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खुद को गिरवी रख बेटे ने मां के लिए बनवाया शौचालय

एक दिन मां ने बेटे निखिल को फोन कर कहा कि जब भी वो खुले में शौच के लिए जाती है, तो गांव के दबंग उसके साथ छेड़छाड़ करते हैं और उसकी आबरु लूटने का प्रयास करते हैं। मां की ये सुनते ही बेटे का दिल और दिमाग काम करना बंद कर देता है।

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UP Patrika

Jul 16, 2016

kanpur nikhil

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कानपुर.
निखिल एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करके अपने घर का खर्च उठाता था। अपने माता-पिता की जरूरतों को पूरा करता था। लेकिन एक दिन मां ने बेटे निखिल को फोन कर कहा कि जब भी वो खुले में शौच के लिए जाती है, तो गांव के दबंग उसके साथ छेड़छाड़ करते हैं और उसकी आबरु लूटने का प्रयास करते हैं। मां की ये सुनते ही बेटे का दिल और दिमाग काम करना बंद कर देता है। उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वो घर में शौचालय बनवा सके। इसलिए उसने कंपनी मालिक से एडवांस में शौचालय बनवाने के लिए पैसे मांगे, लेकिन कंपनी मालिक ने पैसे देने से इनकार कर दिया।


विद्या बालन के विज्ञापन से मिली प्रेरणा

कहीं से पैसों का इंतजाम न होने के बाद निखिल उदास हो चुका था। उसी रात वो टीबी देख रहा था। टीवी में एक्ट्रेस विद्या बालन का वो निर्मल भारत अभियान का वो विज्ञापन
चल रहा था, जिसके माध्यम से वो घर में शौचालय बनवाने के लिए लोगों को प्रेरित करती हैं। उसे देखकर बेटे निखिल ने मां के लिए शौचालय बनवाने की ठान ली और वो नौकरी छोड़कर अपने गांव आ गया। उसने सरकारी बाबुओं के दफ्तर जाकर शौचालय के लिए अनुदान मांगा। लेकिन कई चक्कर काटने के बाद उसे कामयाबी नहीं मिली। थक हारकर बेटा साहूकार के दरवाजे जा पहुंचा, जहां उसने अपने को गिरवी रखकर 15 हजार रुपए 10 फीसदी प्रतिमाह ब्याज पर लिए और मां को शौचालय बनवाकर तोहफा दिया। लेकिन बेटा निखिल मई महीने से आज भी साहूकार के यहां बंधुआ मजदूर बनकर उसके ढाबे में काम कर रहा है और उसे मुक्त कराने की आस में उसका पिता अधकिारियों की देहरी नाप रहा है।


निखिल ने 10 फीसदी ब्याज पर लिया था उधार

बिधनू ब्लॉक के पतेहुरी (मन्ने का पुरवा) गांव के राजकुमार पंजाब के राजपुरा की राइस मिल में मजदूरी करते थे। काम करते वक्त गिरने से उनका पैर टूट गया। इलाज में डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए। बकौल, राजकुमार वो अप्रैल में कमाई के बचे पांच हजार रुपये लेकर गांव लौट आए। इन हालातों में परिवार का बोझ बेटे निखिल ने अपने कंधे पर ले लिया और पिता की जगह पर उसी राइस मिल में मजदूरी करने लगा। वहां टीवी पर शौचालय संबंधी विद्या बालन के विज्ञापन को देखकर उसने पिता को फोन किया कि मां के लिए शौचालय बनवाएं। गरीबी से तंग पिता ने पंचायत से शौचालय के लिए अनुदान राशि की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मई में निखिल ने राजपुरा के ही एक साहूकार से 15 हजार रुपए 10 फीसदी ब्याज पर कर्ज लिया। तब पिता ने उस पैसे से गांव में शौचालय बनवाया।


4 हजार प्रतिमाह की रखी साहूकार ने शर्त

निखिल के पिता ने बताया कि पैसे देते ही साहूकार ने कर्ज चुकाने को दबाव बनाना शुरू कर दिया। उसने निखिल से हर महीने चार हजार रुपये के हिसाब से मजदूरी कर पैसे चुकाने की शर्त रखी। अब उसके ढाबे पर निखिल मई महीने से बंधुआ मजदूरी करने को मजबूर है। वो फैक्ट्री छोड़कर ढाबे पर बर्तन धो रहा है। पिता का कहना है कि साहूकार उसे छोड़ नहीं रहा। कहता है कि जब तक वो उसका कर्ज चुकता नहीं करेगा, तब तक वह उसे नहीं छोड़ेगा।


अब मेरी मां खुले में शौच को नहीं जाएगी- निखिल

निखिल ने बताया कि उसकी मां ने उससे इससे पहले उससे कभी कुछ नहीं मांगा था। उसने बताया कि जिस दिन से मां ने फोन पर अपनी व्यथा उससे बताई तभी उसने प्रण कर लिया था कि मैं दिनरात मेहनत करुंगा, लेकिन मां को खुले में शौच के लिए अब नहीं जाने दूंगा। निखिल ने बताया कि उसने प्रधान से लेकर ग्राम पंचायत अधिकारी तक से शौचालत निर्माण के लिए अनुदान की मांग की लेकिन उसे कहीं से कुछ नहीं मिला। उसने बताया कि अधकिारी उससे कहते थे कि जब तक तुम मेरी जेब गर्म नहीं करोगे, तहतक अनुदान नहीं मिल सकता। निखिल ने ब्लॉक से लेकर सीडीओ दफ्तर तक फरियाद लगाई। पर वहां भी उसे मायूसी ही हाथ लगी। तब वो थक हारकर गांव के साहूकार के पास गया और अपने को गिरवी रखकर मां के लिए शौचालय बनवाया।


'जल्द मिलेगा अनुदान'

बेटे को मुक्त कराने के लिए निखिल के पिता राजकुमार लगातार अधकिारियों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब उन्हें कुछ राहत की उम्मीद गिखी है। पंचायत राज विभाग उन्हें 12 हजार रुपये का अनुदान दे सकता है। जिला पंचायत राज

अधिकारी हरिशंकर सिंह और स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक संदीप निगम ने बताया कि निखिल का परिवार बेहद गरीब है, इसलिए उसे शौचालय का अनुदान और अन्य सुविधाएं भी दिलाई जाएंगी।


राजकुमार ने बयां किया अपना दर्द

निखिल के पिता राजकुमार अनुदान के लिए अधकिारियों के पास चक्कर काट काटकर परेशान हो चुके हैं। इस बीच निराश राजकुमार ने ऐसी बात कही जो आज हर आम आदमी का दर्द है। राजकुमार ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम अखिलेश योजनाएं तो खूब चला रहे हैं, लेकिन उनके सरकारी बाबू आज भी उसी सिस्टम के तहत काम कर रहे हैं। राजकुमार के मुताबिक आज भी उसके गांव में लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। राजकुमार ने कहा कि जिस दिन सरकारी अनुदान मिल जाएगा, उस दिन वो अपने बेटे को साहूकार के चंगुल से छूड़ाकर लाएगा।

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