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Stem Cell Therapy: विशेष पेटेंट डिवाइस से नेत्ररोगी को दी थेरेपी, हैलट में दी गई दुनिया की पहली स्टेम सेल थेरेपी

Stem Cell Therapy डॉक्टरों का दावा है कि भारत में पहली बार विशेष पेटेंट डिवाइस से रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा के रोगी को स्टेम सेल थेरेपी दी गई है। मगर विशेष तकनीक के प्रयोग से यह दुनिया में पहला मामला है। थेरेपी के बाद रिकवरी तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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Stem Cell Therapy: विशेष पेटेंट डिवाइस से नेत्ररोगी को दी थेरेपी, हैलट में दी गई दुनिया की पहली स्टेम सेल थेरेपी

Stem Cell Therapy: विशेष पेटेंट डिवाइस से नेत्ररोगी को दी थेरेपी, हैलट में दी गई दुनिया की पहली स्टेम सेल थेरेपी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
कानपुर. रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा (Retinitis Pigmentosa) के नेत्र रोगी को हैलट में विशेष पेटेंट डिवाइस से स्टेम सेल थेरेपी (Stem Cell Therapy) दी गई। डॉक्टरों का दावा है कि भारत में पहली बार विशेष पेटेंट डिवाइस से रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा के रोगी को स्टेम सेल थेरेपी दी गई है। मगर विशेष तकनीक के प्रयोग से यह दुनिया में पहला मामला है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्ररोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने स्टेम सेल थेरेपी के विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत के साथ यह थेरेपी मंगलवार को दी है। बताया गया कि यह विशेष डिवाइस सुप्रा कोराइडिल नीडल नेत्ररोग विभागाध्यक्ष डॉ. खान के नाम पेटेंट है।

कानपुर के रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा के नेत्ररोगी को दी थेरेपी

करीब पांच वर्ष की अवस्था से इस बीमारी का दंश झेल रहे शुक्लागंज कानपुर निवासी 30 वर्षीय नेत्ररोगी को यह थेरेपी हैलट में दी गई है। उसकी आंख की रोशनी चली गई थी। जांचों के बाद उसे स्टेम सेल थेरेपी के लिए चुना गया। मंगलवार को विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान और मुंबई के स्टेम सेल थेरेपी विशेषज्ञ व जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. बीएस राजपूत ने रोगी को स्टेम सेल थेरेपी दी। उसकी आंख में रेटिना की ऊपरी सतह सुप्रा कोराइडल स्पेस में स्टेम सेल दी गईं। थेरेपी के बाद रिकवरी तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस थेरेपी की विशेषज्ञों ने बताई खासियत

इस थेरेपी में रेटिना की सतह के ऊपर आठ सौ माइक्रॉन की झिल्ली भेदकर दवा पहुंचाई जाती है। आंख की रेटिना की सतह के ऊपर आठ सौ माइक्रॉन की झिल्ली होती है। अभी तक इसे भेदकर दवा डालने की कोई डिवाइस नहीं थी। डॉ. परवेज ने विशेष प्रकार की नीडल खोजी है। इसकी मदद से सुप्रा कोराइडल लेयर में दवा पहुंचाई जा सकती है। डॉ. खान ने बताया कि झिल्ली बहुत बारीक है कि जरा सी अधिक भेदने पर दवा उस पार आंख के हिस्से में चली जाएगी। इस झिल्ली के जरिए दवा रेटिना तक पहुंच जाती है। साथ ही इसके साइड इफेक्ट्स भी नहीं होते हैं।

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा में स्टेम सेल थेरेपी का देश में पहली बार इस्तेमाल किया गया है। लेकिन, डॉ. खान की पेटेंट डिवाइस से यह दुनिया का पहला मामला है।