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पीएम मोदी के इस स्लोगन से प्रेरित होकर वृद्ध शिक्षक ने लिख डाली पुस्तक, प्रधानमंत्री ने दिया प्रशस्ति पत्र, सुनिए जुबानी

प्रधानमंत्री मोदी इस पुस्तक से काफी प्रेरित हुए तो उन्होंने रोशनलाल पाल को इस सराहनीय प्रेरणादायक पुस्तक के लिए प्रशस्ति प्रमाण पत्र दिया।

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पीएम मोदी के इस स्लोगन से प्रेरित होकर वृद्ध शिक्षक ने लिख डाली पुस्तक, प्रधानमंत्री ने दिया प्रशस्ति पत्र, सुनिए जुबानी

अरविंद वर्मा

कानपुर देहात-कब कौन किसके लिए प्रेरणास्रोत बन जाये, ये किसी को नही पता। कभी कभी इंसान किसी से प्रेरित होकर उस मुकाम पर पहुंच जाता है कि उसे लक्ष्य के सिवा दुनिया बेरंग लगती है। ऐसा इंसान सभी के लिए आदर्श बन जाता है। कुछ ऐसे ही अनूठे विचारों से ओतप्रोत कानपुर देहात के मनावां रसूलाबाद निवासी 67 वर्षीय रोशनलाल पाल हैं, जो पूर्व में कहिंजरी के एक विद्यालय में अवैतनिक शिक्षक के रूप में कार्यरत रहे हैं, लेकिन आज वो सभी के आदर्श बने हुए हैं। अपने एक मित्र चंद्रकिशोर से प्रभावित होकर वो कविताएं लिखने लगे। ईश्वर में उनकी बड़ी ही आस्था है। राजनैतिक स्वरूप से उनका कोई सरोकार नही है लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रोशनलाल बहुत प्रेरित हुए।

रोशनलाल ने इस पुस्तक की कर डाली रचना

दरअसल रोशनलाल का कहना है कि बीजेपी की सरकार 2014 में आने के बाद पीएम मोदी प्रधानमंत्री बने। चुनाव के दौरान "सबका साथ, सबका विकास" पंक्ति सुनने के बाद प्रधानमंत्री द्वारा गरीबों व अमीरों को एक साथ लेकर सभी के किये विकास की एक नई कड़ी जोड़ने पर पीएम मोदी ने एक नई शुरुवात की और देश को नए मुकाम पर पहुंचा दिया। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के इस स्लोगन से उन्हें प्रेरणा मिली तो वो भी समाज मे इस राह पर चल पड़े। बस उनके जेहन में यह बात घर कर गयी और उन्होंने मानव कल्याण के लिए "सुगंध पुष्प घट-घट में राम" पुस्तक की रचना कर डाली। इसके माध्यम से उन्होंने समाज में लोगों को जागृत करने का काम किया है।

पीएम मोदी ने दिया प्रमाण पत्र

इसके बाद दिल्ली से इस पुस्तक के प्रकाशित होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी इस पुस्तक से काफी प्रेरित हुए तो उन्होंने रोशनलाल पाल को इस सराहनीय प्रेरणादायक पुस्तक के लिए प्रशस्ति प्रमाण पत्र दिया। साथ में उन्होंने लिखा कि आपकी पुस्तक से बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। रोशनलाल मोदी जी को अपना मार्गदर्शक व आदर्श मानते हैं, इसलिए समाज से भ्रष्टाचार को खत्म करने के किये प्रयासरत हैं। इनके दो पुत्र थे, जिसमें एक पुत्र की घटना में मौत हो गयी। आज अपने एक बेटे व पत्नी के साथ कृषि कार्य करके गुजारा कर रहे हैं। फिर भी समाज के लिए कुछ अलग करने की जुनून उनमें जीवित है, जिसे वो जीवंत कर रहे हैं। उनके ऐसे उत्कृष्ट कार्यों के चलते वे लोगों में विख्यात हो चुके हैं।