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पैर पकड़ने के बाद भी विधायक ने दुत्कारा, उर्सला के बाहर तड़पती रही वृद्धा

वृद्धा ने बताया कि एक विधायक जी आए थे, मैंने उनके पैर पकड़ कर इलाज करवाने के लिए कहा, पर उन्होंने ध्यान न देते हुए अस्पताल के अंदर चले गए। बताया, पांच दिन तक बारिश और भूख ने तोड़ दिया था। अस्पताल में आने वाले लोगों ने मुझे मरा समझ रहे थे।
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Ankur Singh

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Updated: 26 Jul 2016, 5:02 PM IST

old woman

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कानपुर।
शहर के धरती के भगवान इनदिनों गरीबों की सुध नहीं ले रहे हैं। हैलट हो उर्सला या अन्य सरकारी अस्पताल का जगहों का हाल बेहाल है। डाॅक्टर मरीजों का इलाज के नाम पर शोषण कर रहे हैं। इसी का उदाहरण मंगलवार को देखने को मिजा। उर्सला अस्पताल गेट पर एक वृद्धा पांच दिन से इलाज के लिए तड़प रही है, लेकिन डाॅक्टरों ने इलाज तो छोडिए अस्पताल में के अंदर प्रवेश करने तक नहीं दिया।


डाॅक्टरों ने गेट से करवाया बाहर


मूलरुप से उन्नाव शुक्लागंज क्षेत्र श्रीनगर में रहने वाला शेषनारायण अग्निहोत्री ओईएफ से रिटायर्ड हैं। उन्होंने बताया कि पत्नी मीना अग्निहोत्री करीब दस दिन से बीमार चल रही हैं। बीमार होने पर बिना बताये ही वह पांच दिन पहले ही पड़ोसी युवक के साथ इलाज के लिए उर्सला आईं। युवक ने उन्हें इलाज के लिए इमरजेंसी कक्ष में ले गया। आरोप हैं कि इमरजेंसी में बैठे डॉक्टर ने उन्हें इलाज करें बिना ही भगा दिया। इसके बाद पड़ोसी युवक भी बीमार महिला को इमरजेंसी के बाहर ही छोड़कर चला गया।


पति के आने के बाद किया एडमिट


वृद्धा का कहना है कि अस्पताल के इमरजेंसी के बाहर वह करीब पांच दिनों से पड़ी हुई है और उसे कोई भी डॉक्टर देखने नहीं आ रहा हैं। इलाज न मिलने पर मरीज की हालत गंभीर हो गईं। इधर पत्नी की तलाश करते हुए मंगलवार को पति शेषनारायण अस्पताल पहुंचा। इमरजेंसी में बीमारी पड़ी पत्नी पति को देखकर रोने लगी और डॉक्टर के सवेंदनहीनता की आप बीती रो-रो कर बयां की। पत्नी को चुप कराते हुए अधेड़ ने इमरजेंसी कक्ष में बैठे ईएनटी सर्जन डॉक्टर नरेश चन्द्रा को दिखाया। डॉक्टर ने अधेड़ को इलाज की पूरी मदद करने की सांत्वना देकर मरीज को भर्ती कर वार्ड में शिफ्ट कर लिया।


बारिश और भूख के चलते हुई कमजोर


पांच दिन तक अस्पताल के बाहर जिन्दगी और मौत की जंग लड़ती रही, लेकिन समाजसेवा के नाम पर एनजीओ चलाने वालों और जनप्रतिनिधियों की नजर वृद्धा पर नहीं पड़ी। वृद्धा ने बताया कि एक विधायक जी आए थे, मैंने उनके पैर पकड़ कर इलाज करवाने के लिए कहा, पर उन्होंने ध्यान न देते हुए अस्पताल के अंदर चले गए। बताया, पांच दिन तक बारिश और भूख ने तोड़ दिया था। अस्पताल में आने वाले लोगों ने मुझे मरा समझ रहे थे। वहीं मामले पर पांच दिन से बीमारी पड़ी मरीज महिला के बारे में पूछने पर निदेशक ने कहां कि उन्हे जानकारी नहीं है अगर ऐसा कोई मामला सामने आया तो जांच करवाई जायेगी।