
गौरव ने बताया कि रानी देवी मेरी बुआजी हैं। यानी मेरे पिताजी की बहन। उनकी शादी साल 1995 में हुई थी। शादी के 2-3 साल बाद परिवार में विवाद होने लगा था। इसलिए वो यहीं आकर रहने लगीं थीं। तत्कालीन ग्राम प्रधान को लगा कि उनको बाद में चलकर दिक्कत न हो, इसलिए उन्होंने साल 2005 में उनके नाम पर जमीन का पट्टा कर दिया था।
Kanpur Fire Case के दूसरे एपिसोड में हमने उस किरदार से बात की। जिसे पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उसका नाम FIR में नहीं है। लेकिन, कृष्ण गोपाल दीक्षित के घर वाले और गांव के कुछ लोग उसे ही पूरी घटना का मुख्य किरदार बता रहे हैं। पीड़ित पक्ष के बेटे शिवम दीक्षित का आरोप है कि लेखपाल से इसी की सेटिंग थी। किरदार का नाम है गौरव फौजी।
FIR में पहला नाम अशोक दीक्षित का है। अशोक के दो बेटे हैं। गौरव और अभिषेक। दोनों ही आर्मी में हैं। गौरव कश्मीर में पोस्टेड हैं। जबकि अभिषेक की पोस्टिंग बेंगलुरु में है।
हमने गौरव से टेलीफोनिक इंटरव्यू किया और घटना से जुड़े सभी पहलुओं पर बातें की। कुल बातचीत 28 मिनट 27 सेकंड की रही। गौरव ने पीड़ित पक्ष पर कुछ गंभीर आरोप लगाए तो अपने बचाव में दलीलें भी पेश कीं। आइए उसी इंटरव्यू के सवाल-जवाब में उतरते हैं…
सवाल नंबर 1
आपके ऊपर आरोप है कि आपने लेखपाल के साथ साठ-गांठ करके पीड़ित परिवार को परेशान किया और उसकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की।
जवाब: गौरव बताते हैं कि पहली बात यह है कि विवादित जमीन उसकी यानी शिवम दीक्षित के परिवार की है ही नहीं। यह पूरी तरह से गलत है कि मैंने उसकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की। वह जमीन ग्राम समाज की है। जमीन का आवंटन हमारी बुआजी रानी देवी पत्नी रामनरेश के नाम पर है। हमें लगा कि मैं फौज में हूं। मुझे अपने उन परिवार के लोगों की मदद करनी चाहिए जिनको न्याय नहीं मिल पा रहा है। इसलिए हम अपनी बुआजी के साथ खड़े हुए। 18 साल से इन लोगों यानी शिवम दीक्षित के परिवार का उसपर कब्जा था। हमने सिर्फ कोशिश की थी कि यह जमीन बुआजी को मिल जाए। जहां तक बात लेखपाल के साथ साठ-गांठ की है तो हम उनको पहले से नहीं जानते हैं। वह एक रिटायर्ड फौजी हैं। उन्होंने अपना काम तेजी से और स्ट्रेट फॉरवर्ड किया जिससे सामने वाले और गांव के लोगों को दिक्कत हो गई।
हम इंटरव्यू के दूसरे सवाल के लिए आगे बढ़ते इससे पहले गौरव ने पीड़ित पीड़ित पक्ष यानी कृष्णगोपाल दीक्षित के परिवार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उन लोगों ने 50 हजार रुपए घूस लेखपाल को ऑफर की थी और लेखपाल से कहा था कि पैसे ले लो और हमें यहीं बने रहने दो। लेकिन, लेखपाल ने पैसे लेने से इंकार कर दिया था।
कृष्ण गोपाल दीक्षित के परिवार ने लेखपाल को 50 हजार रुपए कि रिश्वत ऑफर की थी इसका एविडेंस गौरव नहीं दे सके।
सवाल नंबर 2
घटनास्थल के पीछे की जमीन आपकी थी। आपके घरवाले चाहते थे कि आगे से ये लोग हट जाएंगे तो आपकी जमीन रोड के फ्रंट साइड में आ जाएगी और जमीन का दाम बढ़ जाएगा।
जवाब: रोड पर आने का मतलब ही नहीं था। हमारी जमीन ही वही थी। जिसपर इन्होंने कब्जा किया था। साल 2005 में ग्राम प्रधान ने दो जमीन का आवंटन किया था। पहला कृष्ण गोपाल दीक्षित के नाम से और दूसरा मेरी बुआजी रानीदेवी के नाम से। जहां पर कृष्ण गोपाल को आवंटन हुआ था वहां हमारा कब्जा था। जैसे इनका कब्जा है। हमारे पास कागज नहीं था इसलिए हमने वो जगह उनको यानी कृष्ण गोपाल के परिवार को दे दी थी। हम गवर्नमेंट जॉब कर रहे हैं और हम फर्जी लड़ाई नहीं लड़ना चाहते थे। इन्होंने मेरी जमीन के लिए कहा कि एक-दो पेड़ खड़े हैं। जब हट जाएंगे तब ले लेना। वो साल 2005 में जमीन देने के लिए तैयार थे। समय बीतता गया कुछ साल बाद रोड बन गयी तो इनकी मानसिकता बदल गई और कहने लगे कि हम जमीन नहीं देंगे कुछ भी हो जाए।
सवाल में नंबर 3
अगर यह जमीन रानी देवी यानी आपकी बुआजी के नाम पर आवंटित थी तो फिर कृष्ण गोपाल को कहां आवंटित की गयी थी?
जवाब: वो नदी किनारे दूसरी तरफ है। जो इस जमीन से 700 मीटर की दूरी पर है। उसपर इन्होंने कब्जा कर रखा है।
सवाल नंबर 4
नवंबर में आपके और दीक्षित परिवार के बीच हुए झगड़े ने आग में घी डालने का काम किया, ऐसा क्या था जिसकी वजह से दुश्मनी यहां तक पहुंची।
जवाब: उसको मैं झगड़ा नहीं कहूंगा, कृष्ण गोपाल के छोटे बेटे अंश दीक्षित ने गांव के ही एक आदमी को गाली दे दी थी। मैंने मना किया तो मुझसे भी उलझ गया। मैंने उससे इतना कहा था कि नौकरी में नहीं होता तो तुमको बता देता। यह कोई झगड़ा या धमकी नहीं थी। बस गुस्से में की गई बहस थी।
सवाल नंबर 5
कब्जे के विरोध की शुरुआत हाल-फिलहाल कहां से शुरू हुई, इसकी जड़ क्या थी? जिसका नतीजा इतना भयानक 2 मौत के रूप में निकला।
जवाब: फिलहाल विरोध की शुरुआत मंदिर बनाने से हुई थी। कृष्ण गोपाल के परिवार ने कहा कि छोटा सा शिव जी का मंदिर बनवाना है। हमने कहा कि मंदिर से कोई परेशानी नहीं है। हमने परमिशन दे दी। जो पहला अवैध निर्माण 13 जनवरी को गिरा था वो मंदिर के नाम पर ही बना था। क्योंकि दीवारें बनाने के बाद में इन्होंने बकरी और गायों को रखना शुरू कर दिया। हमने उनसे पूछा की आपने तो कहा था कि सिर्फ मंदिर बनाएंगे। फिर ये क्या है? कृष्णपाल दीक्षित ने कहा कि यही तो तरीका है। गांव के और लोगों ने विरोध किया।
सवाल नंबर 6
आपके दावे के अनुसार जब जमीन आपकी थी, तब आपने किसी तरह के निर्माण की परमिशन क्यों दी?
जवाब: हमने मंदिर के लिए जमीन दी थी उस समय जमीन नापी नहीं गयी थी। नेक काम के लिए कौन मना करता है। इस सवाल का उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था।
सवाल नंबर 7
इतना कुछ होने के बाद इस निर्मम घटना पर आपको दुःख है?
जवाब: गौरव ने कुछ देर शांत रहने के बाद कहा कि बहन और चाची के मरने का दुख है, वो भी मेरे परिवार के ही हैं। हमें पता होता कि ऐसी कुछ अनहोनी घटना हो जाएगी तो मैं एप्लीकेशन नहीं दिलवाता। हम खुद चाहते हैं कि इसमें फेयर इन्वेस्टिगेशन हो। चाहे मेरे पिताजी, मैं, लेखपाल या कोई भी दोषी हो तो उसपर 302 और 307 का मुकदमा चलना ही चाहिए।
हमने आरोपीत पक्ष से सवाल किया कि अब उस जमीन का क्या होगा जो कागज में रानी देवी के नाम से दर्ज है।
सवाल नंबर 8
विवादित जमीन का अब क्या होगा? क्या उसको लेने के लिए फिर से आरोपी पक्ष मुकदमा कायम करेगा ?
जवाब: मुकदमें में पहले आरोपी अशोक दीक्षित के बेटे गौरव फौजी ने कहा कि पता होता कि ऐसा होगा तो हम जमीन को छोड़ देते। हमें इस बात का पछतावा है कि हमने जमीन मांगी। बुआजी के लिए सरकार अब कहीं भी जमीन दे दे हमें मंजूर है।
सवाल नंबर 9
रानी देवी कौन हैं? उनका यहां से क्या कनेक्शन है? ग्राम प्रधान ने उनके नाम जमीन का पट्टा क्यों किया?
जवाब: गौरव ने बताया कि रानी देवी मेरी बुआजी हैं। यानी मेरे पिताजी की बहन। उनकी शादी साल 1995 में हुई थी। शादी के 2-3 साल बाद परिवार में विवाद होने लगा था। इसलिए वो यहीं आकर रहने लगीं थीं। तत्कालीन ग्राम प्रधान को लगा कि उनको बाद में चलकर दिक्कत न हो, इसलिए उन्होंने साल 2005 में उनके नाम पर जमीन का पट्टा कर दिया था।
सवाल नंबर 10
आपके खिलाफ जो भी बयान दे रहा है आपकी नजर में सब दोषी क्यों हैं ?
जवाब: जिस-जिस ने गांव में ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा किया है इस मामले में वो सभी लामबंद हो गए हैं।
Updated on:
20 Feb 2023 08:04 pm
Published on:
20 Feb 2023 07:50 pm
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