27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

इंदिरा नगर सड़क के बाद ‘जमीनी खेल‘ में फंसे सैकड़ों आवंटी

जमीन के खेल में सिर्फ राष्ट्रपति के घर को जाने वाली सड़क ही नहीं फंसी, बल्कि सैकड़ों की संख्या एलॉटी भी फंसे हैं. ये वह एलॉटी हैं, जिन्होंने अपने जीवन भर की कमाई से घर का सपना पूरा करने के लिए केडीए से प्लॉट लेकर रजिस्ट्री कराई, पर जब कब्जा लेने गए या फिर मकान बनाने पहुंचे तो उन्हें कथित जमीन मालिकों ने भगा दिया.
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

कानपुर

•

image

Alok Pandey

•

Updated: 6 Oct 2018, 1:30 PM IST

Kanpur

इंदिरा नगर सड़क के बाद ‘जमीनी खेल‘ में फंसे सैकड़ों आवंटी

कानपुर। जमीन के खेल में सिर्फ राष्ट्रपति के घर को जाने वाली सड़क ही नहीं फंसी, बल्कि सैकड़ों की संख्या एलॉटी भी फंसे हैं. ये वह एलॉटी हैं, जिन्होंने अपने जीवन भर की कमाई से घर का सपना पूरा करने के लिए केडीए से प्लॉट लेकर रजिस्ट्री कराई, पर जब कब्जा लेने गए या फिर मकान बनाने पहुंचे तो उन्हें कथित जमीन मालिकों ने भगा दिया. इससे एलॉटी अपने आपको ठगा महसूस कर रहे हैं और केडीए से जमीन खाली कराने के लिए गुहार लगा रहे हैं.

ऐसी मिली है जानकारी
दरअसल केडीए की ग्राम समाज और अरबन सीलिंग की जमीनों के बीच-बीच में प्राइवेट लोगों की भूमि भी है. इसका फायदा केडीए के प्रॉपर्टी सेक्शन के कर्मचारी उठाते हैं. जमीन पर कब्जा लिए बगैर ही केडीए हाउसिंग स्कीम का खाका खींच देता है. ले आउट तैयार कर प्राइवेट जमीनों पर रोड, ड्रेनेज आदि नेटवर्क की प्लानिंग कर ली जाती है.

प्‍लॉट भी हो जाते हैं एलॉट
यही नहीं प्लॉट भी काटकर लोगों को एलॉट कर देते हैं. जमीन विवादित होने की परवाह किए गए बगैर रजिस्ट्री तक कर देते हैं. इसके बाद जमीन मालिकों से मिलीभगत कर विवाद को तूल देकर मुआवजे का खेल शुरू करा देते हैं. इस बीच केडीए के विकास कार्य हो जाने से लाखों रुपए की जमीन की कीमत करोड़ों में पहुंच जाती है.

ऐसे होता है खेल
यही खेल हाई-वे सिटी, जवाहरपुरम, जरौली, पोखरपुर आदि हाउसिंग स्कीम में हुआ है. हाई-वे सिटी योजना में जमीन मालिकों के विरोध की वजह से सैकड़ों एलॉटी परेशान हैं. उन्हें जमीन पर कब्जा नहीं मिल रहा है. मुआवजे का खेल चल रहा है. लंबे समय से विकास कार्य भी ठप पड़े हुए हैं.

शामिल होते हैं अधिकारी भी
मुआवजे के इस खेल में केडीए के ऑफिसर तक शामिल रहते हैं. इसका खुलासा राष्ट्रपति के घर को जाने वाली मकड़ीखेड़ा वाली जमीन के मुआवजे के खेल में सामने आ चुका है. इसी तरह जवाहरपुरम के सैकड़ों एलॉटी रजिस्ट्री के बाद भी मकान बनाने का काम शुरू नहीं करा पा रहे हैं. उन्हें कथित जमीन मालिक मकान नहीं बनाने दे रहे हैं. अब एलॉटीज के पास केडीए के चक्कर लगाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है.