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शिवपाल के जरिए थामा साइकिल का हैंडिल,अखिलेश -डिंपल की शादी में पहुंची फूलन

इन दो नेताओं के चलते जेल से संसद पहुंची थी बैर्डिड क्वीन, मुलायम के बेटे अखिलेश व बहू डिंपल को दिया था आर्शीवाद

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शिवपाल के जरिए थामा था साइकिल का हैंडिल,अखिलेश -डिपंल की शादी में पहुंची थीं फूलन

कानपुर। गंगा, यमुना, बीहड़ और चंबल नदी के इलाके में एक घायल शेरनी का कई सालों का तक राज रहा। आसपास के सैकड़ों गांव में जब कोई बच्चा रोता तो उसकी मां कहती बेटा चुप हो जा नहीं थे, डकैत फूलन देवी आ जाएगी। फूलन ने बेहमई गांव में धावा बोला और अपने जानी दुश्मन लालराम और सियाराम को घरं से बाहर आने को कहा। पर वो नहीं आए तो बैंडिड क्वीन ने 21 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। वारदात के बाद सरकार हिल गई तो पुलिस भी खात्में के लिए जंगल में उतर गई। फूलन ने एमपी में सरेंडर किया और जेल से बाहर आने के बाद सियासत में कदम रखा। सपा संरक्षक मुलायम सिंह के भाई शिवपाल से फूलन ने मुलाकात की और उनके जरिए साइकिल का हैंडिल थामा। सपा के चुनाव चिन्ह से सांसद चुनीं गई। भईया शिवपाल के बुलावे पर वो अखिलेश व डिंपल की शादी में शामिल हुई और दोनों को आर्शीवाद के साथ ही सोने की अंगूठी गिफ्ट में दी थी।

शिवपाल यादव को कहती थीं भईया
मुलायम सिंह के परिवार सदस्य बर्रा निवासी सियाराम यादव कहते हैं कि फूलन देवी ने अपनी मजी से नहीं, बल्कि कुछ लोगों के चलते बंदूक उठाई थी। फूलन देवी जब जेल से बाहर आई तो उन्हें भाजपा, बसपा व कांग्रेस ने पार्टी में लाने का प्रयास किया। लेकिन वो मुलायम सिंह को अपना राजनीतिक गुरू मानती थीं। खुद फूलन ने सपा में शामिल होने का ऐलान किया और पूर्व मंत्री शिवपाल यादव ने उन्हं पार्टी की सदस्यता दिलाई। मुलायम सिंह से आर्शीवाद लेकर वो राजनीति में उतरीं और चुनाव जीत कर सांसद बनीं। सियाराम कहते हैं कि वो शिवपाल यादव को अपना भाई मानती थीं और उन्हें राखी भीं बांधती थीं। फूलन देवी जब तक जिंदा रहीं तब तक न्याय के खिलाफ लड़ती रहीं। राजनीति में आने के बाद भी वो वही समपर्ण भाव से गरीब, मजदूर और किसानों की सेवा करती रहीं।

शिवपाल ने जेल से कराया था रिहा
फूलन देवी पूर्व सीएम स्व अर्जुन सिंह के सामने हथियार डाले और 11 साल के बाद उन्हें शिवपाल यादव ने 1994 में जेल से रिहा कराया था। सपा में शामिल होने के बाद मुलायम सिंह ने फूलन देवी को दो साल बाद 1996 में मिर्जापुर से चुनाव लड़ने को कहा। फूलन लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बनी और सीधे दिल्ली पहुंच गई। दो साल तक सांसद रहने के बाद 1998 चुनाव में फूलन देवी को अपनी सीट हारनी पड़ी थी। लेकिन एक साल बाद 1999 में फूलन फिर से चुनाव लड़ीं और भारी मतों से जीतकर मिर्जापुर से सांसद चुनी गईं। 25 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा नाम के एक शख्स ने फूलन को उनके आवास पर गोली मारी दी। जिससे उनकी मौत हो गई।

इस इंसान से फूलन ने किया था प्यार
फूलन का केस लड़ चुके वकील जायसवाल की तीन दिन पहले मौत हो गई। उनके साथी वकील हरेंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि जब वो वकील साहब के पास केस लेकर आई तो उन्होंने जिंदगी के कई किस्से बताए थे। श्रीवास्तव बताते हैं कि डकैत विक्रम मल्लाह फूलन देवी से प्यार करता था। फूलन और विक्रम को पकड़ने के लिए पुलिस जंगल में उतर चुकी थी। दिनभर पुलिस और विरोधियों से बचते हुए फूलन देवी और साथी काफी थक गए थे। जब रात हुई तो फूलन को सुकून मिला, लेकिन आगे होने वाली दहशत से वो अंजान थी। फूलन और विक्रम सो रहे थे, तभी श्रीराम आ धमका। उसने फूलन के प्यार पर ताबडतोड़ फायर का मौत की नींद सुला उसे उठा ले गया। इसके बाद डकैतों ने फूलन के साथ दुष्कर्म किया। किसी तरह से श्रीराम के कैद से फूलन निकलनें में कामयाब हुई और विक्रम के गिरोह की कामन अपने हाथों में थाम कर चंबल की पहली खुंखार महिला डकैत बनीं।

अमर सिंह ने हाथ जोड़कर किया नमस्कार
अखिलेश और डिपंल की शादी करवाने में अहम रोल निभाने वालों में शिवपाल सिंह यादव और अमर सिंह थे। सियाराम यादव बताते हैं कि अखिलेश की शादी के दौरान अमर सिंह ने शिवपाल यादव से कहा था कि उन्हें फूलन देवी से मिलना है और चंबल के किस्से सुनने हैं। तब शिवपाल उन्हें लेकर फूलन देवी के पास गए। अमर सिंह ने हाथ जोड़कर नमस्कार किया और कहा मैडम कैसा होता है बीहड़। इस पर फूलन देवी ने अमर सिंह से हंसते हुए जवाब दिया था कि अध्यक्ष जी एक सप्ताह का समय निकालिए और फिर चलते हैं चंबल व बीहड़ की सुनहरी वादियों में। जहां दूर-दूर तक इंसान नहीं, सिर्फ विकराल जंगल ही जंगल नजर आएगा। सियाराम बताते हैं कि इसके बाद अमर सिंह फूलन देवी के प्रसंसक बन गए।