
यहां परशुराम ने सहस्रबाहु का किया था वध, आज भी मिलती है मानव अस्थियां
कानपुर देहात-प्राचीनकाल में ऋषि मुनियों के तप बल की कहानियां हम आज भी सुनते रहते है। गौतम व विश्वामित्र जैसे ऋषियों की गाथाएं आज भी पुराणों में उल्लिखित है। ऐसे ही जमदग्नि ऋषि का इतिहास समेटे रसूलाबाद क्षेत्र का जोत गांव आज भी विख्यात है। भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि इसी गांव में एक आश्रम बनाकर पत्नी रेणुका के साथ शिव तपस्या किया करते थे और उनकी जीविका चलाने के लिए कामधेनु गाय उनके पास थी, जिसे पाने के लिए सहस्रबाहु ने परशुराम के पिता जमदग्नि का वध कर दिया था। तब से यह आश्रम जमदग्नि ऋषि के आश्रम से प्रसिद्ध है। आज भी लोग यहां दर्शन के लिए उमड़ते है। आस्था का केन्द्र माने जाने वाले इस प्राचीन शिव मंदिर को,जनता ने पर्यटन स्थल बनाने की गुहार भी लगाई थी लेकिन जहासन प्रशासन ने सुध नही ली।
ऋषि जमदग्नि पत्नी रेणुका के साथ यहां करते थे शिव तपस्या
कानपुर देहात के तहसील रसूलाबाद क्षेत्र के जोत ग्राम पंचायत के पास एक ऐसा ही प्रचीन शिव मंदिर है, जो कि जमदग्नि ऋषि आश्रम के नाम से जाना जाता है। आपको बताते चलें कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां जगदग्नि ऋषि अपनी पत्नी रेणुका के साथ में शिव आराधना में लीन रहा करते थे। जिनके पास एक कामधेनु नाम की गाय भी हुआ करती थी, जिससे उनकी जीविका चलती थी। उस कामधेनु गाय की सबसे बड़ी विशेषता थी कि आश्रम में चाहे जितने अतिथि आ जाएं, उन सभी आए हुए अतिथियों का भोजन व्यवस्था स्वयं कामधेनु किया करती थी।
कामधेनु के लिए सहस्रबाहु ने कर दिया था वध
इसी दौरान एक बार सहस्त्रबाहु अर्जुन का अपने सेना के साथ आश्रम में अचानक आगमन हुआ। ऋषि जमदग्नि अतिथि भाव लेकर के माता कामधेनु के पास गए और उनके स्वागत सम्मान के लिए याचना की। जिसके चलते सारी व्यवस्था गौमाता कामधेनु ने की। यह सारा नजारा सहस्रबाहु अर्जुन देखता रहा और उसके मन में यह भाव आया कि यह कामधेनु नामक गाय को अपने राज्य में ले चलें। जब सहस्त्रबाहु नेे जमदग्नि से उस गाय को मांगा तो उन्होंने गाय देने से मना कर दिया। क्रोध में आकर सहस्त्रबाहु अर्जुन ने ऋषि जमदग्नि का वध कर दिया।
फिर परशुराम ने सहस्त्रबाहु का कर दिया वध
जिसको देख माता रेणुका ने अपने पुत्र भगवान परशुराम की याद करते हुए अपने वक्षस्थल पर 21 घूसों का प्रसार किया। फिर जैसे ही भगवान परशुराम को याद किया तो वह उसी समय प्रकट होकर अपनी माता रेणुका से सारा किस्सा हाल पूूूछने लगे। माता ने विलाप करते हुये पूरा दृष्टाांत बताया। जिसके चलते भगवान परशुराम जी ने सहस्त्रबाहु अर्जुन की सेना समेत उसका सर्वनाश कर दिया और वह महेंद्राचल पर्वत पर जाकर भगवान शिव की आराधना में लीन हो गए ।
आज भी वहां मिलती है मानव अस्थियां
वही गांव के आसपास गांव के बुजुर्गों का कहना हैं कि आज भी वहां खोजने से मानव अस्थियां निकलती हैं, जो इसको प्रमाणित करती है। आज भी ऋषि जमदग्नि का आश्रम देखने को मिलता है। जिला पंचायत सदस्य सुंदरलाल पांडेय के पुत्र सुधीर पांडेय ने क्षेत्र की जनता से सहयोग और निजी धन से उस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। क्षेत्र की जनता का कहना है कि सुधीर पांडेय के पिता सुंदरलाल पांडेय सदैव गरीबों की मदद के साथ मंदिरों की देखभाल भी किया करते हैं।
Updated on:
11 Jun 2018 03:48 pm
Published on:
09 Jun 2018 02:52 pm
बड़ी खबरें
View Allकानपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
