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कानपुर. नौबस्ता थानाक्षेत्र के पशुपतिनगर स्थित यूनियन बैंक की लूट का पुलिस ने रविवार को खुलासा कर दिया। पुलिस ने कानपुर, कन्नौज, झारखंड और बांग्लादेश बार्डर से पांच के साथ ही कुल ग्यारह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं, जो गैंग के साथ वारदात को अंजाम देती थी। आईजी क्राइम ब्रान्च समेत सात टीमें आरोपियों को पकड़ने के लिए पिछले चौदह दिन से लगी थी। सटीक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कन्नौज के शातिर अपराधी सत्येंद्र को उठाया और उसकी निशानदेही पर करीब तीन किलो सोना और नकदी बरामद की थी। पूछताछ के दौरान आरोपी ने गैंग के अन्य सदस्यों के नाम उजागर किए। पुलिस ने बांग्लादेश सीमा के पास से सरगना को धरदबोचा। उसके पास से लूट का माल बरामद किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 किलो हीरे के जेवरात , 20 किलो चांदी के आभूषणों समेत 4 लाख नकदी बरामद की है।
डॉक्टर ने दी थी शरण
कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र के यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच में बीती 18 फरवरी को लॉकर काट कर हुई करोड़ों की चोरी हुई थी। जिसमें पुलिस ने अंतर्राष्ट्रीय गैंग के सरगना सहित ग्यारह बदमाशों को गिरफ्तार किया। पुलिस लाइन में कानपुर के इतिहास की सबसे बड़ी चोरी का खुलासा करते हुए आईजी जोन आलोक कुमार ने बताया कि गिरफ्तार 11 आरोपियों में 2 महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा दो अन्य लोग अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
जिला क्राइम ब्रांच समेत पुलिस की 7 टीमों ने रात दिन एक करके बांग्लादेश के करीब से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने कानपुर में एक नर्सिंग होम संचालक के डॉक्टर को भी गिरफ्तार किया जो इस गैंग को संरक्षण देता था। आईजी ने बताया कि यह गैंग कई महीनो से इस वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। गैंग के सभी सदस्य एक माह पहले कानपुर पहुंचे और उन्हें डॉक्टर ने शरण दी।
बैंकों की करते रहे रेकी
आईजी जोन ने बताया कि कन्नौज निवासी सत्येंद्र अपनी बुआ कल्याणपुर निवासी के घर पर आया जाया करता था। उसकी दोस्ती अपने बुआ के लड़के गुड्डन यादव से हो गई थी। सत्येंद्र एक शातिर अपराधी है और जाली नोट के कारोबार में जेल भी जा चुका है। उसने अपने बुआ के लड़के साथ बैंक लॉकर को लूटने का प्लॉन बनाया। पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए सत्येंद्र ने झारखंड से अपने तीन साथियों को बुलाया। पांचों लोगों ने पूरी रणनीति के तहत घटना को अंजाम देने के लिए पांच अन्य साथियों को बुलवाया। सभी ने मिलकर 17 की रात को वारदात को अंजाम दिया। आईजी ने बताया कि बदमाश खिड़की को गैस कटर की सहायता से काटकर अंदर घुसे हैं और अंदर के सीसीटीवी तोड़ दिए थे। गैस कटर की सहायता से स्ट्रॉन्ग रूम में रखे लॉकरों को काटा गया था।
पेशेवर तरीके से घटना को दिया अंजाम
आईजी ने बताया, बैंक में कुल 225 लॉकर्स हैं, जिनमें से 32 लॉकर्स को डैमेज किया गया था। आईजी के मुताबिक झारखंड से पकड़े गए शातिर बोकारों एसबीआई दिल्ली और छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रदेशों की बैंकों में लॉकर काटकर चोरी की वरदातों को अंजाम देते रहे हैं। इनका साथ बांग्लादेश के सीमा पर रहने वाला शातिर अपराधी देता था। शातिरों ने एक माह तक शहर में बैंकों की रेकी की और पशुपति नगर स्थित यूनियन बैंक को वारदात के लिए चुना। आरोपियों ने घटना को पेशेवर तरीके से अंजाम दिया। पुलिस ने कानपुर के इतिहास की सबसे बड़ी लूट के आरोप में ग्यारह आरोपियों को अरेस्ट कर 80 फीसदी माल बरामदगी का दावा किया है।
पीड़ितों ने कहा महज कुछ फीसदी माल बरामद
कानपुर पुलिस द्वारा चोरी के माल की 80 प्रतिशत बरामदगी पर पीड़ित लोगों ने सवाल खड़ा कर दिया। पुलिस खुलासे के दौरान वो लोग भी पहुंचे जिनका बैंक में लॉकर था और उनका सोना चांदी चोरी हो गया था। पीड़ित लोगों ने पुलिसिया कार्रवाई को गलत ठहराया और असंतुष्ट होकर कहा कि पुलिस के दावे खोखले है और बरामदगी केवल 25 प्रतिशत है। जो दो लोग अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है उनकी भी गिरफ्तारी जल्द होनी चाहिए और उनसें भी बरामदगी होनी चाहिए। पीड़ित सुशील कुमार ने बताया कि बहन की शादी के लिए पिता ने जेवरात बनवाए थे और उन्हें लॉकर में रखवाया था। लेकिन आरोपियों ने पूरे जेवरात पार कर ले गए। पुलिस ने जो माल बरामद किया है, वह महज कुछ हिस्सा है।
Updated on:
04 Mar 2018 05:37 pm
Published on:
04 Mar 2018 03:50 pm

