
अकाली दल ने माना मोसूल की घटना में हुई चूक, कांग्रेस को ऐसे मामलों में नहीं करनी चाहिए सियासत
कानपुर. संसद में जिस वक्त विदेशमंत्री ने ईराक के मोसूल शहर से अगवा 39 भारतीयों के मारे जाने की जानकारी दी, वैसे दिल्ली से लेकर कानपुर में सियासत गर्म हो गई। 1984 सिख दंगा पीड़ित राहत कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के अकाली दल (बादल गुट) प्रभारी सरदार कुलदीप सिंह भोगल ने इराक के शहर मेसूल में मारे गए भारतीय के प्रति शोक प्रकट करते हुए कहा कि चार साल पहले उन्हें आईएस के आंतकियों ने मौत के घाट उतार दिया, लेकिन केंद्र सरकार कहती रही कि सभी जिंदा है। कुछ हद तक कहा जा सकता है कि विदेश मंत्रायल की इसमें चूक रही है। अगर इसकी पहले जांच करा ली जाती तो विपक्ष को आरोप लगाने का मौका नहीं मिलता। फिर भी ऐसे जटिल मुद्दे पर कांग्रेस को सियासत नहीं करनी चाहिए। राजनीतिक बयानों के चलते मृतकों के परिजनों को चोट पहुंचती है। कुलदीप सिंह भोगल ने सिख दंगों में मारे गए पीड़ितों को न्याय नहीं मिलने से नाराजगी जताई और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो साथ हैं लेकिन मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी 84 दंगे की स्टेटस रिपोर्ट में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
मोसूल से लेकर दंगा पीड़ितों पर बोले भोगल
1984 सिख दंगा पीड़ित राहत कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश के अकाली दल (बादल गुट) प्रभारी सरदार कुलदीप सिंह भोगल मंगलवार को कानपुर पहुंचे और गुमटी गुरूद्धारे में दंगा पीड़ित परिवारों से मिले। इस मौके पर उन्होंने इराक के मेसूल शहर में मारे गए पंजाब सहित अन्य राज्यों के लोगों के प्रति शोक संवदेना व्यक्त की और कहा कि 39 भारतीयों के मारे जाने की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। विदेश मंत्री अक्सर कहती थीं कि वह जिंदा हैं और उन्हें जल्द भारत लाया जाएगा। लेकिन आज उन्होंने संसद में बयान देकर 39 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी। कुलदीप सिंह भोगल ने कहा कि कुछ हद तक विदेश मंत्रायल की इसमी चूक नजर आती है। कहा, एक भारतीय आंतकियों के चंगुल से बचकर भारत आया था और उसने 39 लोगों के मारे जाने की जानकारी दी थी। यदि उसकी बात पर विश्वास विदेश मंत्रायल ने कर लिया होता तो विरोधियों के आरोपों से बचा जा सकता था। उन्होंने कांग्रेस को हिदायद देते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर सियासत नहीं करनी चाहिए। पर कांग्रेस हर मुद्दे को राजनीति करने लगते हैं।
विधानसभा का करेंगे घेराव
कुलदीप सिंह भोगल ने कहा कि दंगों के दौरान कानपुर के कई लोगों को मौत के घाट उतारा गया थ। पिछले 33 साल से दंगा पीड़ित न्याय की आस में कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा रहे हैं। कहा, 33 वर्ष बाद भी यह हाल होने पर अब 33 दंगा पीड़ित विधानसभा का घेराव करेंगे। वे अपने मुंह पर काली पट्टी बांधेंगे। यह भी कहा कि वह प्रदेश में भाजपा से अपनी हिस्सेदारी मांगेंगे। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट लगाई लेकिन उत्तर प्रदेश की सरकार ने अब तक ऐसा नहीं किया। इसका विरोध हम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि रॉबर्टगंज और सहारनपुर की घटनाएं अल्पसंख्यकों का अपमान हैं। अकाली दल सभी अल्पसंख्यकों के साथ है और उनके लिए संघर्ष करेगी। सरदार भोगल ने कहा कि वह अल्पसंख्यक संस्थानों और अस्पताल आदि के बारे में जो भी शिकायतें आएंगी उनका हल निकालने का प्रयास करेंगे।
127 लोगों की हुई थी हत्या
सिख दंगे के दौरान दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा हत्याएं कानुपर में हुई थीं। दंगाइयों ने 127 लोगों को मार दिया था। सरदार कुलदीप सिंह भोगल बताया 33 वर्ष पहले कानपुर में हुए दंगों में जिनकी मौतें हुई थीं उनमें किसी को भी न्याय नहीं मिल सका। जो भी प्राथमिकी दर्ज कराई गईं उसमें पुलिस ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। सभी में अन्तिम रिपोर्ट लगा दी। न तो किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही किसी के खिलाफ मुकदमा चल सका। इसी के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है, जो पीड़ितों के लिए मलहम का काम करेगा। कानपुर में पहली घटना घटना 31 अक्टूबर 1984 को हुई थी। जिसमें सरकार ने जांच के लिए एक आयोग का गठन किया था। आयोग की जांच के बाद शहर में 127 लोगों की हत्या की बात सामने आई थी। वहीं अगर सिख संगठनों के दावों की बात करें तो 300 से अधिक सिखों का कत्लेआम किया गया था। दंगाईयों ने करीब 4200 घरों और दुकानों में अगा लगाई, जिसके चलते 1300 से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे।
Published on:
21 Mar 2018 02:23 pm

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