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कानपुर

यहां जल में तैरने लगा श्रीराम लिखा पत्थर, चमत्कार देख घाट पर उमड़ पड़े सैकड़ों भक्त

चमत्कार देख घाट पर श्रृद्धालुओं का तांता लगने के साथ ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया।

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विनोद निगम.
कानपुर. भगवान श्रीराम ने श्रीलंका में चढ़ाई हेतु समुंदर में सेतु के निर्माण के निए वानर सेना को लगाया था। नल-नीर ने भगवान राम का नाम लिखकर पत्थर को पानी में डाला तो वह तैरने लगे थे। राम नाम के ही सहारे पूरी सेना राम नाम पत्थरों के पुल द्वारा लंका में प्रवेश कर गयी थी। ऐसा ही एक चौका देने वाला मामला घाटमपुर सजेती के मउनखत गांव के पास से गुजरने वाली यमुना नदी में देखने को मिला। यहां यमुना नदी में राम नाम लिखा तैरता हुआ पत्थर देिखा जिससे सनसनी फैल गई। ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो उनमें से कुछ लोगों ने इस पर यकीन नहीं किया। इसी दौरान युवाओं ने कुछ पत्थर जल में डाले तो उनमें श्रीराम लिखा गया और वह तैरने लगे। चमत्कार देख घाट पर श्रृद्धालुओं का तांता लगने के साथ ही पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया।

मछुआरे ने जल में तैरते हुए पाया-
त्रेतायुग की कहानी आज घाटमपुर के सजेती थानाक्षेत्र के मउनखत गांव में देखने को मिली। गांव से निकली यमुना नदी में कल्लू निषाद मछली पकड़ने के लिए गए। कल्लू जाल बिछाकर मछली पकड़ रहे थे, तभी उन्हें दूसरी दिशा से एक डेढ़ फुट लंबा पत्थर पानी में तैरता हुआ आ रहा था। कल्लू ने नॉव को आगे बढ़ाकर पत्थर को उठाकर देखा तो उसमें भगवान श्रीराम का नाम लिखा था। कल्लू ने इसकी जानकारी गांववालों को दी। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण यमुना के किनारे आ गए। कल्लू ने पूरी बात ग्रामीणों को बताई तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने दोबारा पत्थर को जल में डाला। पत्थर डूबने के बजाय फिर से तैरने लगा। चमत्कार देख यमुना के तट पर श्रीराम के जयकारे लगने लगे और पूजा-पाठ का दौर शुरू हो गया। ग्रामीणों ने नजदीक के हनुमान मंदिर पर पत्थर को रख दिया, जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दराज से लोग आ रहे हैं।

डेढ़ फुट लंबा और दो किलो वजन का है पत्थर-
कल्लू निषाद ने बताया कि वह आज मछली पकड़ रहा था, तभी पत्थर मुझे जल में तैरता दिखा। मैंने अपनी नाव दौड़ा दी और पत्थर को जल से बाहर निकाला और देखा तो उसमें श्रीराम लिखा था। डेढ़ फुट लंबा और दो किलो वनजी पत्थर को तैरते देख मेरे भी होश उड़ गए। कल्लू ने बताया कि मैंने फिर से पत्थर जल में डाला तो वह तेज रफ्तार में जल में बहने लगा। मैंने जल में छलांग लगाकर उसे बाहर निकला और गांववालों को घटना की जानकारी दी। गांव के रामस्वरूप ने बताया कि हमें कल्लू की बात पर विश्वास नहीं हुआ, जिसके चलते हमने पत्थर को दोबारा युमना के जल में डाला तो वह फिर से तैरने लगा। ग्रामीणों ने जल से उसे बाहर निकाला और हनुमान मंदिर में पत्थर को रखवा दिया।

भगवान श्रीराम ने किया चमत्कार-
गांव के केवट मकरंदी ने बताया कि भगवान श्रीराम और केवटों का तेत्रायुग से रिश्ता रहा है। केवट ने उन्हें नांव से बैठाकर गंगा के उस पार पहुंचाया था। मकरदी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने हमें फिर से सेवा करने की मौका दिया है। बुधवार को यहां पर भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर के निर्माण की शुरूआत की जाएगी। गांव के लोगों का कहना है कि जब इस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा तो इस पत्थर को भी स्थापित किया जाएगा। यमुना नदी में प्राप्त इस पत्थर को लेकर ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिल रहा है। उनका मानना है कि ये अद्भुत पत्थर उस समय का है जब भगवान श्रीराम ने लंका जाने के लिए समुद्र पर सेतु का निर्माण किया था। पत्थर के दर्शन के लिए आसपास के गांवों से लोगों का जुटना शुरू हो गया है। लोग इसके दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रहे हैं।