
कानपुर। भाजपा जहां कर्नाटक विधानसभा चुनाव की जीत का जश्न मना रही थी, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के सामने बन रहे फ्लाई ओवर की दो बीम गिरने से 25 लोगों की मौत हो गई है। जिसके चलते पूरे देश में हड़कंप मच गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर दुख जताते हुए राहत कार्य के लिए सीएम योगी को लगाया है। यह हादसा पुलों के निर्माण के दौरान सेफ्टी नॉर्म्स की अनदेखी व भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण है। इस घटना के बाद पत्रिका टीम ने मंगलवार की देरशाम शहर के पुलों का जायजा लिया तो एक खतरनाक असलियत सामने आई। शहर के कई पुल कभी भी जमींदोज होने की कगार पर हैं और कभी भी गिर सकते हैं।
25 लोगों की मौत, कानपुर में भी जर्जर पुल
बनारस में मंगलवार की शाम फ्लाई ओवर की दो बीम गिरने के कारण बस सहित छह गाडिय़ां फंस गई। जिनमें सवार करीब 25 से ज्यादा लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कई दर्जन लोग घायल हो गए। घटनास्थल पर नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की सात टीमें राहत व बचाव कार्य में लगी हैं। इन टीमों में कुल मिलाकर 325 आदमी काम कर रहे हैं। रात आठ बजे तक 25 शव निकाले जा चुके थे, इसके अलावा तीन घायलों को अस्पताल में पहुंचाया जा चुका है। वहां पर अभी 25 से 30 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। इस हादसे में 50 से अधिक लोग दब गए। हदसे की खबर मिलते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने डिप्टी सीएम को मौके पर भेजा है और मृतकों के परिजनों को शोक संवदेना दी है। वहीं हादसे के बाद पत्रिका टीम ने कानपुर के कई पुलों का निरीक्ष्राण किया, जहां खामिया ही खामियां नजर आई।
10 साल बाद बना, खामियों भरा सीओडी पुल
करीब दस साल के लंबे इंतजार के बाद 15 मई 2018 को जीटी रोड पर बने सीओडी पुल पर यातायात शुरू हो गया था। स्थानीय लोगो के बीच उपस्थित हो कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने फीता काटा व नारियल फोड़कर इसका उद्घाटन किया था। पुल की अभी दो लेन ही चालू हुई है। बाकी की दो लेन का कार्य 15 जून तक पूरा हो जाने का आश्वासन मंत्री ने दिया था। लेकिन 15 जून की तारीख निकल गई पर पुल जैसा पहले था वैसा आज भी है। यहां से हर दिन 10 लाख लोग आवागमन करते हैं। शाम के वक्त पुल पर कभी-कभी लंबा-लंबा जाम लग जाता है, जिसके चलते अधूरे लेन से वाहनों को लोग निकालते हैं। पुल पर सुरक्षा के नाम पर कोई नहीं है। आरटीआई एक्टीविस्ट रनम श्रीवास्तव ने बताया कि बनारस का पुल तो इससे बहुत बेतहर था, बावजूद ढह गया। जबकि सीओडी पुल में दस साल के दौरान करोड़ों रूपए पानी की तरह बहाए गए, लेकिन पुल आज भी पूरी तरह से अधूरा पड़ा है।
तो कुछ गड़बड है
गोविंदपुरी पुल के समानांतर नए पुल का निर्माण तो हो गया और डिप्ब्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या उद्घाटन भी कर गए। लेकिन पुल की सिर्फ एक तरह से वाहनों का आवागमन होता है। जबकि पुराने पुल से हर दिन पांच लाख वाहन जान जोखिम में डालकर निकलते हैं। नए पुल महज कुछ माह के दौरान हिलने और दरकनें लगा। जगह जगह पुल का प्लास्टर टूट चुका है।. 6 साल पहले इस ब्रिज का एक हिस्सा ढह भी चुका है। इसके ऊपर से जलसंस्थान की राइजिंग वाटर मेन लाइन निकली है।. पिछली बार भी ब्रिज धंसने की एक वजह ये लाइन भी थी। ब्रिज की रेलिंग खोखली होती जा रही है, कब गिर जाए भरोसा नहीं है। नौबस्त ी निवासी अुरूण यादव ने बताया गोविंदपुरी पुल का निर्माण जल्दबाजी में कराया गया, जो पूरी तरह से असुरक्षित है और जिस दिन जाम लगा तो यहां भी बड़ा हादसा हो सकता है। योगी सरकार को शहर के तमाम पुलों की जांच एजेंसियों से कराई जानी चाहिए, जो मापदंड में खरे उतरें उन पर ही वाहनों को आने-जाने देना चाहिए।
150 साल पुराना पुल जर्जर
कानपुर और शुक्लागंज को जोड़ने वाले मार्ग पर बना गंगा ब्रिज अंग्रेंजों के जमाने का बना हुआ है। लोगों के मुताबिक इस ब्रिज को बने लगभग 150 साल हो चुके हैं। यही वजह है कि जर्जर हो चुके इस ब्रिज पर ट्रक, बस आदि हैवी वेहिकल्स के आवागमन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। हालांकि, इसके बाद भी हल्के वाहनों से इस पुल से करीब एक लाख लोग रोजाना गुजरते हैं। पुल बदहाल स्थिति में होने के कारण पुल के नीचे वाले हिस्से से बाइक, स्कूटर गुजरने से रोकने के लिए गार्डर लगा दिए हैं। वहीं घंटाघर ब्रिज की रोड तो पीडब्लूडी ने जरूर बनाई हैं, लेकिन शायद वे ब्रिज के जगह से जगह टूट-चुके फुटपाथ को भूल गए। इसी तरह ब्रिज की दोनों तरफ की टूटी साइड वॉल भी नजर नहीं आई। जबकि वर्ष 2008 में साइड वॉल के किनारे ब्रिज रोड पर लंबी दरार पड़ गई है और 50 मीटर लंबे हिस्से को दुबारा बनाना पड़ा था।
इन पुलों पर पड़ीं दरारें
दादानगर में झांसी लाइन पर बने ब्रिज को चार साल पहले ही शुरू किया गया, लेकिन हैवी वेहिकल्स के लोड की वजह से इसके कुछ हिस्सों पर अभी से दरारें साफ नजर आने लगी हैं। इसकी स्लेप कई जगह चिटक चुकी है। वहीं पुराने दादा नगर पुल की चार साल पहले मरम्मत की गई, लेकिन इसके फुटपाथ अभी भी जर्जर हालत में हैं। वहीं जाजमऊ में भले ही दो लेन का नया पुल शुरू हो चुका हो लेकिन दो लेन के पुराने पुल पर अभी भी ट्रैफिक जारी है। लेकिन लगातार हुए सड़क हादसों की वजह से कई जगहों पर इसकी रेलिंग टूट चुकी है। वहीं नया पुल के बराबर पुराने बाबूपुरवा पुल पर तो कई जगह रीटेनिंग वॉल ही गायब हो गई हैं।
Published on:
15 May 2018 11:26 pm
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