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कानपुर

45 मिनट तक गंगा की सैर कर प्रधानमंत्री दे गए अर्थ का मंत्र

सीएसए में राष्ट्रीय गंगा परिषद की पहली बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया भाग, गंगा का किया निरीक्षण, मंत्री जावेडकर ने कहा कि अब अर्थ का जरिए बनेगी भागीरथी।

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कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को राष्ट्रीय गंगा परिषद की पहली बैठक के लिए कानपुर पहुंचे। चंद्रशेखर आजाद कृषि एड्ढवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में उन्होंने विकास कार्यों की पूरी जानकारी ली और जीरो बजट खेती, ईको-एडवेंचर टूरिज्म, रिवर फ्रंट बेसिन का विकास और डॉल्फिन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर जोर दिया और यहां से अटलघाट के लिए रवाना हो गए। स्टीमर में सवार होकर करीब 45 मिनट तक गंगा की सैर की और कानपुर के अलावा देश के जिन राज्यों से भागीरथी गुजरती है, वहां के लोगों को अर्थ का मंत्र दे गए।

बनेंगी आय का जरिया
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने बताया कि नमामि गंगे के तहत हुए कार्यों की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने जहां अविरल-निर्मल गंगा के सहारे विकास का खाका खींचा, बल्कि यह भी कहा कि आने वाले दिनों में यह योजना आय का सबसे बड़ा जरिया बनेंगी। मंत्री ने बताया कि नमामि गंगे की धारा अब अर्थ गंगा की ओर मुडने जा रही है। अविरल-निर्मल धारा किसानों और सामान्य जनों को इसी के जरिए रोजगार मिलेगा। मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद जितनी भी सरकारें आई, उन्होंने गंगा के नाम पर पैसा तो खूब दिया, पर जमीन में हालात नहीं बदले।

पीएम के एजेंडे में गंगा
मंत्री जावेडकर ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री की शपथ लेने के बाद उनके एजेंडे में मां गंगा भी थीं। इसी के चलते उन्होंने गांगा के लिए अगल से मंत्रालय बनाया। खुद हरदिन गंगा की स्वच्छता की निगरानी कर रहे थे। इसी का नतीजा है कि अंग्रेजों के जमाने का सीसामऊ नाला अब अस्तित्व में नहीं रहा और अब सेल्फी प्वाइंट बन गया है। मंत्री ने कहा कि मोदी है तो सब मुमकिन है। 2021 के पहले-पहले मां गंगा पूरी तरह से अविरल हो जाएगी। जहां भक्तगण डुबकी लगाएंगे तो युवा, किसान, मजदूर रोजगार पाएंगे।

स्टीमर से परखी गंगा की हकीकत
बतादें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अटलघाट से स्टीमर में सवार हुए है। उनके साथ प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम, बिहार के डिप्टी सीएम भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब 45 मिनट तक गंगा का निरीक्षण किया और फिर सीसामऊ नाला गए। वहां पर उन्होंने कार्य देखकर खुशी जाहिर करते हुए प्रदेश सरकार की पीठ थपथपाई। पहले जहां गंगदी और कूड़े के ढेर लगे हुआ करते थे, वहां पर सेल्फी प्वाइंट देख कर पीएम ने कहा कि अब देश ही नहीं विदेश से लोग इसे देखने के लिए आएंगे, जिससे यहां के लोग अर्थ कमाएंगे।

पर्यटक स्थल की तरफ बढ़ाएं कदम
प्रधानमंत्री ने कहा कि आय का साधन बढ़ाने के लिए गंगा के किनारे फलदार वृक्ष लगाएं, नर्सरी बनाएं। इसमें महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों व पूर्व सैनिक संगठनों को प्राथमिकता दें। गंगा किनारे एडवेंचर स्पोट्र्स, साइकिलिंग, वाकिंग पाथ-वे की व्यवस्था करें। गंगा में जलयान यानी क्रूज टूरिज्म का रोमांच दें। प्रधानमंत्री ने सरकार और जिलाप्रशासन से कहा कि गंगा को हमें पर्यटक स्थल के तौर पर तैयार करना है। जिससे कि जहां लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं गंगा भी अविरल’-निर्मल रहेगी।

कर सकते हैं दान
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने गंगा को साफ करने के लिए क्लीन गंगा फंड बनाया हुआ है। इसमें व्यक्तिगत, एनआरआई, कारपोरेट संस्थाएं योगदान कर सकती हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 2014 से अब तक मिले उपहारों की नीलामी और सियोल शांति पुरस्कार से प्राप्त धनराशि से 16.53 करोड़ रुपये इस फंड में दिए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जो भी व्यक्ति अपनी तरफ से माक्षदायिनी के नाम अर्थ देना चाहता है, वह इसी फंड में राशि जमा करा सकता है।