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कमल का हुआ विकास पर जनता बेहाल, खम्भे के पुल से गिर कर बच्चे की मौत

24 साल पहले नोन नदी में पुल निर्माण के लिए आवंटित हुई थी रकम, पर भ्रष्ट सरकारी बाबुओं के चलते हुई गुम, ग्रामीणों ने हाथ से बनाया पुल, बांट रहा मौत

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school child died after falling from Bridge of the river in kanpur

कमल का हुआ विकास पर जनता बेहाल, खम्भे के पुल से गिर कर बच्चे की मौत

कानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच साल पहले कानपुर से शंखदान रैली कर देश, प्रदेश व कानपुर की दिशा व दशा सुधारने का वादा किया था। जनता ने कमल के लिए जमकर वोट करे और लखनऊ से लेकर नगर पालिकायों में बीजेपी की सरकार बनवा दी। साढ़े चार का पीएम मोदी और एक साल से ज्यादा का कार्याकल सीएम योगी ने पूरा कर लिया पर शहर की सेहत और शूरत जस की तस बनी हुई हैं। सरकार व प्रशासन की उपेक्षा के चलते सजेती थानाक्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा हो गया। घर से स्कूल जा रहे एक नौनिहाल की नदी पर बनें खम्भे के पुल से गिरकर मौत हो गई। सूचना पर पुलिस पहुंची और शव को नदी से बाहर निकास पोस्टमार्टम के लिए भेज इतिश्री कर ली। ग्रामीणों का कहना है कि हमलोग पिछले 24 साल से इस पुल के निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। खुद पीएमओ के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा स्थानीय सांसद व विधायक को पत्र लिखकर इसकी जानकारी भी दे चुके हैं। बावजूद किसी के कानों में अभी तक जूं नहीं रेंगी।

स्कूल जा रहे बच्चे की गिर कर मौत
सजेती थाना क्षेत्र स्थित कोहरा गांव से होकर नोन नदी बहती है। इस गांव के आसपास दर्जनों गांव और मजरे हैं। इस नदी को पार करने के लिए एक पुल है जिसकी दूरी लगभग 25 किलोमीटर और दूसरा पुल बना है जिसकी दूरी 15 किलोमीटर है। इस स्थिति ग्रामीणों ने नदी पार करने के लिए सीमेंट के बिजली के तीन खम्भों को रख कर एक अस्थाई पुल बना लिया और इसी पुल के सहारे दर्जनों गांव के लोग निकलते हैं। लेकिन बरसात में बिजली के खम्भों का बना पुल पानी में डूब जाता है। जिसकी वजह से दर्जनों गांव का संपर्क कानपुर से कट जाते है। इसी का खामियजा एक मासूम बच्चे को । भुगतना पड़ा। सातवीं क्लास में पढने वाला बच्चा निखिल शनिवार स्कूल जा रहा था। जैसे ही वो पुल पर नदी पार करने के लिए आगे बढ़ा उसका पैर फिसल गया और वो नदी में समां गया। इसकी भनक ग्रामीणों को लगी तो उसकी तलाश शुरू की। निखिल का शव आधा किलो मीटर की दूरी पर झाड़ियों में फंसा मिला मिला।

तहसीलदार को देख बहन ने पकड़ा पैर
ग्रामीणों की सूचना पर तहसीलदार अविनाश कुमार पुलिस के साथ पहुंचे और मृतक परिवार को मुआवजा दिलाए जाने की बात कही। इसी दौरान मृतक की बहन अविनाश कुमार के पैरों को पकड़ लिया और कहा कि आपके चलते मेरे इकलौते भाई की जान गई है। आप जैसे दर्जनों अधिकारी किसी की मौत के बाद मुआवजा देने की बात कर हमारा मुंह बंद करा देते हैं। आप मुझे मेरा निखिल लाकर दें, जिससे की मैं उसे राखी बांध सकूं। यह मंजर देख ग्रामीण भी खासे नाराज होकर और हंगामा करने लगे। तहसीलदार ने मौके की नजाकत को देखते हुए कहा कि पहले के अधिकारियों ने आपकी बात नहीं सुनी, पर मैं अगले माह तक इस पुल को स्वमं आकर निर्माण करवाऊंगा। तब कहीं जाकर लोग शांत हुए। तहसीलदार मुताबिक ग्रामीण एक अस्थायी पुल से निकलते है। यहां के लिए एक पुल पास है मै अभी अपने अधिकारियो को इस बात से अवगत करूंगा ताकि जल्द पुल का निर्माण हो सके। इस अस्थायी पुल से निकल रहे बच्चे का पैर फिसला है जिसकी वजह से उसकी नदी में डूब कर मौत हो गयी है।

--तो संवर जाएगी जिंदगी
बच्चे के पिता राघवेन्द्र के मुताबिक बेटा स्कूल जा रहा था वो कह रहा था पापा कल रात बरसात हुई यदि पुल नदी में डूब गया होगा तो वापस लौट आऊंगा। लेकिन बेटा पढना चाहता था और वो पुल पार करने लगा और उसका पैर फिसल गया। ग्रामीण भानु सिंह के मुताबिक इस पुल पर आए दिन लोग गिरते हैं। यह अस्थायी पुल है और बहुत सकरा है। हमारे गांव के एक तरफ रेलवे क्रासिंग निकली है और दूसरी तरफ नोन नदी। जिसकी वजह से हम लोग एक तरफ से दूसरी तरफ नहीं जा पाते हैं। गांव के लिए एक पुल पास हुआ था लेकिन वो आज दिन तक नही बन पाया है। जिसकी वजह से हमारे गांव का विकास भी ठप पड़ा है। पुल बन जाए तो हमारे गांव को नया जीवन मिल जायेगा और सभी की जिन्दगी संवर जाएगी ।

1994 में पास हुआ था पुल
ग्रामीणो ने बताया इस गांव के लिए सन 1994 में पुल पास हुआ था लेकिन जिला प्रशासन की उदासीनता की वजह से आज दिन तक पुल का निर्माण नहीं हो सका। भानु सिंह कहते हैं कि पीएम, सीएम, सांसद और विधायको से लेकर डीएम और एसडीएम के आफिस के दर्जनो बार चक्कर काट चुके हैं, लेकिन किसी ने सुधि नहीं ली। कई सरकारों के सांसद और विधायक आये और चले गए ,लेकिन हमारी फरियाद किसी ने नहीं सुनी। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पुल के निर्माण कराए जाने की मांग की जा चुकी है, पर वहां से कोई जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुल नदी में डूब जाता है तो बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। साथ ही ग्रामीण व्यापर के लिए बाजारों तक नही पहुच पाते हैं।यदि कोई बीमार होता है तो इलाज के आभाव में वो रास्ते में ही दम तोड़ देता है।