए हैं। इनमें 7791 कुपोषित और 1502 अति कुपोषित बच्चे शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इनको पुनर्वास केंद्र में लाकर, स्तनपान के जरिए या घरों में ही रखकर पोषित करने के लिए कार्ययोजना बनाई गई है। योजना के प्रति आंगनबाड़ी कर्मियों की उदासीन कार्यशैली पर उन्हें गंभीरता से काम करने की हिदायत दी गई है।
जनवरी 2016 में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना हुई-
जनवरी 2016 में जिला अस्पताल के आइसीसीयू (इंसेंटिव कार्डिक केयर यूनिट) में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई थी। आंगनबाड़ी केंद्रों में वजन दिवस पर चिह्नित 7265 कुपोषित बच्चों को इस केंद्र में भर्ती कर इलाज के साथ पोषण उपलब्ध कराने, 24 घंटे देखभाल की व्यवस्था की गई थी। बच्चों की माता को भी ठहरने और नि:शुल्क भोजन का इंतजाम कराया जाना है। बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए खिलौने आदि की व्यवस्था थी। अप्रैल 2016 को केंद्र में औड़ेरी राजपुर का पहला अति कुपोषित बच्चा राना पुत्र सोनू भर्ती हुआ था। वर्ष 2016 में कुल 28 बच्चे भर्ती हुए। 2017 में आगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से सिर्फ नौ बच्चे ही भर्ती कराए गए।
इस बार चिह्नित कुपोषित बच्चों की संख्या-
ब्लॉक - कुपोषित - अति कुपोषित
सरवनखेड़ा - 310 76
अकबरपुर - 70 18
अमरौधा - 2110 235
मैथा - 703 229
रसूलाबाद - 741 48
संदलपुर - 762 228
डेरापुर - 298 43
झींझक - 1637 36
मलासा - 657 423
राजपुर - 172 30
शहरी स्लम एरिया- 266 36
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी ने दिया बयान-
अपर सीएमओ डा. डीपी सिंह ने बताया कि वजन दिवस पर 2016-17 में 7265 बच्चे कुपोषित चिह्नित हुए थे। 4818 को पोषित कर ठीक होने (ग्रीन श्रेणी) की सूचना ब्लाकों से उपलब्ध हुई है। नवंबर-दिसंबर में चलाए गए अभियान में 7,791 बच्चे कुपोषित (पीली श्रेणी) तथा 1502 बच्चे अति कुपोषित (लाल श्रेणी) चिह्नित हुए हैं। इन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कराने की जिम्मेदारी आंगनबाडी कर्मियों को दी गई है। पिछले साल आंगनबाड़ी कर्मियों की लापरवाही से केंद्र में कुपोषित बच्चों के न पहुंचने से उनके पोषण की महत्वाकांक्षी योजना अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर सकी थी। अब लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
Published on:
18 Jan 2018 07:26 pm
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