
सावित्री वट वृक्ष पूजन का पड़ रहा विशेष महायोग, होगा विशेष फलदायी
कानपुर। महिलाओं के लिए करवाचौथ और सावित्री वट वृक्ष पूजन का विशेष महत्व है। इस बार सावित्री वट वृक्ष पूजन एक विशेष महायोग में पड़ रहा है, जिससे यह पूजन विशेष फलदायी होगा। इस पूजन से महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सुख पा सकती हैं। सोमवार को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को इस विशेष संयोग में पूजन किया जाएगा।
विशेष महायोग
सावित्री वट वृक्ष पूजन इस बार रोहिणी नक्षत्र और सोमवती अमावस्या के महायोग में पड़ रहा है, जो बहुत फलदायी होगा। विकासनगर स्थित शकुंतला शक्ति पीठ धूनी ध्यान केंद्र के संस्थापक आचार्य अमरेश मिश्र का कहना है कि इस रोहिणी नक्षत्र और सोमवती अमावस्या का महायोग है। ऋषियों ने वट वृक्ष की महत्ता को बताया है। सावित्री ने पति सत्यवान का जीवन बचाने को यम से बचाने के लिए व्रत रखा था। यह व्रत स्त्री शक्ति का परिचायक है। मान्यता है कि प्रयागराज का अक्षय वट, गया का बोधी वट, वृंदावन का वंशीवट, उज्जैन का सिद्ध वट की महत्ता है। पार्वतीजी ने प्रयागराज के अक्षय वट की पूजा की थी।
तीनों देवों का है वास
पं. दीपक पाण्डेय का कहना है कि वट वृक्ष को देव माना जाता है। मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्माजी, तने में भगवान विष्णु, डालियों-पत्तियों में भगवान शिव का वास होता है। प्रलय काल में भगवान श्रीकृष्ण ने पीपल के पत्ते पर दर्शन दिया। यह अक्षय वट प्रयाग में गंगातट पर वेणीमाधव के निकट है। सावित्री वट वृक्ष पूजन के दौरान परिक्रमा कर तने में सूत लपेटें। वैसे तो इसमें 108 परिक्रमा का विधान है, लेकिन कम से काम सात परिक्रमा करनी जरूर चाहिए। इसके साथ ही वट सावित्री की कथा भी सुनें।
बरगद के पत्ते पर लिखें श्री सौभाग्य
घर के सारे दुख, कष्ट दूर हो जाते हैं। पति-पत्नी के बीच अखंड प्रेम रहता है। मीठे आटा का बरगद फल, फूल, सिंदूर बरगद के समक्ष चढ़ाने से लक्ष्मी का वास होता है। बरगद के पत्ते पर श्री सौभाग्य लिखकर पूजा घर या पवित्र स्थान में रखने से परिवार को कोई कष्ट नहीं होता है।
Published on:
02 Jun 2019 12:40 pm
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