रामबाबू ने बताया, इसके पहले कई बार चोरी का प्रयास किया है, दो माह पूर्व भी चोरों ने मंदिर के इस चबूतरे को तोड़कर माल चुराने का प्रयास किया था। तोड़ने के दौरान शिवलिंग भी टूट गया था। रामबाबू के मुताबिक मंदिर के आसपास दो सांप रहते हैं और वह दिन में नहीं निकलते, लेकिन शाम होते ही मंदिर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि सांपों के चलते अभी तक चोर खजाने तक नहीं पहुंच सकें हैं। पांच साल पहले कठेरूवा निवासी रमेश और भूरे रात में ने मंदिर के नीचे खुदाई कर रहे थे, तभी उनकों नाग ने डस लिया था ओर मौके पर ही दोनों की मौत हो गई थी। गांव के राजकुमार ने बताया कि उनके पिता राजा कुंवर बहादुर के महल में काम किया करते थे। राजा को जब पता चला कि अंग्रेज फौज उनके महल में धावा बोलने वाली है तो उन्होंने मजदूरों से मंदिर के नीचे पांच बक्सों में सोने चांदी के आभूषणों को रखवा कर चले गए थे। तब से खजाना मंदिर के नीचे ही रखा है।