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इस वजह से फूलन देवी ने बेहमई में खेली थी खून की होली

14 फरवरी 1981 को फूलन देवी ने 20 लोगों की हत्या की थी, 12 फरवरी को कानपुर देहात की कोर्ट सुनाएगी देश के सबसे बड़े नरसंहार का फैसला।

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कानपुर। माथे पर काला टीका, सिर पर लाल पट्टी, हाथ पर राइफल और शरीर पर बागी की वर्दी के साथ जब फूलन देवी बीहड़ में कूदी तो अच्छे-अच्छों की हवा ढीली हो गई। बैंडिड क्वीन हर उस इंसान से बदला लेना चाहती थी जिन्होंने उसे जख्म दिए। जिसमें प्रमुख रूप से डकैत लालाराम और श्रीराम थे। 14 फरवरी की सुबह फूलन और लालराम गैंग के बीच मुठभेड़ हुई। घायल शेरनी फूलन के वार से लालाराम भागकर बेहमई में छिप गया। पीछे से फूलन भी आ धमकी और फिर शाम को यहां पर जब लालाराम नहीं मिला तो 20 लोगों की हत्या कर दी थी। जिसका फैसला 12 फरवरी 2020 को कानपुर देहात की कोर्ट में आना है।

कौन है फूलन देवी
फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को जालौन के घूरा का पुरवा में हुआ था। दस वर्ष की फूलने की शादी 40 साल के अधेड़ से उसकेे परिजनों ने कर दी। नाबालिग के साथ दुष्कर्म हुआ तो ससुराल में पति की प्रताड़ना से आहत होकर वह मायके आ गई। गांव के राजू मल्लाह बताते हैं कि फूलन को डकैम बाबू गुर्जर अगवा कर ले गया। इसी बीच फूलन की मुलाकात गैंग के दूसरे डकैत विक्रम मल्लाह से हुई तो दोनों के बीच प्रेम-प्रसंग हो गया। विक्रम ने बाबू गुर्जर की हत्या कर गैंग का सरदार बन गया। श्रीराम ठाकुर और लाला ठाकुर ने विक्रम मल्लाह की हत्या कर फूलन को अगवा कर लिया और बेहमई गांव में उसे रखकर तीन दिनों तक गैंगरेप किया।

इसके कारण बेहमई में बहाया खून
घूरा का पुरवा निवासी लखन मल्लाह बताते हैं कि गैंगरेप आहत होकर फूलन देवी में विक्रम मल्लाह गैंग के सदस्यों को खड़ा किया और खुद सरदार बनकर बीहड़ में उतर गई। बताते हैं, फूलन देवी हर हाल में लालाराम और श्रीराम को मारना चाहती थी। उसे पता चला कि दोनों यमुना के किनारे एक टहले पर छिपे हैं। फूलन से दोनों को घेर लिया। लालाराम गैंेग के सदस्यों ने फायरिंग शुरू कर दी तो फूलन की तरफ से गोलियों की बौछार होने लगी। अपने को घिरता देख लालाराम और श्रीराम भागकर बेहमई में एक घर पर छिप गए। फूलन पीछा करते हुए गांव में धावा बोल दिया और जब लालाराम-श्रीराम नहीं मिले तो निर्दोष 30 लोगों को घर से बाहर लाकर गोलियों से भून दिया। फूलन ने हत्याकांड को अंजाम देने के बाद सीधे पथरीधाम मंदिर पहुंची और विधि-विधान से पूजा के बाद सुबह यहां से निकल गई।

थानेदार को दिया था चैलेंज
मंदिर के पुजारी कालीचरण बताते हैं कि फूलन देवी ने बीहड़ में कई साल गुजारे पर माता सीता और प्रभु श्रीराम की कृपा के चलते पुलिस के साथ ही अन्य दुश्मन भी उसे छू तक नहीं पाए। एक किस्से का जिक्र करते हुए पुजारी बताते हैं कि नवरात्र पर फूलन देवी ने पत्र के जरिए थानेदार को मंदिर में आकर पूजा करने की जानकारी दी थी। साथ ही उसने चैलेंज दिया था कि मैं तुम्हे प्रसाद खिलाऊंगी। फूलन अगले दिन भेष बदल कर मंदिर में आई। उसे गिरफ्तार करने के लिए भारी फोर्स तैनात था। पूजा के बाद फूलन देवी ने थानेदार को प्रसाद दिया और हाथ में रक्षा कवच बांधकर आराम से निकल गई।

आज आना है फैसला
बेमहई निवासी ठाकुर राजाराम ने बताया कि फूलन देवी को किसी ने गलत जानकारी दी थी। लालाराम और श्रीराम बेहमई के बजाए पड़ोस के गांव में छिपे थे। वह दोनों को मारने के लिए गांव में धावा बोला और हमारी आंख के सामनें जगन्नाथ सिंह, तुलसीराम, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, लाल सिंह, रामाधार सिंह, वीरेंद्र सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिव बालक सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, बनवारी सिंह, हिम्मत सिंह, हरिओम सिंह, हुकुम सिंह समेत 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जबकि जंटर सिंह समेत आधा दर्जन ग्रामीण गोली लगने से घायल हुए थे। बताते हैं गांव के राजाराम सिंह ने दस्यु सुंदरी फूलन देवी समेत 35-36 डकैतों के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

कानपुर देहात में सुनवाई
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि वर्ष 2012 में डकैत फूलन, भीखा, पोसा, विश्वनाथ, श्यामबाबू और राम सिंह पर आरोप तय किए गए थे। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित की अदालत में चल रही है। राज्य की ओर से अभियोजन पक्ष ने वर्ष 2014 में गवाही पूरी कर ली थी। डीजीसी ने बताया कि 8 दिसंबर को बचाव पक्ष की बहस पूरी हो गई है। फैसला सुनाने के लिए विशेष अदालत ने 12 फरवरी की तारीख मुकर्रर की थी। डीजीसी ने बताया कि 21 सितंबर 2012 को पहली बार गवाही शुरू हुई। पहले वर्ष में 12 लोगों की गवाही हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 15 गवाह पेश किए गए। इनमे से सात तथ्य के साक्षी हैं।

कुछ की मौत तो कई फरार
पुलिस रिकार्ड के अनुसार बेहमई कांड की प्रमुख आरोपी दस्यु सुंदरी फूलन देवी की नई दिल्ली में हत्या हो चुकी है। जालौन के कोटा कुठौंद के राम औतार, गुलौली कालपी के मुस्तकीम, बिरही कालपी के लल्लू बघेल, बलवान, कालपी के लल्लू यादव, कोंच के रामशंकर, डकोर कालपी के जग्गन उर्फ जागेश्वर, महदेवा कालपी के बलराम, टिकरी के मोती, चुर्खी के वृंदावन, कदौली के राम प्रकाश, गौहानी सिकंदरा के रामपाल, मेतीपुर कुठौद के प्रेम, धरिया मंगलपुर के नंदा उर्फ माया मल्लाह की मौत हो चुकी है। जबकि बेहमई हत्याकांड में आरोपी भीखा, श्यामबाबू व विश्वनाथ उर्फ पूतानी जमानत पर हैं। आरोपी पोसा अभी भी जेल में बंद है। डकैत विश्वनाथ उर्फ अशोक और रामकेश फरार चल रहे हैं।