
इस इंस्पेक्टर ने तोड़ दी थी अंडरवर्ल्ड की कमर
कानपुर। मुम्बई में दयानायक तो कानपुर सब इंस्पेक्टर ऋषिकांत शुक्ला के नाम से अपराधी थर-थर कांपते थे। जिस थाने में इनकी पोस्टिंग होती वहां के अपराधी जेल में होते या तो परलोक सिधार जाते। मजदूरों के शहर में पढ़े-बड़े ऋषिकांत शुक्ला की छवि एक तेज-तर्राक और बेदाग अफसर को रूप में जानी जाती है। माता-पिता मास्टर, कलेक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन ऋषिकांत को बचपन से खाकी से प्यार था और 1997 में उन्होंने पुलिस में नौकरी के लिए फार्म डाला और उनका सिलेक्शन बतौर सबइंस्पेक्टर के पद पर हो गया। अपनी नौकरी की शुरूआती वर्ष ऋषिकांत शुक्ला ने जिले के कई थानों में गुजारे। ऋषिकांत ने तैनाती के दौरान डी-टू गैंग के रफीक और बिल्लू को मुठभेड़ में मार गिराया और इसी के बाद लोग इन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से पुकारने लगे। 18 साल की नौकरी में इन्होंने 22 अपराधियों को अपनी गोली का शिकार बनाया। इनके नाम मंगलवार को एक और हॉफ एनकाउंटर जुड़ गया। शूटर समीर उर्फ हीरो मुठभेड़ के बाद हत्थे लग गया।
बजरंगी के शूटर को किया शूट
एक दशक पहले यूपी में पूर्वान्चल के माफियाओं का डंगा बजता था। उन्होंने वहां से निकल कर कानपुर में अपने कदम रखे। इनके खात्में के लिए तत्कालीन एसएसपी ने ऋषिकांत शुक्ला को जिम्मेदारी दी। माफिया मुन्ना बजरंगी (जेल में हत्या हो चुकी) के शूटर अमित राय को शुक्ला ने महज 24 घंटे के अंदर घेर कर एनकाउंटर में ढेर कर दिया। 2007 में ही चिंटू सिंह को किदवई नगर स्थित संजय वन के पास मुठभेड़ में मार गिराया था। अजय कंजा, तन्नू पासी, राजेश करिया, इरफान चिकना जैसे 22 शातिर को मुठभेड़ में गिराने वाले ऋषिकांत का अपराधियों में हमेशा खौफ रहा। ऋषिकांत शुक्ला 2005 और 2008 से 2009 तक नौबस्ता, कोहना, काकादेव समेत कई थानों के थानाध्यक्ष रहे।
क्राइम ब्रान्च की मिली थी जिम्मेदारी
बेदाग छवि होने के चलते सबइंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर पद पर प्रमोट होने के बाद वह आईजी आलोक सिंह की क्राइम ब्रांच में तैनात रहे। अपने बेहतरीन मुखबिर नेटवर्क के जरिए कई अपराधियों को पकड़ा और कई लूट, डकैती सहित अन्य अपराधों का खूलाशा किया। ऋषिकांत शुक्ला इस वक्त अकबरपुर (कानपुर देहात ) कोतवाली थाना प्रभारी हैं। यहां का पदभार मिलते ही वो अपराधियों के खिलाफ टूट पड़े। मंगलवार की सुबह कमालपुर बंबा के पास उनकी टीम के साथ बदमाशों से मुठभेड़ हो गई। दोनों ओर से कई राउंड गोली चली, जिसमें एक अपराधी के जांघ में गोली लगने से वह घायल होकर गिर गया जबकि उसका साथी फरार हो गया। मुठभेड़ के दौरान एक दरोगा के हाथ में चोट भी आई। पुलिस के हत्थे लगा शातिर शूटर समीर उर्फ हीरो है, जिसके खिलाफ ढाई दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं।
28 मुकदमे हैं दर्ज
कानपुर देहात के बारा गांव निवासी मुठभेड़ में घायल शमीम उर्फ हीरो के खिलाफ अकबरपुर कोतवाली में 28 मुकदमे दर्ज हैं। अपराध की दुनियां में कदम रखने के बाद 1992 में बलवा आदि विभिन्न धाराओं में उस पर पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद उस पर मुकदमे दर्ज होने का सिलसिला शुरू हो गया। 1995 में गोवध निवारण अधिनियम, हत्या का प्रयास, 1996 में घर में घुसकर मारपीट जान से मारने की धमकी देना, गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी। इसके बाद 1997 से 2018 तक उस पर विभिन्न अपराधों के 28 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2014 में उसने तत्कालीन बारा चौकी प्रभारी रामस्वरूप वर्मा व पुलिस कर्मियों को दिनदहाड़े मारपीट कर घायल कर दिया था और गिरफ्तार हिस्ट्रीशीटर परवेज को पुलिस से छुड़ाकर फरार हो गया था। शुक्ला ने ने बताया कि शमीम ए क्लास का हिस्ट्रीशीटर व टॉपटेन अपराधियों की सूची में शामिल है और गोकशी के मामलों में भी लिप्त है।
Published on:
26 Dec 2018 03:58 pm
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