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पहली बार मशीन गन का इतना बड़ा आर्डर पाकर एसएएफ में जबरदस्त उत्साह

तीन साल में सेना को देनी हैं तीन हजार मशीन गन जल्द आर्डर पूरा करने की कोशिश में लघु शस्त्र निर्माणी

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SAF gets machine gun orders

पहली बार मशीन गन का इतना बड़ा आर्डर पाकर एसएएफ में जबरदस्त उत्साह

कानपुर। शहर में निगमीकरण की चर्चा के चलते निराशा से घिरे आयुध निर्माणी कर्मचारियों को सेना से मिले एक बड़े आर्डर ने खुश कर दिया है। खुशी इस बात की है कि पहली बार कानपुर की एसएएफ को इतना बड़ा आर्डर मिला है। सेना ने लघु शस्त्र निर्माणी को तीन हजार से ज्यादा मशीन गन निर्माण का आर्डर दिया है। कई सौ करोड़ का आर्डर मिलने से कर्मचारियों को ओवरटाइम का भी लाभ मिलेगा। दूसरी ओर तमाम औद्योगिक इकाइयों को उपकरणों के आर्डर मिलेंगे। जिससे उनकी रुकी हुई अर्थव्यवस्था फिर से दौड़ पड़ेगी।

मुख्य उत्पाद का सबसे बड़ा आर्डर
कानपुर की लघु शस्त्र निर्माणी (एसएएफ) का मुख्य उत्पाद मशीन गन ही है। अभी तक सेना की तरफ से एसएएफ को तीन या चार सौ तक मशीन गन का ही आर्डर मिलता आया है। पहली बार सेना ने तीन हजार से अधिक मशीन गन का आर्डर दिया है। इतने बड़े पैमाने पर आर्डर मिलने से निर्माणी में खुशी की लहर है। निर्माणी के सूत्रों ने बताया कि इसी सप्ताह बोर्ड की ओर से मशीन गन के बल्क निर्माण का आर्डर मिला है। यह आर्डर तीन साल में पूरा करके देना है। सेना इससे भी जल्द आर्डर चाहती है।

यह है इसकी खासियत
भारतीय सेना में बड़े पैमाने पर इस्तूेमाल की जाने वाली मशीन गन (एमएजी) में कई खासियत हैं। इसकी मारक क्षमता १८०० मीटर तक है। 7.62 एमएम कैलिबर और 1255 एमएम लेंथ के साथ महज ११ किलोग्राम वजन वाली यह मशीन गन प्रति मिनट में ६५० से १००० राउंड तक फायर कर सकती है। इन्हीं खास खूबियों के चलते यह शस्त्र भारतीय सेना का प्रमुख हिस्सा है।

२०२२ तक का समय
एसएएफ के मुताबिक 2021-22 तक आर्डर पूरा होने की संभावना है। इस साल ही एक हजार मशीन गन देने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसमें लगने वाले कंपोनेंट आदि की खरीद की प्रक्रिया पर कार्य शुरू हो गया है। सूत्रों ने बताया कि बुधवार को संयुक्त परामर्शदात्री लघु शस्त्र निर्माणी की बैठक हुई थी। इसमें महाप्रबंधक संजय कुमार पटनायक, अपर महाप्रबंधक तुषार त्रिपाठी, विशेष सलाहकार उपश्रमायुक्त (केंद्रीय) एसके राय के अलावा प्रतिरक्षा कर्मचारी छबिलाल यादव, केके तिवारी, जितेंद्र मोहन, संतोष यादव आदि शामिल हुए थे। यहां निर्माणी को बल्क में मिले आर्डर की जानकारी दी गई थी। इसके बाद आर्डर को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की रूपरेखा तय की गई।