
कानुपर। शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा। हितैषी जी द्वारा लिखा यह गीत उन दिनों हर क्रांतिकारी के मन में नया जोश भर देता था और वो सिर पर कफन बांधकर जंग-ए-आजादी में हंसते-हसंते कूद पड़ते थे। ऐसे ही एक आजादी के पुरोधा पंडित चंद्रशेखर आजाद थे, जिनकी मां उन्हें संस्कृत का शिक्षक बनाना चाहती थीं, लेकिन उन्होंने तो अपनी राह अगल ही बना ली थी।
इतिहासकार मनोज कपूर बताते हैं कि 1921 में महात्मा गांधी ने असहयोग आन्दोलन शुरू किया था। चंद्रशेखर एक स्टूडेंट होते हुए भी इस आंदोलन से जुड़े। इस समय इनकी उम्र 15 साल थी। अंग्रेजों ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। जब जज के सामने इन्हें पेश किया गया तो जज ने इनका नाम, पिता और निवास के बारे में पूछा तो, पंडित जी ने कहा मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता और मेरा पता जेल है। इससे जज भड़क गया और आजाद को 15 बेंतो की सजा सुनाई गई। यही से उनका नाम पड़ा आजाद।
संस्कृत का टीचर बनाना चाहती थीं मां
23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश के भाबरा गाँव में सीताराम तिवारी और जगरानी देवी के घर एक बच्चा पैदा हुआ था। नाम रखा गया चंद्रशेखर तिवारी। चंद्रशेखर आजाद का बचपन भील जाति के बच्चों के साथ में कटा। यहीं से उसने तीर-कमान चलाना सीखा।. चंद्रशेखर आजाद ने मुश्किल से तीसरी क्लास पूरी की थी। आजाद ने सरकारी नौकरी भी की थी, वो तहसील में एक हेल्पर थे, फिर 3-4 महीने बाद उसने बिना इस्तीफा दिए नौकरी छोड़ दी थी। चंद्रशेखर आजाद की मां चाहती थी कि बेटा संस्कृत का बड़ा विद्वान बने। लेकिन मुन्ना का सपना तो देश को आजाद कराना था। मां ने तो बाप को भी राज़ी कर लिया था कि बच्चें को पढ़ने के लिए वाराणसी के काशी विद्यापीठ में भेज दो। पर आजाद तो आजादी चाहते थे और वो वहां से भागकर कानपुर आ गए।
फीलखाना मोहल्ले में बिताए कई साल
पंडित चंद्रशेखर आजाद कानपुर के फीलखाना मोहल्ले में प्रताप प्रेस की इमारत पर कई साल गुजारे। जाने माने पत्रकार व सवतंत्रता सेनानी गणेश शंकर से इनकी मित्रता हो गई और इसी इमारत पर क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकें होने लगीं। शहीद भगतसिंह की मुलाकात पंडित आजाद से गणेश शंकर वि़़द्यार्थी ने कराया। फिर दोनों में दोस्ती हो गई । लहौर बम कांड की पूरी रणनीति यहीं पर बनाई गई। कानपुर के साथ ही आसपास के कईजिलों के क्रांतिकारी पंडित जी के साथ आ गए और अंग्रेजों के खलाफ विरोध में कूद गए। इतिहासकार के मुताबिक असहयोग आंदोलन बंद होने के बाद चंद्रशेखर आजाद ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन पार्टी‘ के सदस्य बन गए। आगे चलकर वे इस पार्टी में कमांडर-इन-चीफ़ भी बनें।
तो सरेंडर को राजी हुए थे आजाद
इतिहासकार कपूर बताते हैं कि चंद्रशेखर आजाद का एक दोस्त रूद्रनारायण था, जो ग़ज़ब का पेंटर भी था। आजाद की मूंछो पर तांव देते हुए पेंटिग इसी ने बनाई थी। इसके घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी तो एक बार चंद्रशेखर आजाद अंग्रेजों के सामने सरेंडर करने को तैयार हो गए थे ताकि इनाम के पैसे दोस्त को मिल जाए और उसका घर अच्छे से चल सके। लेकिन जब रूद्रनारायण को ये बात पता चली तो वो पंडित जी के साथ लिपटकर रो पड़ा। उसने कहा था कि आजाद हमें पैसा नहीं, आजादी चाहिए। कपूर ने बताया कि यही पेंटर प्रताप अखबार में अंग्रेजों के जल्मों सितम के कार्टून बनाने लगे। रूद्रनारायण पंडित जी के साथ पूरे दो साल रहे और पुलिस से बचकर इनके लिए कई कार्यों को अंजाम दिया।
10 साल तक रहे फरार
आजाद ने अपनी जिंदगी के 10 साल फरार रहते हुए बिताए। एक समय में चंद्रशेखर आजाद झाँसी के पास 8 फीट गहरी और 4 फीट चौड़ी गुफा में सन्यासी के वेश में रहते थे। जब अंग्रेजों को इनके ठिकाने का पता चला तो इन्होनें स्त्री के कपड़े पहनकर अंग्रजों को चकमा दे दिया। 1925 में रामप्रसाद बिस्मिल के साथ मिलकर किए गए काकोरी कांड के पीछे चंद्रशेखर आजाद का ही दिमाग था। फिर 1928 में सांडर्स की हत्या के बाद तो आजाद, अंग्रेजों का जानी दुश्मन बन गया।लाला लाजपत राय की हत्या के बाद भगत सिंह ने चंद्रशेखर आजाद से संपर्क बनाया। आजाद ने भगत सिंह और उसके साथियों को ट्रेनिंग दी। भगत सिंह उन्हें अपना गुरू मानते थे।
डिप्टी एसपी विश्ववेश्वर सिंह के जबड़े में लगी गोली
7 फ़रवरी 1931 को जब एल्फ़्रेड पार्क में चंद्रशेखर आज़ाद, जामुन के पेड़ के नीचे एक साथी के साथ कुछ बातचीत कर रहे थे, तभी एक मुखबिर की सूचना पर डिप्टी एसपी ठाकुर विश्ववेश्वर सिंह और पुलिस अधीक्षक सर जॉन नॉट बावर ने पूरे पार्क को घेर लिया था। बावर ने पेड़ की आड़ लेकर चंद्रशेखर आज़ाद पर गोली चलाई जो उनकी जांघ को चीरकर निकल गई। दूसरी गोली विश्ववेश्वर सिंह ने चलाई, जो उनकी दाहिनी बांह में लगी। घायल होने के बाद आज़ाद लगातार बाएं हाथ से गोली चलाते रहे. आज़ाद ने जवाबी हमले में जो गोली चलाई वह विश्ववेश्वर सिंह के जबड़े में लगी। आज़ाद ने किसी पुलिसकर्मी को निशाना नहीं बनाया।
Updated on:
12 Aug 2017 08:09 am
Published on:
12 Aug 2017 08:05 am
