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फर्नीचर के लिए अब नहीं कटेंगे पेड़, गन्ने की खोई से बनेंगे कुर्सी, मेज

- पेड़ों की लकड़ी से ज्यादा मजबूत होंगे दरवाजे - पानी का भी नहीं होगा इन पर कोई असर

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Sugarcane bagasse will make stronger furniture

फर्नीचर के लिए अब नहीं कटेंगे पेड़, गन्ने की खोई से बनेंगे कुर्सी, मेज

कानपुर। अब गन्ने की खोई से घरों के फर्नीचर और दरवाजे समेत लकड़ी से बनने वाला सामान बनेगा। लकड़ी की जरूरत कम हो जाने से पेड़ों की कटाई भी रुकेगी। सबसे खास बात यह है कि गन्ने की खोई से बना फर्नीचर लकड़ी के मुकाबले ज्यादा मजबूत होगा और पानी पडऩे से खराब भी नहीं होगा। जिससे फर्नीचर अब लंबे समय तक टिकाऊ रहेगा।

एनएसआई ने पाई कामयाबी
गन्ने की खोई से पार्टिकल बोर्ड बनाने में राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई) ने सफलता प्राप्त कर ली है। एनएसआइ निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन के निर्देश में खोई से फर्नीचर बनाने को लेकर परिसर में कार्यशाला हुई। जिसमें बताया गया कि ढाई टन खोई से 8/4 फिट व 17 मिमी मोटे 20 पार्टिकल बोर्ड बनाए जा सकते हैं। इन्हीं से फर्नीचर का निर्माण किया जाएगा। कार्यशाला में प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि गन्ने की पेराई से प्रतिवर्ष नौ सौ लाख टन खोई निकलती है। उन्होंने बताया कि बिजली बनाने में इसका इस्तेमाल किए जाने के बाद भी 45 लाख टन यह बच जाती है। इसी खोई का इस्तेमाल फर्नीचर इंडस्ट्री के क्षेत्र में किया जा सकता है। इसके दो लाभ होंगे। पहला पेड़ों की कटाई नहीं होगी और दूसरा यह वर्तमान में बनने वाले फर्नीचर की अपेक्षा 15 से 20 फीसद सस्ता भी होगा। खोई से पार्टिकल बोर्ड बनाने में संस्थान ने सफलता प्राप्त कर ली है।

२४ घंटे तक झेल सकती पानी की मार
गन्ने की खोई से बने पार्टिकल बोर्ड की 24 घंटे तक पानी में डूबे रहने के बाद भी उसकी गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी। संस्थान के शुगर टेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डी स्वेन ने बताया कि फर्नीचर उद्योग में वुड पैनल के बढ़ते उपयोग के कारण नए कच्चे पदार्थों की मांग बढ़ी है। गन्ना पेराई से निकलने वाली खोई से पार्टिकल बोर्ड बनाकर यह जरूरत पूरी की जा सकती है। बड़ी मात्रा में पार्टिकल बोर्ड बनकर फर्नीचर में इसका इस्तेमाल किए जाने को लेकर एनएसआइ जल्द ही कंपनियों से करार करेगा। कई कंपनियों ने करार के लिए कदम भी बढ़ा दिए हैं।