
हनुमान जी की मूर्ति का रंग चंद मिनट में पड़ जाता है काला
कानपुर। छोटी काशी के रूप में पहचाने जाने वाला एतिहासिक सिद्धनाथ मंदिर में विस्थापित भगवान बजरंगबली की मूर्ति के साथ ही त्रिशूल का रंगा अचानक रंग काला होता जा रहा है। इस चमत्यकार की जानकारी होने पर हरदिन सैकड़ों भक्तों का सुबह से लेकर देरशाम तक तांता लगा रहता है। पूजा-पाठ के साथ भक्ति गीत से पूरा इलाका सराबोर है। मंदिर के पुजारी के मुताबिक हरदिन मंदिर का गेट खोलने के बाद हनुमान जी की मूर्ति में लाल रंग का लेप लगाया जाता है, जो कुछ मिनट के बाद काला पड़ जाता है।
मंदिर का इतिहास
गंगा के किनारे प्रसिद्ध सिद्धेश्वर मंदिर है। सिद्धेश्वर मंदिर के पुजारी राजीव शुक्ला न बताया कि भक्त इसे भारत की छोटी के नाम से पुकारते हैं। पहले जाजमऊ देश की राजधानी हुआ करती थी। इसे राजा जयाद ने बसाया था। जयाद भगवान भोले के भक्त थे और उन्होंने भगवान शिव का तप किया था। खुश होकर शंकर ने उन्हें दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा। जयाद ने भगवान शंकर से जाजमऊ में बसने की मन्नत की। भगवान शिव ने राजा को वरदान तो दे दिया, लेकिन एक शर्त रख दी। जिसे राजा जयाद की तपस्या को भगवान इंद्र ने खंडित कर दी इसी के चलते जाजमऊ को काशी का दर्जा नहीं दिला पाए।
फिर बदल जाता है रंग
पुजारी बताते हैं, यहां पर शिवलिंग, हनुमानजी की मूर्ति स्थापित है और दर्शन के लिए रोजाना सैकड़ों भक्तों की भीड़ जुटती है। बीते कुछ दिनों द्वार पर लगी हनुमानजी की मूर्ति काले रंग की हो गई है और तांबे का त्रिशूल का भी रंग बदलकर काला हो रहा है। रोजाना मंदिर की साफ सफाई की जाती है और हनुमान जी को लाल बंदन का सिंदूर लेप चढ़ाया जाता है। कुछ देर तक रंग लाल रहता है लेकिन बाद में हनुमानजी की मूति काले रंग की हो जाती है। इस घटना के बाद से तरह तरह की भ्रांतियों के जन्म लेने के साथ लोगों में रोष भी पनप रहा है।
मूर्ति का रंग काला पड़ने की ये वजह
मंदिर मूर्ति और अरघा काला पडऩे से भक्तों में बेहद रोष है। इसके पीछे गंगा घाट के किनारे नाले में जमा जहरीला सीवरेज के प्रदूषण को कारण माना जा रहा है। बुढिय़ाघाट और वाजिदपुर में नाला जल निगम ने टैप किया था। वाजिदपुर नाला की टैपिंग की बोरियां हटने से केमिकलयुक्त सीवरेज बहकर सिद्धनाथ घाट के आगे तक पहुंच गया है। इससे घाट किनारे एक बड़े नाले की शक्ल ले ली है। यहां एक माह से अधिक समय से नाले का सीवरेज जमा है। सीवरेज का रंग भी लाल, हरा व काला हो गया है। माना जा रहा है इस जहरीली गैस के प्रभाव से सिद्धनाथ मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति और त्रिशूल काला पड़ रहा है।
पर भक्त बता रहे दूसरी वजह
वहीं मंदिर के पुजारी व भक्तों का मानना है कि ये कोई चमत्कार है। भक्त राजेश बताते हैं कि जाजमऊ में टेनरियां कई सालों से बदस्तूर चल रही हैं। पहले इससे ज्यादा केमिकल टेनरियों से बहकर यहां आता था, पर मूर्ति कभी काली नहीं पड़ी। राजेश कहते हैं कि भगवान हनुमान जी किसी कारण गुस्से में हैं और इसी के चलते उनकी मूर्ति में लगा लाल रंग का लेप अपने आप काला हो जाता है। राजेश ये भी मानते हैं कि केमिकल के चलते कई गांवों में हैंडपंप से पानी काला निकलता था। वाजिदपुर में तो हर घर में कोई न कोई विकलांग हो गया है।
Published on:
15 Jun 2019 08:16 am

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