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पिता जमदग्नि से प्रेरित होकर परशुराम ने यहाँ बनवाया था शिव मंदिर

शिव भक्ति मे इतने लीन हुये कि उन्होने उसी समय परसौरा मे शिव मंदिर बनवाया था, जो आज परशुराम मंदिर के नाम से जाना जाता है।

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पिता जमदग्नि से प्रेरित होकर परशुराम ने यहाँ बनवाया था शिव मंदिर

कानपुर देहात-त्रेता युग में जब राजा जनक अपनी पुत्री सीता की शादी करने को लेकर असमंजस मे थे तो उन्होने यह घोषणा की जो राजा यह धनुष तोडेगा, उसी से सीता की शादी कराई जायेगी। सीता स्वयंवर की बेला चल रही थी, कई बलशाली राजाओं ने भरे दरबार में सीता माता से विवाह करने के लिये वह विशाल धनुष उठाने की कोशिश की लेकिन परशुराम के धनुष को कोई नही उठा सका। अंत में भगवान राम ने धनुष तोडकर सीता से विवाह किया। ऐसे भगवान परशुराम को जीवंत करने वाला एकमात्र मंदिर जनपद के रसूलाबाद के परसौरा गांव मे स्थित है, जहाँ उनके दर्शन के लिये परशुराम जयंती के दिन हजारो श्रद्धालुओ का तांता लगता है। बताया जाता है कि ब्राह्मण कुल मे जन्मे परशुराम जी का जन्म इसी गांव मे हुआ था। हिंदू धर्म मे परशुराम जी को भगवान का दर्जा दिया गया है। कहा जाता है कि इनकी एक प्रतिमा श्रीनगर जम्मू के बीच स्थित रघुनाथ मंदिर मे स्थापित की गयी है लेकिन उनका जन्म स्थान परसौरा गांव मे होने की वजह से उनकी जयंती के दिन इस गांव मे दूर दराज से लोग उनके दर्शन के लिये आते है। पुरुष ढोल मजीरा गाजे बाजे के साथ मंगल गीत गाते है।

इस नाले का पानी पीने से लोग जाते हैं अमृत्व की ओर

मंदिर से पांच सौ मीटर की दूरी पर शिवनाला एक स्थान है, जहाँ मां रेणुका मटकी मे जल भरने जाया करती थी। महिलायें आज भी उस नाले का जल भरकर घर लाती है। कहते है उस जल को पीने से लोग अमृत्व की ओर अग्रसर होते है। बताया जाता है कि माता रेणुका के साथ आश्रम में रहकर पिता जमदग्नि हमेशा शिव तपस्या मे लीन रहा करते थे। जिन्हें देख परशुराम भी भगवान शिव के भक्त हो गये थे। शिव भक्ति मे इतने लीन हुये कि उन्होने उसी समय परसौरा मे शिव मंदिर बनवाया था, जो आज परशुराम मंदिर के नाम से जाना जाता है।

फागुन माह की विशेषता है यहाँ

परसौरा से करीब 1 किलोमीटर दूरी पर स्थित जंतर खेडा स्थान है, जहाँ परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि रहा करते थे। रात दिन ईश्वर के ध्यान मे रहना ही सिर्फ उनका काम था। एक दिन स्वप्न मे भगवान शिव ने उनसे अपनी स्थापना कराने की बात कही। तब जाकर उन्होने जंतर खेडा मे एक मंदिर बनवाया, जिसे आज जमदग्नि आश्रम के नाम से जाना जाता है। परशुराम मंदिर मे दर्शन के बाद लोग इस मंदिर मे भी दर्शन के लिये जाते है। यहाँ फागुन के महीने मे विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।