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इस मंदिर में छिपे है करोड़ों के खजाने, रखवाली करते हैं नाग

घाटमपुर तहसील के गांव करेली में बने शिव मंदिर के नीचे रखे खजाने की रखवाली दो नाग करते हैं। खजाने की चोरी करने के लिए कई बार शातिरों ने प्रयास किया

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Ruchi Sharma

Sep 05, 2016

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कानपुर. घाटमपुर तहसील के गांव करेली में बने शिव मंदिर के नीचे रखे खजाने की रखवाली दो नाग करते हैं। खजाने की चोरी करने के लिए कई बार शातिरों ने प्रयास किया, लेकिन हर बार उन्हें मायूसी ही हाथ लगी। सोमवार की रात खजाने की चोरी करने के लिए चोरों ने पांच फिट गहरी सुरंग खोद डाली और जैसे ही खजाने के पास वह पहुंचे दो नागों की फुंकार से वह डर गए और वहां से भाग खड़े हुए। सुबह पुजारी मंदिर पहंचा तो सुरंग देखकर उसके होश फख्ता हो गए। पुजारी की सूचना पर घाटमपुर पुलिस मौके पर पहुंची और सुरंग को मिट्टी से पुरवाया और पुजारी की तहरीर पर शातिरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

करेली के राजा ने छिपाया था खजाना

करेली निवासी अशोक कुमार (88) ने बताया कि अंग्रजों ने भारत को आजाद करने की जैसे ही घोषणा की वैसे ही कानपुर से सटे घाटमपुर में गोरों की फौज ने यहां के राजाओं और लम्मबरदारों के यहां लूटपाट शुरू कर दी। गोरों ने कई राजाओं को बंधक बना लिया और उनके सारे ज्वेरात लूट लिए। गोरों की फौज करेली गांव के राजा कुंवर बहादुर सिंह के महल की ओर कूच किया तो राजा ने सारा खजाना मंदिर के नीचे छिपाकर भाग गए। गोरों की फौज ने पूरे महल को छतिग्रस्त कर दिया, लेकिन खजाना ढ़ूंढ नहीं पाए। इसी दौरान राजा देश छोड़कर विदेश चले गए और खजाना मंदिर के नीचे ही रह गया। 70 साल में करीब तीन सौ बार चोरों ने खजाने की चाहत में मंदिर के चबूतरे की खुदाई की, लेकिन भगवान शिव के सेवक यानि नागों ने राजा के खजाने पर आंच नहीं आने दी।

खोद डाली 5 फिट गहरी सुरंग

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अशोक सिंह ने बताया कि कि आजादी के दौरान जब अग्रेंज देश छोड़कर जा रहे थे। तब कुछ अंग्रेजों की टुकड़ी घाटमपुर से जाने के दौरान मौजूद राजाओं व जमीदारों के घरों में माल लूटपाट की। इस पर राजा कुवंर बहादुर सिंह ने अपने व परिवार के सारे गहने व सोने-चांदी के आभूषणों को गांव के ही प्राचीन शिव मन्दिर के चबुतरे में गढवा दिया। बताया जाता है कि उनके वंशज विदेश जाने के बाद गढ़े आभूषणों को चुराने के लिए चोरों ने अथक प्रयास किया, लेकिन नागों के चलते उसे कोई चुरा नहीं सका। ग्रामीण रामबाबू के मुताबिक चोरों ने सोमवार की रात पांच फिट गहरी सुरंग खोद डाली, लेकिन वह अपने मकसद मेंं कामयाब नहीं हो सके।

नागों के डसने से दो की हो चुकी है मौत

रामबाबू ने बताया, इसके पहले कई बार चोरी का प्रयास किया है, दो माह पूर्व भी चोरों ने मंदिर के इस चबूतरे को तोड़कर माल चुराने का प्रयास किया था। तोड़ने के दौरान शिवलिंग भी टूट गया था। रामबाबू के मुताबिक मंदिर के आसपास दो सांप रहते हैं और वह दिन में नहीं निकलते, लेकिन शाम होते ही मंदिर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि सांपों के चलते अभी तक चोर खजाने तक नहीं पहुंच सकें हैं। पांच साल पहले कठेरूवा निवासी रमेश और भूरे रात में ने मंदिर के नीचे खुदाई कर रहे थे, तभी उनकों नाग ने डस लिया था ओर मौके पर ही दोनों की मौत हो गई थी। गांव के राजकुमार ने बताया कि उनके पिता राजा कुंवर बहादुर के महल में काम किया करते थे। राजा को जब पता चला कि अंग्रेज फौज उनके महल में धावा बोलने वाली है तो उन्होंने मजदूरों से मंदिर के नीचे पांच बक्सों में सोने चांदी के आभूषणों को रखवा कर चले गए थे। तब से खजाना मंदिर के नीचे ही रखा है।

ग्रामीणों के विरोध के चलते प्रशासन लौटा था वापस

अशोक ने बताया कि 1980 में यूपी के सीएम के आदेश पर जिलाधिकारी ने पूरातत्व विभाग व एसडीएम घाटमपुर को आदेश दिया था कि मंदिर के नीचे उबे खजाने को निकालें। डीएम के आदेश के बाद प्रशासन करेली पहुंचा और मंदिर के चबूतरे की खुदाई शुरू कराई तो ग्रामीण लामबंद हो गए और जमकर विरोध किया। ग्रामीणों के विरोध के चलते तब से सरकार ने करेली के शिव मंदिर की तरफ कभी नहीं देखा।

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