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मांखी की बिटिया के आंसुओं से बही दबंग की सल्तनत, सलाखों के पीछे पहुंचा भाजपा का लाड़ला विधायक

10 माह से लड़ रही थी न्याय के लिए जंग, पिता की हत्या के बाद भी नहीं टूटी पीड़िता

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10 माह से लड़ रही थी न्याय के लिए जंग, पिता की हत्या के बाद भी नहीं टूटी पीड़िता

कानपुर। वह पिछले दस माह से थाने के चक्क्र लाग रही थी। दरोगा से गिड़गिड़ा रही थी तो डीएम और एसपी के पास जाकर इंसाफ की गुहार लगाती रही, पर विधायक कुलदीप सिंह के रूतबे के चलते उसे न्याय नहीं मिला। तो पीड़िता ने सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ को एक नहीं पूरे 100 ट्वीट किया, जवाब नहीं मिलने पर पीएम को खत लिखा। पीएमओ से कार्रवाई का आदेश आया पर उन्नाव पुलिस ने उसे फाड़कर कूड़े के ढेर में डाल दिया। फिर भी वह टूटी नही, बिगड़े सिस्टम के खिलाफ लड़ती रही। आखिरकार उसके आंसुओं से भाजपा विधायक की सल्तन बह गई और कानून के पिंजरे के अंदर बाहुबली कुलदीप सिंह पहुंच गया। विधायक के जेल जाने के बाद मांखी भी अंदर-अंदर खुश नजर आ रही है। हां डर और खौफ के चलते उसकी मुस्कान घरों के अंदर दिखाई दे रही है।
सीएम को 100 ट्वीट किए
उन्नाव जिले के मांखी गांव निवासी एक बिटिया को भाजपा के गुर्गे उठा ले गए और उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई तो खाकीधारियों ने विधायक व उसके भाई का नाम एफआईआर में नहीं लिखा। जिसके विरोध में पीड़िता अपने पिता और चाचा के साथ मैदान में उतर गई। इस दौरान बाहुबली व उसके भाई ने पीड़िता के पिता की हत्या करवा दी। अनाथ होने के बाद भी उसने हथियार नहीं डाले, बल्कि और ताकत के साथ विधायक के खिलाफ मुखर हो गई। पीड़िता के चाचा ने बताया कि शायद ही कोई ऐसा दर बचा हो जहां हमने इंसाफ पाने के लिए गुहार न लगाई हो। हमने शिकायती पत्र भेजने के साथ ही मुख्यमंत्री जनता दरबार तक दस्तक लगाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को करीब 100 से अधिक बार ट्वीट और संदेश भेजे लेकिन कभी कोई रिएक्शन नहीं आया।
10 माह तक सताता रहा विधायक
दुष्कर्म पीड़िता इंसाफ पाने के लिए पीएम-सीएम के दर पर फरियाद दस माह से लगाती रही, पर किसी ने सुधि नहीं ली।चाचा के मुताबिक उसने जून 2017 में भतीजी के साथ हुई दुष्कर्म की घटना के बाद से लेकर उसके पिता की पिटाई तक जो भी घटनाक्रम हुए, उन सभी में शिकायती पत्र भेजे, ई-मेल किए और सोशल मीडिया से भी गुहार लगाई, साथ ही कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य अधिकारियों को सौ से अधिक बार ट्वीट किया, लेकिन अधिकतर पर मुख्यमंत्री की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं दिया गया। अधिकारियों ने भी उसे गंभीरता से नहीं लिया। पीड़िता के चाचा के मुताबिक पीएमओ तक में गुहार लगाई, लिखित पत्र से लेकर दूसरे माध्यमों से न्याय मांगा लेकिन सभी जगह से उन्हें निराश ही हाथ लगी। दिसंबर में पीएमओ में जो शिकायत की उसमें कार्रवाई का आश्वासन तो दिया गया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस की तैयार हो रही कुंडली
सीबीआई जांच शुरू होने के बाद विधायक से दोस्ती निभाने वाले पुलिस कर्मियों पर शिकंजा कसना तय है। सीबीआई ने इन सभी को निशाने पर लिया है। इनकी कॉल डिटेल खंगालने की तैयारी है। चार जून 2017 से अब तक जो कुछ हुआ उसका पता लगाने के लिए सीबीआई दोहरी छानबीन में लगी है। माखी थाने में पिछले एक वर्ष से तैनात रहे थानेदारों की सूची तलब कर ली गई है। उनकी तैनाती के दौरान कुंडली खंगाली जा रही है। तीन अप्रैल को माखी गांव में जिस वक्त पीड़िता के पिता को पीटा गया, वहां बिना ड्यूटी के एक इंस्पेक्टर भी थे। सीबीआई उन्हें पूछताछ के दायरे में ले सकती है। सीबीई शनिवार को गांव स्थित स्कूल आदि में लगे कैमरों को खंगाल रही है।सीबीआइ र्टीम ने पिछले एक वर्ष में पीड़ित परिवार द्वारा कितने प्रार्थनापत्र दिए गए इसकी जानकारी जुटाने के साथ जो भी शिकायती पत्र मिला उसे कब्जे में लिया। पुराने और नए मुकदमों की केस डायरी को भी कब्जे में लिया। इस दौरान कौन-कौन एसओ पोस्ट रहे, इसका भी ब्यौरा लिया।
नप सकते हैं पुलिस के बड़े-बड़े अफसर
सीबीआई ने पीड़िता के पिता की मारपीट कर हत्या के मामले में जून 2017 की घटना और पीड़ित किशोरी के पिता पर दर्ज मुकदमे की जांच को भी अपने हाथ में लिया है। अब पूर्व में माखी थाने पर तैनात रहे दारोगा, सिपाहियों की कुंडली तैयार कर रही है। उनकी भी कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) से विधायक और उनके भाइयों व गुर्गों से नजदीकी के प्रमाण तलाशे जाएंगे। पीड़ित के परिवारीजन से हुई पूछताछ में जिन-जिन अधिकारियों से शिकायत की बात सामने आई है, सीबीआई उनमें से कई अधिकारियों से सीबीआई पूछताछ कर रही है। साथ ही ं निलंबित हुए सीओ के साथ पूर्व में तैनात रहे सीओ (सेवानिवृत्त) शामिल हैं जिन्होंने पीड़िता की फरियाद को तरजीह नहीं दी।