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कानपुर भाजपा की सुरक्षित सीट में शुमार , राजनाथ यहां से भर सकते चुनावी हुंकार

राजनाथ सिंह के कानपुर दौरे से सियासत गर्म, ब्राम्हण चेहरे को टिकट दे सकती है कांग्रेस

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राजनाथ सिंह के कानपुर दौरे से सियासत गर्म, ब्राम्हण चेहरे को टिकट दे सकती है कांग्रेस

कानपुर। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले राजनाथ सिंह कानपुर आए थे और अपने धार्मिक गुरू के आश्रृम में जाकर आर्शीवाद लिया था। गुरू के कहने पर उन्होंने लखनऊ से चुनाव लड़ा और फहत हासिल की। 2019 के मिशन के तहत राजनाथ सिंह शुक्रवार को श्यामनगर स्थित हरिहरनाथधाम आश्रम में अपने गुरु संतोष दुबे से जाकर मिले। तकरीबन ढाई घंटे तक उन्होंने गुरु से अकेले में बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आश्रृम के अंदर विधि-विधान से पूजा अर्चना के बाद जब बाहर आए तो माथे पर सफेद रंग का तिलक लगा हुआ था। गुरू से मिलने के बाद वह भाजपा कार्यकर्ताओं से मिले और उनकी नब्ज टटोली। कानपुर-बुंदलेखंड के अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह से अकेले में बातचीत की और यहां के सियासी समीरकण के बारे में उनके साथ चर्चा की। इस मुलाकात के बाद सियासत गर्म हो गई है और जन आक्रोश रैली में भाग लेने के लिए दिल्ली गए कांग्रेसी नेताओं ने अगल-अगल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर नए समीकरण पर मंथन किया।
7 विधायक, 56 पार्षद
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद कानपुर भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित सीटों में गिनी जाती है। क्योंकि 2017 विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा ने 10 में से 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी। निकाय में जीत का सिलसिला बरकरार रहा और मेयर समेत 56 पार्षद आजादी के बाद कानपुर से किसी दल के जीते। इसी के चलते कहा जाता है कि इस सीट जो भी कमल के सिंबल से चुनाव लड़ेगा वह आराम से जीत जाएगा। 2019 की चुनावी आहट के चलते गृहमंत्री चार साल के बाद अपने गुरू से मिलने के लिए कानपुर पहुंचे और ढाई घंटे तक उनके साथ चर्चा की। इसके बाद भाजपा नेताओं के साथ चुनाव को लेकर मंथन किया। खुद भाजपाई यह मानकर चल रहे हैं कि आगामी चुनाव में नगर सीट से राजनाथ सिंह हुंकार भर सकते हैं। भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी ने कहा कि वैसे गृहमंत्री अपने गुरू से मिलने के लिए आए थे। इसमें सियासत जैसे कोई बात नहीं है। अभी कानपुर से मुरली मनोहर जोशी सांसद हैं। हां अगर गृहमंत्री राजनाथ सिंह कानपुर से चुनाव लड़ते हैं तो कार्यकर्ता उन्हें भारी मतों से जिताकर संसद भेजेंगे।
ब्राम्हण मतदाता जीत-हार करते हैं तय
कानपुर नगर सीट में करीब छह लाख ब्राम्हण मतदाता हैं जो जीत हार तय करते हैं। राममंदिर आंदोलन के दौरान कानपुर में कमल खिला। लेकिन 2004 से लेकर 2014 तक कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल ने भाजपा से यह सीट जीत ली। गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी को बतौर पीएम कैंडीडेठ घोषित करने के बाद भाजपा ने कानपुर नगर से डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी को चुनाव के मैदान में उतारा। जिसका परिणाम रहा कि जमीनी नेता होने के बावजूद श्रीप्रकाश को करारी हार उठानी पड़ी। इसके बाद नगर सीट पर पूरी तरह से भाजपा का कब्जा हो गया। जानकारों का मानना है कि यदि राजनाथ सिंह कानपुर से लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो कांग्रेस किसी ब्राम्हण चेहरे को टिकट दे सकती है। क्योंकि मेयर पद पर चुनाव लड़र बंदना मिश्रा ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी और अच्छा-खास वोट ब्राम्हणों का अपने पाले में लाने में कामयाब रही थीं। चर्चा चल रही है कि खुद श्रीप्रकाश जायसवाल आलोक मिश्रा के नाम को आगे कर सकते हैं और मुस्लिम, दलित, ब्राम्हण के साथ वैश्य वोट कांग्रेस को मिल सकता है।
2013 में मिलने के लिए आए थे राजनाथ
लोकसभा चुनाव 2014 से पहले राजनाथ सिंह अपने गुरू से मिलने के लिए कानपुर आए थे। उस वक्त उन्होंने तीन घंटे से ज्यादा तक आश्रृम के अंदर रूके थे। बताया जाता है कि गुरू जी ने पूजा-अर्चना के बाद उन्हें लखनऊ से चुनाव लड़ने की सलाह दी थी। राजनाथ सिंह लखनऊ लोकसभा सीट से उतरे और भारी मतों से जीते। 2019 से पहले एक बार फिर राजनाथ सिंह कानपुर आए और अपने गुरू से मुलाकात की। आश्रृम के अंदर पूजा-पाठ का दौर चला और सियायी भविष्य के बारे में उन्होंने अपने गुरू के साथ चर्चा की। जानकारों की मानें तो राजनाथ सिंह को कानपुर से चुनाव लड़ने की सलाह उनके गुरू ने दी है। राजनाथ सिंह के गुरू को किसी ने आज तक नहीं देखा। उनके बारे में कहा जाता है कि रात के वक्त वह कभी-कभार आश्रृम से निकलते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि गुरू जी की उम्र 92 साल के आसपास है।
बदल जाएंगे समीकरण
राजनाथ सिंह के कानपुर से चुनाव लड़ने से विपक्ष के सारे समीकरण बिगड़ जाएंगे। सबसे ज्यादा समस्या पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश जासवाल को उठानी पड़ सकती है। राजनाथ क्षत्रीय होने के चलते कांग्रेस यहां से ब्राम्हण को टिकट दे सकती है। ऐसी हालत में पूर्व मंत्री का टिकट कटने की संभावना बड़ जाएगी। हलांकि पूर्व मंत्री ने कुछ दिन पहले साफ शब्दों में ऐलान किसा था कि वह 2019 का चुनाव लड़ेंगे। पर राजनाथ सिंह के आने से पूर्व मंत्री को अपने पैर पीछे खीचने पड़ सकते हैं। सपा और बसपा भी भाजपा पर नजर बनाए हुए है और गठबंधन होने की दशा में यहां से समाजवादी पार्टी भी अपना उम्मीदवार उतार सकती है। अगर राजनाथ सिंह कानपुर से चुनाव लड़े तो सपा इन्हें हराने के लिए पूर्व एमएलसी लाल सिंह तोमर को टिकट दे सकती है।