
कानपुर। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके चलते कानुपर से लखनऊ और दिल्ली तक सियासत गर्म है। 84 वें महाधिवेशन के दौरान कांग्रेसियों को खबर लग गई थी कि राजबब्बर का जाना तय है और मजूदरों के शहर के नेता को प्रदेश की बागडोर मिल सकती है। ऐसे में शहर से आईपीएल के चेयरमैप व दिग्गज नेता राजीव शुक्ला को सूबे की कुर्सी सौंपी जा सकती है। राजीव शुक्ला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी के करीबी बताए जाते हैं और श्रीप्रकाश जायसवाल इनके समर्थकों में से एक हैं। तो अजय कपूर भी इन्हें अपना बड़ा भाई बताते हैं। कांग्रेस नगर अध्यक्ष हरिप्रकाश अग्निहोत्री ने बताया कि अभी कौन प्रदेश अध्यक्ष होगा, हमारी जानकारी में नही है। हां अगर हमारे घर के नेता राजीव शुक्ला को पद मिलता है तो बहुत खुशी की बात होगी और उनके नेतृत्व में पार्टी शहर व देहात में जीत दर्ज करेगी। बतादें । राहुल गांधी ने महाधिवेशन में कांग्रेस अंदर युवाओं को मौका दिए जाने की बात कही थी और इसी के बाद से कांग्रेस के कई नेताओं ने अपने इस्तीफे देने शुरू कर दिए।
कांग्रेसियों का आस, कानपुर को मिल सकती है कामन
कानपुर से न तो कोई सीधा कनेक्शन है और न ही उनका राजनीतिक क्षेत्र। फिर न जाने क्यों काग्रेस अध्यक्ष राहुल गाधी कानपुर से खासे प्रभावित हैं। इसकी वजह यहा का एतिहासिक महत्व या औद्योगिक प्रभाव नहीं है, बल्कि वह मानते हैं कि कानपुर का काग्रेस संगठन अन्य जिलों की तुलना में काफी बेहतर काम कर रहा है। राहुल गाधी के दिल की यह बात गत दिवस दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान सामने आई। अधिवेशन से लौटे कार्यकर्ता अब रह-रहकर अपने शीर्ष नेता की वही बात दोहराए जा रहे हैं, जिसने दिल्ली के वृहद समागम में उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी थी। महाधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने कानपुर के कार्यकर्ताओं के साथ यहां के लोगों के बारे में प्रसंसा की थी। इसी के बाद से कांग्रेसी मानने लगे हैं कि कांग्रेस पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष कानपुर से ही होगा। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ब्राम्हण चेहरे राजीव शुक्ला के नाम पर मुहर लगा सकती है। कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने यहां तक कह दिया कि राजीव शुक्ला का नाम लगभग-लगभग फाइनल है और एक-दो दिन में इसकी घोषणा हो जाएगी।
इस लिए मिल सकती है कुर्सी
आपातकाल के दौरान कांग्रेस की हालत बहुत खराब हो गई थी। 1980 का लोकसभा चुनाव सिर पर था। कानपुर के कई नेता इंदिरा गांधी से मिलने दिल्ली गए और कानपुर से चुनाव का आगाज करने को कहा। इंदिरा ने कांग्रेस के नेताओं की बात मान ली और फलूबाग में 1977 को इदिरा गांधी दहाड़ी। पूरा मैदान खचाखच भरा था तो पेड़ों की टहनियों में लोग पूर्व पीएम के भाषण को सुन रहे थे। मजूदरों के शहर में इंदिरा गांधी का जाद चड़ा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आ गई। इसके बाद लोकसभा चुनाव जब भी आए तो राजनीतिक दलों के नेताओं ने चुनाव का अगाज कानपुर से किया। पूर्व पीएम अटल बिहारी से लेकर नरेंद्र मोदी ने शंखदान रैली का चुनावी सभा की और कानपुर नगर व देहात में भगवा रंग खिला।
छह लाख ब्राम्हण मतदाता
कंग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के दावेदार राजीव शुक्ला के पक्ष में कई पक्ष है। वह कद्दावर ब्राम्हण चेहरा है। कानपुर में करीब छह लाख ब्राम्हण मतदाता है। निकाय चुनाव में ब्राम्हणा वोटर्स बड़ी संख्या में कांग्रेस के पक्ष में वोट दिया। मेयर उम्मीदवार बंदना मिश्रा ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी। साथ ही कांग्रेस के शहर से 17 पार्षद जीते तो 25 दनविजेता रहे। जबकि सपा व बसपा का हाल बहुत खरा रही। कांग्रेसियों के नेताओं का कहना है कि अगर पूर्व विधायक भीतरघात नहीं करते तो मेयर की कुर्सी कांग्रेस के पास होती।
राहुल गांधी को भाए कानपुर के कांग्रेसी
अधिवेशन को संबोधित करते वक्त राहुल ने कहा था कि कानपुर, मुरादाबाद और लखनऊ में हमारा संगठन बहुत अच्छा काम कर रहा है। अब जो भी हो, राष्ट्रीय अध्यक्ष की इस बात ने थके-मादे कार्यकर्ताओं के लिए घुट्टी का काम किया है। उसी से हौसला लेकर अब वह लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए दिल से मेहनत करने को तैयार नजर आ रहे हैं। महानगर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री कहते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह बात कह कर हमारी मेहनत का पुरस्कार दे दिया। अब हम पार्टी के लिए दोगुनी मेहनत से लगेंगे। अगर कानपुर के नेता को प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर मिलती है तो हमारे लिए सोने पर सुहागा होगा।
काग्रेस का पुरान गढ़ रहा कानपुर
राहुल गाधी का यहां भले ही वह जुड़ाव न रहा हो, लेकिन कांग्रेस के लिए कानपुर पुराना गढ़ है। कानपुर महानगर के पार्टी कार्यालय तिलक हॉल का शिलान्यास महात्मा गाधी ने किया था। मोतीलाल नेहरू ने यहां वकालत की। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी, राजीव गाधी का भी यहा काफी आना-जाना रहा। यही नहीं, स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाने के लिए जब तक काग्रेस की सत्ता प्रदेश में रही तो लखनऊ में झडारोहण के बाद मुख्यमंत्री सीधे कानपुर आकर झडारोहण करते थे। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजराम पाल ने बताया कि पार्टी कानपुर से अक्स्र जीतती रही है और हमारा संगठन भाजपा से बड़ा है। रही बात प्रदेश अध्यक्ष की तो यह हाईकमान को तय करना है। कानपुर के नेता को यदि मिलती है तो पार्टी यूपी की 80 में 50 सीटों पर फतह करेगी।
Published on:
21 Mar 2018 01:37 pm
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