16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हैलट में एक रुपए की जगह १०० रुपए का बनेगा पर्चा

छह महीने तक रहेगा वैध, केवल गंभीर मरीजों को ही किया जाएगा भर्ती मेडिकल कॉलेज के संस्थान बनने के बाद होंगे कई बदलाव और सुधार

2 min read
Google source verification
हैलट में एक रुपए की जगह १०० रुपए का बनेगा पर्चा

हैलट में एक रुपए की जगह १०० रुपए का बनेगा पर्चा

कानपुर। हैलट में उमडऩे वाली भीड़ को कम करने के लिए यहां के नियमों में जल्द ही बड़े बदलाव दिखेंगे। यह बदलाव जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज को संस्थान का दर्जा मिलने के बाद लागू होंगे। इसके चलते मेडिकल संस्थान से संबद्ध अस्पतालों में एक रुपए वाला पर्चा सौ रुपए में बनेगा। उम्मीद है कि अगले माह मेडिकल कॉलेज को संस्थान का दर्जा मिल जाएगा। जिसके बाद यहां की सेवाओं में सुधार देखने को मिलेगा।

गंंभीर और रेफरल मरीज ही लिए जाएंगे
मेडिकल कॉलेज के संस्थान बनने के बाद यहां पर एसजीपीजीआई, लखनऊ की तर्ज पर मरीज देखे जाएंगे। शासन में इसको लेकर मंथन चल रहा है कि यहां सिर्फ रेफरल केस ही लिए जाएं। इससे यहां गंभीर मरीज ही देखे जाएंगे। उनके लिए सुविधाएं बढ़ जाएंगी। यह अलग बात है कि यह जेब पर भी भारी पड़ेगा, पर १०० रुपए में बनने वाला पर्चा छह महीने तक वैध रहेगा।

जांचें भी होंगी महंगी
हैलट के यूजर चार्ज और जांच शुल्क में बदलाव के लिए पीजीआई और केजीएमयू की रेट लिस्ट पर विचार किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से शासन की कमेटी राय लेगी। इसके बाद नए रेट पर फैसला लिया जाएगा। इसके बाद सभी तरह की जांचों का शुल्क भी बढ़ाया जाएगा। वहीं, अन्य मरीजों को राहत देने के लिए उर्सला अस्पताल की जिम्मेदारी बढ़ाई जाएगी।

बेहतर होंगी सुविधाएं
मेडिकल कॉलेज के एक अधिकारी का कहना है कि जिनका इलाज पीएचसी और सीएचसी में होना चाहिए, उन्हें भी मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में भर्ती करना पड़ता है। इससे गम्भीर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं हो पाता। मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदारों का तर्क है कि इससे संबद्ध अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी इलाज की सुविधाएं बढ़ी हैं। लगभग हर विभाग में सुपर स्पेशियलिटी विशेषज्ञ हैं। 11 विभागों का एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी शुरू होने वाला है। इन विभागों और अस्पतालों में गुणवत्ता पूर्ण इलाज देने के लिए यह जरूरी है कि यहां आने से पहले मरीजों की स्क्रीनिंग की जाए। प्राथमिक उपचार से ठीक होने वाले रोगी यहां न भेजे जाएं।