
करोड़ों का टर्नओवर देने वाले टेनरी मालिक हो गए कर्जदार
कानपुर। कभी उद्योगो का शहर कहा जाने वाला कानपुर शहर आज बेरोजगारों का शहर बन गया है। पहले मिल मालिकों और मजदूर यूनियन के बीच की तनातनी ने मिलों पर ताले लगवाए तो अब सरकार और टेनरियों के बीच सामंजस्य न बन पाने के चलते शहर में दो हजार करोड़ का कारोबार ठप हो गया और पचास हजार लोग बेरोजगार हो गए। अब टेनरी मालिकों से बैंकों को वसूली में भी दिक्कत आ रही है, जिसके चलते वे टेनरियों में पड़ीं कच्ची खालों की नीलामी कर अपनी रकम जुटाने की कोशिश में जुटी हैं।
१८ नवंबर टेनरियां हैं बंद
कुंभ के दौरान १८ नवंबर से कानपुर की टेनरियों को बंद कर दिया गया था। कहा गया गया था कि चार मार्च के बाद टेनरियों पर लगी पाबंदी हटा दी जाएगी, लेकिन आधा मई खत्म होने के बाद भी टेनरियों पर लगे ताले खुल नहीं सके। जिसके चलते बिजनेस और आर्डर हाथ निकल गया और बैंकों का लोन एनपीए होने लगा। केनरा बैंक और पीएनबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया कि टेनरियों के खाते कभी अनियमित नहीं रहे। पहली बार डिफाल्टर होने की नौबत आई है।
खालों की नीलामी करा रहे बैंक
डिफाल्टर हो चुकी टेनरियों से वसूली के लिए केनरा बैंक एक टेनरी की 9500 खालें बेच रहा है। इन खालों की नीलामी होगी, जिनकी कीमत लगभग 45 लाख है। जाजमऊ की दो और टेनरियां डिफाल्टर की श्रेणी में आ गई हैं। इनकी मशीनें, जमीन, इमारत और खालों को बेचने की प्रक्रिया बैंक जल्द शुरू करेंगे। इस संबंध में टेनरी कारोबारियों ने कहा कि कहां से ब्याज और किस्त भरें। 200 करोड़ के टर्नओवर पर लोन लिया लेकिन कारोबार 100 करोड़ रह गया। खर्च बरकरार हैं तो एनपीए होने लगे। इसी के साथ इनकम टैक्स भी घट गया है।
मेक इन इंडिया के टॉप सेक्टर की दुर्दशा
केंद्र सरकार ने लेदर सेक्टर को मेक इन इंडिया के टॉप टेन सेक्टर में रखा था। पहली बार 2600 करोड़ का स्पेशल पैकेज दिया गया लेकिन अभी तक तमाम टेनरियों को आधुनिकीकरण के लिए पैसा नहीं मिला। होमैरा टेनर्स के अशरफ रिजवान ने बताया कि टेनरी अपग्रेड करने के लिए दो करोड़ सात लाख रुपए स्वीकृत हो चुके हैं लेकिन फंड रिलीज नहीं हुआ।
Published on:
12 May 2019 03:05 pm
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